ओम शांति ओम के कल्ट गाने 'छन से जो टूटे कोई सपना' की 19 साल बाद भी कायम है लोकप्रियता

ओम शांति ओम के कल्ट गाने 'छन से जो टूटे कोई सपना' की 19 साल बाद भी कायम है लोकप्रियता

सिनेमा और संगीत का रिश्ता रूह से जुड़ा होता है। जब भी कभी बॉलीवुड में सच्चे प्यार के अधूरेपन, दिल टूटने के दर्द, तन्हाई और बिखरते सपनों को बयां करने वाले गानों की बात होती है, तो कुछ धुनें ऐसी होती हैं जो समय की हर सीमा को पार कर अमर हो जाती हैं। आज से लगभग 19 साल पहले रिलीज हुई बॉलीवुड की एक आइकॉनिक और ब्लॉकबस्टर फिल्म 'ओम शांति ओम' (Om Shanti Om) का एक ऐसा ही सदाबहार और दिल चीर देने वाला गाना आज भी युवाओं और संगीतप्रेमियों की प्लेलिस्ट में टॉप पर बना हुआ है। इस गीत के बोल, इसकी दर्द भरी धुन और इसमें पिरोई गई भावनाएं इतनी गहरी हैं कि जब भी यह कानों में गूंजता है, किसी अपने को खोने या प्यार में धोखा खाने का अहसास ताजा हो जाता है। आइए आज बात करते हैं उसी कल्ट गाने 'छन से जो टूटे कोई सपना' की और जानते हैं कि क्यों 19 साल बीत जाने के बाद भी इसकी चमक फीकी नहीं पड़ी है।

साल 2007 की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'ओम शांति ओम' और उसकी गहरी विरासत

साल 2007 में निर्देशक फराह खान के निर्देशन में बनी फिल्म 'ओम शांति ओम' ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता के तमाम रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। पुनर्जन्म, बॉलीवुड के सुनहरे दौर और एकतरफा सच्चे प्यार की कहानी पर आधारित इस फिल्म में सुपरस्टार शाहरुख खान, दीपिका पादुकोण (जिन्होंने इस फिल्म से अपने करियर की शुरुआत की थी), अर्जुन रामपाल, श्रेयस तलपड़े और किरण खेर जैसे दिग्गज कलाकार मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे। फिल्म का संगीत उस समय का सबसे बड़ा आकर्षण था, जिसे प्रसिद्ध संगीतकार जोड़ी विशाल-शेखर (Vishal-Shekhar) ने संवारा था। फिल्म के सभी गाने सुपरहिट रहे थे, लेकिन जब बात दिल के सबसे गहरे जख्मों को कुरेदने की आती है, तो ऋचा शर्मा और राहत फतेह अली खान की आवाज में गाया गया गाना 'छन से जो टूटे कोई सपना' हर किसी की जुबां पर आ जाता है। कुमार (Kumaar) द्वारा लिखे गए इसके मर्मस्पर्शी बोल आज भी दिल की गहराइयों को छू लेते हैं।

ऋचा शर्मा और राहत फतेह अली खान की जादुई और दर्द से भरी आवाज का संगम

इस गाने की सबसे बड़ी ताकत इसकी गायकी है। पार्श्व गायिका ऋचा शर्मा की आवाज में एक ऐसा दर्द और ठेठ अपनापन है जो सीधे सुनने वाले के दिल में उतर जाता है, और जब इसमें मशहूर पाकिस्तानी गायक राहत फतेह अली खान की रूहानी और सूफीयाना आवाज का साथ मिलता है, तो यह गाना संगीत प्रेमियों के लिए एक नायाब सौगात बन जाता है। दोनों कलाकारों ने अपनी आवाज के जरिए इस गाने में जिस बेबसी, तन्हाई और दिल के टूटने के अहसास को उकेरा है, उसकी मिसाल मिलना मुश्किल है। गाने की मुख्य पंक्ति—'छन से जो टूटे कोई सपना, जग सूना सूना लागे, सूना सूना लागे रे...'—इस बात का सबसे सटीक प्रतीक है कि जब इंसान की जिंदगी के सारे सपने कांच की तरह अचानक चकनाचूर हो जाते हैं, तो उसे पूरी दुनिया वीरान और खाली नजर आने लगती है। यह दर्द हर उस शख्स का दर्द बन जाता है जिसने कभी न कभी अपने जीवन में सच्चे प्यार को खोया हो।

