EPF Interest Rate: क्या सच में 10% होने वाला है पीएफ पर ब्याज? संसद में सरकार ने दिया बड़ा अपडेट!
EPFO Interest Rate Hike News: प्राइवेट सेक्टर में नौकरी करने वाले करोड़ों कर्मचारियों के लिए ईपीएफ (Employees' Provident Fund) सिर्फ एक बचत खाता नहीं, बल्कि बुढ़ापे की सबसे बड़ी लाठी है। वर्तमान में ईपीएफ पर मिलने वाला 8.25% ब्याज अन्य सेविंग स्कीम्स के मुकाबले काफी बेहतर माना जाता है, लेकिन सोशल मीडिया और गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि क्या यह ब्याज दर बढ़कर 10% हो सकती है? हाल ही में लोकसभा में इस मुद्दे पर सरकार से सीधे सवाल किए गए, जिसके बाद श्रम मंत्रालय ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है।
संसद में गूँजा 10% ब्याज का सवाल
लोकसभा में सांसद विजयकुमार उर्फ विजय वसंत ने कर्मचारी भविष्य निधि की ब्याज दरों को लेकर सरकार से तीखे सवाल पूछे। उन्होंने पूछा कि क्या सरकार ईपीएफ ब्याज दर को 10% तक ले जाने पर विचार कर रही है और क्या ईपीएफओ ने इसकी वित्तीय व्यावहारिकता (Financial Viability) का कोई आकलन किया है? इस सवाल ने उन लाखों कर्मचारियों की उम्मीदें जगा दीं जो अपने रिटायरमेंट फंड पर ज्यादा रिटर्न की तलाश में हैं।
श्रम मंत्री ने दिया लिखित जवाब: क्या है सच्चाई?
इन सवालों का औपचारिक जवाब देते हुए श्रम और रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने स्पष्ट किया कि फिलहाल सरकार के पास ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। उन्होंने बताया कि ईपीएफओ को अब तक किसी भी श्रम यूनियन (Labor Unions) की तरफ से ऐसा कोई औपचारिक आवेदन या मांग पत्र नहीं मिला है, जिसमें ब्याज दर को बढ़ाकर 10% करने का आग्रह किया गया हो। इस बयान से यह साफ हो गया है कि फिलहाल दरें बढ़ाने के लिए कोई दबाव या योजना मौजूद नहीं है।
कैसे तय होती है आपकी ब्याज दर?
अक्सर लोगों को लगता है कि सरकार अपनी मर्जी से ब्याज दरें तय करती है, लेकिन मंत्री ने इसकी पूरी प्रक्रिया समझाई। उन्होंने बताया कि ईपीएफ की ब्याज दरें प्रोविडेंट फंड के विशाल कोष (Corpus) द्वारा किए गए निवेश से होने वाली वास्तविक आय (Actual Income) पर निर्भर करती हैं। ईपीएफओ जहां अपना पैसा निवेश करता है, वहां से जो रिटर्न मिलता है, उसी के आधार पर कर्मचारियों को हिस्सा दिया जाता है। इसका मतलब यह है कि जब तक निवेश पर रिटर्न नहीं बढ़ता, तब तक ब्याज दर में भारी बढ़ोतरी संभव नहीं है।
सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) का अहम रोल
ब्याज दरों की सिफारिश करने का जिम्मा 'सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज' (CBT) के पास होता है। यह एक त्रिपक्षीय संस्था है जिसमें सरकार, नियोक्ता (Owners) और कर्मचारियों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। यह बोर्ड ही तय करता है कि वित्तीय वर्ष के अंत में फंड की सेहत कैसी है और कर्मचारियों को कितना लाभ दिया जा सकता है।
इनकम टैक्स के नियमों में भी बड़ा बदलाव
ईपीएफ की चर्चा के बीच टैक्सपेयर्स के लिए एक और बड़ी खबर है। नए वित्तीय वर्ष के साथ ही इनकम टैक्स एक्ट 2025 लागू हो चुका है, जिसने 1962 के पुराने नियमों को बदल दिया है। सरकार ने असेसमेंट ईयर (AY) 2026-27 के लिए सभी ITR फॉर्म भी नोटिफाई कर दिए हैं। ऐसे में नौकरीपेशा लोगों को अब अपनी टैक्स प्लानिंग और पीएफ निवेश को नए नियमों के हिसाब से मैनेज करना होगा।