Swara Bhasker Padmaavat Clarification: 'पद्मावत' के जौहर पर स्वरा भास्कर के बदले सुर! सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग के बाद दी सफाई, बोलीं- 'मैंने कतई नहीं कहा...'
फिल्म निर्माता संजय लीला भंसाली की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित फिल्म 'पद्मावत' के क्लाइमेक्स और उसके प्रसिद्ध 'जौहर' दृश्य पर की गई टिप्पणियों को लेकर बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। हाल ही में फिल्म के जौहर दृश्य को लेकर दिए गए उनके कड़े बयानों और आत्मदाह के चित्रण पर उठाए गए सवालों के बाद सोशल मीडिया पर उन्हें जबर्दस्त ट्रोलिंग और तीखी आलोचना का सामना करना पड़ा। इस भारी बैकलैश और सार्वजनिक विरोध के बीच अब स्वरा भास्कर के सुर कुछ बदले-बदले नजर आ रहे हैं और उन्होंने अपने कहे शब्दों पर विस्तृत सफाई पेश की है।
भारी ट्रोलिंग के बाद आई स्वरा भास्कर की सफाई: 'मेरे बयान को गलत समझा गया'
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लगातार हो रही आलोचनाओं का जवाब देते हुए स्वरा भास्कर ने स्पष्ट किया कि उनके बयान के संदर्भ को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है। उन्होंने कहा कि उनके कहने का यह आशय बिल्कुल नहीं था कि वह ऐतिहासिक वीरांगनाओं के बलिदान का अनादर कर रही थीं या रानी पद्मिनी और राजपूत महिलाओं द्वारा किए गए ऐतिहासिक जौहर को कमतर आंक रही थीं।
स्वरा ने अपनी सफाई में कहा, "मैंने कतई यह नहीं कहा कि ऐतिहासिक रूप से जो हुआ वह गलत संदर्भ में था या उस दौर की महिलाओं का निर्णय कायरतापूर्ण था। इतिहास अपनी जगह है और उस समय की परिस्थितियां बिल्कुल अलग थीं। मेरी बात केवल 21वीं सदी के आधुनिक सिनेमाई पर्दे पर उस दृश्य के कलात्मक महिमामंडन (Glorification) और भव्य प्रस्तुति को लेकर थी। एक दर्शक और नारीवादी के तौर पर मैंने केवल यह सवाल उठाया था कि क्या आज के समय में इस तरह के दृश्यों को बिना किसी आलोचनात्मक नजरिए के एक रोमांटिक जीत की तरह दिखाया जाना चाहिए?"
सोशल मीडिया पर क्यों भड़का था विवाद?
विवाद की शुरुआत उस वक्त हुई जब स्वरा भास्कर ने एक हालिया बातचीत के दौरान सालों पुराने 'पद्मावत' विवाद को दोबारा कुरेदा। उन्होंने फिल्म के अंत में दिखाए गए जौहर दृश्य को लेकर तीखी असहमति जताई थी और सवाल किया था कि महिलाओं के अस्तित्व को सिर्फ उनकी शारीरिक पवित्रता से जोड़कर क्यों देखा जाता है।
जैसे ही यह बयान सार्वजनिक हुआ, सोशल मीडिया यूजर्स, सिनेमा प्रेमियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने स्वरा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। कई यूजर्स ने आरोप लगाया कि स्वरा ऐतिहासिक तथ्यों और आक्रांताओं के अत्याचारों से बचने के लिए दिए गए भारतीय महिलाओं के सर्वोच्च बलिदान की गरिमा को ठेस पहुंचा रही हैं। लोगों ने इसे सस्ती लोकप्रियता हासिल करने का हथकंडा करार दिया, जिसके बाद स्वरा को बैकफुट पर आकर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी पड़ी।
फिल्म इंडस्ट्री और सिनेमाई आजादी पर भी रखी बात
स्वरा भास्कर ने अपनी सफाई में यह भी जोड़ा कि किसी भी फिल्म के विचार और संदेश पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि जब फिल्म 'पद्मावत' की रिलीज के समय हिंसा और धमकियों का दौर चल रहा था, तब उन्होंने कलात्मक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का पूरा समर्थन किया था।
स्वरा के मुताबिक, किसी फिल्म की आलोचना करना और उसे बैन करने की मांग करना दो बिल्कुल अलग बातें हैं। उन्होंने कभी फिल्म पर पाबंदी की वकालत नहीं की, बल्कि केवल महिलाओं के जीने के अधिकार और शारीरिक स्वायत्तता पर एक बौद्धिक विमर्श शुरू करने का प्रयास किया था। हालांकि, सोशल मीडिया पर बंटी राय के बीच यह देखना दिलचस्प होगा कि उनकी इस ताजा सफाई के बाद विवाद थमता है या बहस का यह सिलसिला आगे भी जारी रहता है।