नाना पाटेकर की पर्दे पर मां का रोल निभाने वाली दिग्गज अभिनेत्री मधु कांबीकर का निधन
भारतीय सिनेमा और मराठी रंगमंच की जानी-मानी और सम्मानित वरिष्ठ अभिनेत्री मधु कांबीकर का पुणे के एक निजी अस्पताल में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया है। 70 वर्ष से अधिक उम्र की अभिनेत्री पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रही थीं। गौरतलब है कि उन्होंने हिंदी और मराठी सिनेमा की कई यादगार फिल्मों में अपनी अमिट छाप छोड़ी है। बॉलीवुड की चर्चित फिल्म 'वजूद' और कई मराठी फिल्मों में उन्होंने अभिनेता नाना पाटेकर की मां की संजीदा और भावुक भूमिका निभाई थी, जिसे दर्शकों और आलोचकों द्वारा खूब सराहा गया था। किस्मत का अनूठा और दुखद संयोग यह रहा कि मधु कांबीकर ने उसी ऐतिहासिक शहर पुणे में अपनी आखिरी सांस ली, जहां कुछ समय पहले दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निकट संबंधी का भी अंतिम संस्कार किया गया था। इस दुखद खबर के सामने आते ही सिनेमा जगत, मराठी थिएटर बिरादरी और उनके अनगिनत प्रशंसकों में शोक की लहर दौड़ गई है।
लोककला 'लावणी' से लेकर थिएटर और बॉलीवुड तक का शानदार सफर
मधु कांबीकर का नाम मराठी लोक संस्कृति और कला जगत में बेहद सम्मान के साथ लिया जाता है। उन्होंने अपने अभिनय करियर की शुरुआत मराठी लोक कला 'लावणी' और लोकनाट्य (तमाशा) से की थी। अपनी अद्भुत नृत्य प्रतिभा, सशक्त संवाद अदायगी और अभिनय की बारीकियों के बल पर उन्होंने बहुत जल्द थिएटर और सिल्वर स्क्रीन पर अपनी जगह पक्की कर ली। 'दूध भात', 'जांभूळ आख्यान' और 'वस्त्रहरण' जैसे कालजयी मराठी नाटकों में उनके द्वारा निभाए गए पात्रों ने उन्हें घर-घर में लोकप्रिय बना दिया। उन्होंने रंगमंच के मंच पर जीवन भर शास्त्रीय और पारंपरिक लावणी कला को जीवित रखने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए अथक प्रयास किए।
नाना पाटेकर के साथ पर्दे की वो यादगार केमिस्ट्री और 'वजूद' फिल्म की यादें
फिल्म 'वजूद' (1998) में नाना पाटेकर के किरदार की मां के रूप में मधु कांबीकर के जीवंत अभिनय को आज भी दर्शक भूल नहीं पाए हैं। नाना पाटेकर जैसे तीव्रता से भरे अभिनेता के सामने स्क्रीन पर सहजता और भावुकता का संतुलन बनाए रखना बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है, लेकिन मधु जी ने अपनी भूमिका को इतनी खूबसूरती और गहराई से निभाया कि देखने वाले भाव-विभोर हो गए थे। दोनों कलाकारों के बीच पर्दे पर दिखी मां-बेटे की केमिस्ट्री ने फिल्म के भावनात्मक पक्ष को बहुत मजबूत किया था। इसके अतिरिक्त उन्होंने नाना पाटेकर के साथ कुछ अन्य मराठी और थिएटर प्रोजेक्ट्स में भी काम किया था, जहां उनके काम की हमेशा तारीफ हुई।
सांस्कृतिक जगत में शोक की लहर और दिग्गज कलाकारों की श्रद्धांजलि
मधु कांबीकर के निधन पर महाराष्ट्र के सांस्कृतिक जगत, राजनेताओं, थिएटर जगत के वरिष्ठ कलाकारों और बॉलीवुड के कई अभिनेताओं ने गहरा शोक व्यक्त किया है। पुणे के वैकुंठ श्मशान भूमि में उनके अंतिम संस्कार के दौरान सिनेमा और नाट्य जगत की कई बड़ी हस्तियां उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचीं। कला विशेषज्ञों का कहना है कि मधु जी का जाना केवल एक बेहतरीन अभिनेत्री का नुकसान नहीं है, बल्कि यह मराठी लोककला और पारंपरिक लावणी संस्कृति के एक महत्वपूर्ण युग का अंत है। उनके द्वारा कला के क्षेत्र में दिए गए अमूल्य योगदान को आने वाली पीढ़ियां हमेशा याद रखेंगी।