रामायण में कव्वाली और सूफी बीट्स? 'मंगल रंग' गाने को लेकर एआर रहमान पर फूटा दर्शकों का गुस्सा
भारतीय सिनेमा की सबसे बहुप्रतीक्षित और भव्य पौराणिक फिल्म 'रामायणम्' के नए गाने 'मंगल रंग' के सामने आते ही इंटरनेट जगत में एक नया सांस्कृतिक विवाद शुरू हो गया है। फिल्म के निर्माताओं ने 25 अक्टूबर को इस गाने को आधिकारिक तौर पर श्रोताओं के समक्ष पेश किया था। संगीत के जादूगर कहे जाने वाले ऑस्कर विजेता संगीतकार एआर रहमान द्वारा तैयार किए गए इस गीत को देश के दो दिग्गज पार्श्व गायक अरिजीत सिंह और श्रेया घोषाल ने अपनी सुरीली आवाजों से सजाया है। दृश्यात्मक रूप से यह गीत मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम और माता सीता के अलौकिक प्रेम, उनके पावन मिलन और विवाह के बाद के पवित्र आध्यात्मिक सफर को केंद्र में रखकर रचा गया है। हालांकि, जहां एक सीमित दर्शक वर्ग को दोनों गायकों की जुगलबंदी पसंद आई, वहीं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अधिकांश दर्शकों ने इस गीत की संगीत संरचना को लेकर सख्त ऐतराज दर्ज कराया है।
श्रोताओं और नेटिजन्स का आरोप है कि इतने बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक महाकाव्य के दृश्यों के साथ जिस धुन को पिरोया गया है, वह पूरी तरह से सूफी और कव्वाली शैली से प्रेरित नजर आती है। रिलीज के कुछ ही मिनटों के भीतर माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर गाने की क्लिप्स वायरल होने लगीं और संगीत प्रेमियों ने एआर रहमान के इस प्रयोग पर गहरी निराशा जाहिर की। दर्शकों का मानना है कि रामायण जैसे सनातन इतिहास और पवित्र ग्रंथ के रूपांतरण में जो पारंपरिक भक्ति, शास्त्रीय राग और सांस्कृतिक गंभीरता होनी चाहिए थी, उसकी जगह बॉलीवुड के घिसे-पिटे सूफी-पॉप फॉर्मूले को जबरन थोप दिया गया है।
सूफी कव्वाली जैसी धुन पर भड़के यूजर्स, पुराने फॉर्मूले को रीसायकल करने का आरोप
गाने के सार्वजनिक होते ही प्रशंसकों की नाराजगी खुलकर सामने आने लगी। कई यूजर्स ने सीधे तौर पर संगीत निर्देशक एआर रहमान की संगीत समझ और इस प्रोजेक्ट के प्रति उनकी रिसर्च पर सवाल खड़े कर दिए। एक असंतुष्ट यूजर ने अपनी पोस्ट में लिखा कि मेकर्स ने उनकी सुपरहिट फिल्म रॉकस्टार के सूफी गाने 'कुन फया कुन' वाले टेम्पलेट को उठाया, उसे थोड़े बदलाव के साथ 'मंगल रंग' में फिट कर दिया और इसे रामायण का भक्ति संगीत बताकर पेश कर दिया। लोगों का कहना है कि यह प्रयोग न केवल संदर्भ से भटका हुआ है, बल्कि एक ऐतिहासिक महाकाव्य की मूल आत्मा के साथ भी बड़ा समझौता है।
वहीं एक अन्य यूजर ने बेहद तीखी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि महर्षि वाल्मीकि की रामायण में सूफी कव्वाली की बीट्स और क्लैपिंग पैटर्न डालना आधुनिक बॉलीवुड के सांस्कृतिक भटकाव का सबसे बड़ा प्रमाण है। यूजर ने आगे कहा कि करोड़ों रुपये के भारी-भरकम बजट के बावजूद निर्माताओं के पास न्यूनतम सांस्कृतिक समझ और रिसर्च का अभाव दिखाई देता है। उन्होंने लिखा कि हमारे पवित्र इतिहास और आस्था के केंद्रों को किसी आम शुक्रवार को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली सामान्य रोमांटिक-कॉमेडी फिल्मों की तरह नहीं आंका जाना चाहिए। इस तरह के संगीत से दृश्य का मूल भाव और भक्ति का आध्यात्मिक प्रवाह पूरी तरह बिखर जाता है।