फिल्म की कहानी में इस गाने का महत्वपूर्ण और टर्निंग पॉइंट वाला मोड़

फिल्म 'ओम शांति ओम' में इस गाने को एक बहुत ही संवेदनशील और महत्वपूर्ण मोड़ पर फिल्माया गया है। कहानी के अनुसार, मुख्य किरदार ओम (शाहरुख खान) शांतिप्रिया (दीपिका पादुकोण) से बेहद प्यार करता है और उसे अपनी दुनिया मान बैठता है। लेकिन कहानी में एक ऐसा क्षण आता है जब ओम को यह सच्चाई पता चलती है कि जिसे वह अपनी जान से ज्यादा चाहता था, वह शांतिप्रिया पहले से ही शादीशुदा है। उस पल ओम के दिल पर क्या गुजरती है, उसके सारे अरमान और सपने कैसे एक झटके में खाक में मिल जाते हैं, इसे पर्दे पर इस गाने के माध्यम से बेहद खूबसूरती से दिखाया गया है। स्क्रीन पर शाहरुख खान के चेहरे के भाव और बैकग्राउंड में बज रहा यह दर्द भरा संगीत दर्शकों की आंखों को नम कर देने के लिए काफी साबित होता है। यह गाना सिर्फ एक सिचुएशनल ट्रैक नहीं रह जाता, बल्कि यह फिल्म के मुख्य नायक के टूटे हुए भरोसे और आहत मन की चीख बन जाता है।

क्यों आज भी युवाओं के बीच कल्ट बना हुआ है यह सदाबहार गीत?

आज के दौर में जब रीमिक्स और तेज बीट्स वाले गानों का बोलबाला है, तब भी 'छन से जो टूटे कोई सपना' जैसी मेलोडी का जादू कम होने के बजाय समय के साथ और गहरा होता जा रहा है। आज की युवा पीढ़ी भी ब्रेकअप, तन्हाई और अधूरे प्यार के पलों में इस गाने को सुनना पसंद करती है। इसका कारण यह है कि इसमें आर्टिफिशियल रोबोटिक धुनों के बजाय असली भावनाओं, शास्त्रीय संगीत की बारीकियों और दिल को चीर देने वाले दर्द का मिश्रण है। विशाल और शेखर की जोड़ी ने जिस सहजता से वाद्य यंत्रों का प्रयोग किया है, वह गाने के मूड को और अधिक गाढ़ा कर देता है। यह गाना इस बात का जीता-जागता प्रमाण है कि जब संगीत दिल से निकलता है, तो वह पीढ़ियों की सीमाओं को लांघकर अमर हो जाता है।

निष्कर्ष: संगीत की दुनिया का एक ऐसा नगीना जो हमेशा दिलों में रहेगा जिंदा

कुल मिलाकर देखा जाए तो 'ओम शांति ओम' का यह गाना महज 19 साल पुराना एक फिल्मी ट्रैक नहीं है, बल्कि यह हिंदी सिनेमा के इतिहास का एक ऐसा मील का पत्थर है जो मानवीय संवेदनाओं और टूटे हुए दिलों की दाستان को बयां करता है। ऋचा शर्मा की सुरीली और धारदार आवाज, राहत फतेह अली खान का सूफी अंदाज, विशाल-शेखर का बेहतरीन संगीत और शाहरुख-दीपिका की जोड़ी ने मिलकर इसे जो मुकाम दिया, वह सदियों तक याद रखा जाएगा। जब तक दुनिया में प्यार रहेगा और टूटे हुए दिलों की दास्तां बयां की जाती रहेंगी, तब तक यह गाना हर तन्हा शाम को लोगों के जख्मों पर मरहम लगाता रहेगा।

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