शुद्ध संस्कृत और पारंपरिक रागों की अनदेखी पर उठे गंभीर सवाल
सोशल मीडिया पर संगीत प्रेमियों का एक बड़ा वर्ग इस बात को लेकर भी आक्रोशित है कि भारतीय शास्त्रीय संगीत और प्राचीन वाद्ययंत्रों की समृद्ध विरासत होने के बावजूद इस प्रकार की पश्चिमी और सूफी मिश्रित धुनों को क्यों चुना गया। फिल्म के टीजर में सुनाई दिए बैकग्राउंड म्यूजिक (BGM) की तो सराहना की गई, लेकिन मुख्य गीतों के कमजोर प्रभाव ने दर्शकों को निराश किया है। एक यूजर ने अपनी विस्तृत समीक्षा में लिखा कि उन्हें अब तक रिलीज हुए ट्रैक्स में केवल बैकग्राउंड स्कोर ही प्रभावशाली लगा, जबकि बाकी गाने बेहद औसत स्तर के हैं। विशेष रूप से 'मंगल रंग' का वाइब बहुत कमजोर और आधुनिकता से ग्रसित है।
यूजर्स का दृढ़ता से कहना है कि भगवान राम और सीता के विवाह या उनके प्रसंगों के लिए शुद्ध संस्कृत श्लोकों, पारंपरिक चौपाइयों और भारतीय शास्त्रीय रागों पर आधारित रचनाएं कहीं अधिक प्रभावी, प्रभावशाली और सौ गुना बेहतर सिद्ध होतीं। दक्षिण और उत्तर भारत के शास्त्रीय संगीत का समृद्ध संगम इस फिल्म को एक अमर संगीत दे सकता था, लेकिन इसके बजाय पॉप-कव्वाली बीट्स के चयन ने सिनेप्रेमियों को असमंजस में डाल दिया है। लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या रचनाकारों ने सिनेमाई रचनात्मक स्वतंत्रता के नाम पर विषय की मूल गरिमा को नजरअंदाज कर दिया है।
5 नवंबर को बड़े पर्दे पर दस्तक देगी फिल्म, क्या विवाद का पड़ेगा बॉक्स ऑफिस पर असर
नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही इस महत्वाकांक्षी त्रि-आयामी सिनेमाई गाथा 'रामायणम्' में भारतीय फिल्म जगत के कई दिग्गज चेहरे नजर आने वाले हैं। फिल्म में मुख्य भूमिका निभाते हुए बॉलीवुड अभिनेता रणबीर कपूर भगवान श्री राम के रूप में पर्दे पर दिखाई देंगे, जबकि दक्षिण भारतीय सिनेमा की लोकप्रिय अदाकारा साई पल्लवी माता सीता की भूमिका को जीवंत कर रही हैं। इसके अलावा टेलीविजन स्टार रवि दुबे, पैन-इंडिया सुपरस्टार यश, दिग्गज अभिनेता सनी देओल, अभिनेत्री रकुल प्रीत सिंह और लारा दत्ता जैसे बड़े कलाकार महत्वपूर्ण पौराणिक किरदारों में नजर आएंगे।
यह बहुचर्चित फिल्म आगामी 5 नवंबर को दुनिया भर के सिनेमाघरों में कई भाषाओं में एक साथ रिलीज होने के लिए पूरी तरह तैयार है। हालांकि, फिल्म के भव्य पैमाने और स्टार कास्ट को लेकर दर्शकों में भारी उत्सुकता बनी हुई है, लेकिन 'मंगल रंग' गाने को लेकर उपजा यह ताजा विवाद रिलीज से ठीक पहले मेकर्स के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। अब यह देखना काफी दिलचस्प होगा कि क्या फिल्म निर्देशक नितेश तिवारी या खुद संगीतकार एआर रहमान इस विवाद पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करते हैं, या फिर 5 नवंबर को सिनेमाघरों में दर्शकों का रुख इस भव्य प्रस्तुति के प्रति सकारात्मक बना रहता है।