8वें दिन कालीन भैया को तगड़ा झटका: 'हनुमान अंश' ने बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह पटका, Toxic की हालत हुई खराब

8वें दिन कालीन भैया को तगड़ा झटका: 'हनुमान अंश' ने बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह पटका, Toxic की हालत हुई खराब

सिनेमाघरों में इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर फिल्मों की ऐसी महासंग्राम जंग छिड़ी हुई है, जिसे देखकर ट्रेड एनालिस्ट्स और दर्शक दोनों हैरान रह गए हैं। एक तरफ जहां ओटीटी की दुनिया से बड़े पर्दे पर कदम रखने वाले लोकप्रिय किरदारों और बड़े बैनर की फिल्मों का दबदबा देखने की उम्मीद की जा रही थी, वहीं दूसरी तरफ क्षेत्रीय और विषय आधारित फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस के सारे समीकरण ही उलटकर रख दिए हैं। लंबे समय से बड़े पर्दे पर रिलीज होने का इंतजार कर रही बहुचर्चित फिल्मों और वेब सीरीज आधारित प्रोजेक्ट्स के बीच चल रही इस रेस में अब आंकड़ों ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। मिर्जापुर के प्रतिष्ठित और खौफनाक किरदार कालीन भैया की लोकप्रियता के सहारे सिनेमाघरों में उतरी फिल्म को रिलीज के आठवें दिन बॉक्स ऑफिस पर एक बहुत बड़ा झटका लगा है। चौंकाने वाली बात यह है कि एक तरफ जहां 'हनुमान अंश' जैसी फिल्म ने अपनी मजबूत पकड़ बनाते हुए बॉक्स ऑफिस पर इस फिल्म को बुरी तरह पटखनी दे दी है, वहीं दूसरी तरफ बड़े बजट की फिल्म 'Toxic' का ऐसा सन्नाटा पसरा है कि मानो उसे किसी का सांप सूंघ गया हो। इस उलटफेर ने फिल्म इंडस्ट्री के तमाम बड़े दिग्गजों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आज के दौर में केवल बड़े नामों से नहीं, बल्कि दमदार कहानी और दर्शकों के दिलों से जुड़ने वाले कंटेंट से ही फिल्में सिनेमाघरों में टिक सकती हैं।

बॉक्स ऑफिस पर आठवें दिन कालीन भैया की फिल्म को लगा गहरा धक्का

जब सिनेमाघरों में मिर्जापुर के लोकप्रिय कलाकारों और उस डार्क एक्शन जॉनर की फिल्म को उतारा गया था, तो ट्रेड पंडितों ने यह अनुमान लगाया था कि मासस सिनेमा के शौकीन दर्शक इस प्रोजेक्ट को सिर आंखों पर बिठा लेंगे। पहले हफ्ते के शुरुआती दिनों में फिल्म ने ठीक-ठाक आंकड़े दर्ज भी किए, जिससे निर्माताओं के चेहरे पर खुशी साफ झलक रही थी, लेकिन जैसे ही बॉक्स ऑफिस का यह हफ्ता अपने अंतिम पड़ाव यानी आठवें दिन पर पहुंचा, तो फिल्मों की कमाई का ग्राफ धड़ाम से नीचे आ गया। आठवें दिन के शुरुआती जो बॉक्स ऑफिस कलेक्शन सामने आए हैं, वे यह बताने के लिए काफी हैं कि दर्शक अब घिसी-पिट्टी और उम्मीद से कमजोर कहानियों को लंबे समय तक सिनेमाघरों में देखने के लिए तैयार नहीं हैं। कालीन भैया के रूप में मशहूर हो चुके मुख्य अभिनेता के स्टारडम और उनके भौकाल के बावजूद फिल्म दर्शकों को लंबे समय तक थियेटर में रोके रखने में कामयाब नहीं हो पाई, जिससे डिस्ट्रीब्यूटरों और मेकर्स की चिंताएं अचानक काफी ज्यादा बढ़ गई हैं।

'हनुमान अंश' का आंधी जैसा तूफान और बॉक्स ऑफिस पर कब्जा

एक तरफ जहां बड़ी फिल्मों की चमक फीकी पड़ती हुई नजर आ रही है, वहीं दूसरी तरफ 'हनुमान अंश' जैसी फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर ऐसा तूफानी प्रदर्शन किया है कि बड़ी-बड़ी फिल्मों के होश उड़ गए हैं। भारतीय संस्कृति, पौराणिक कथाओं के अनछुए पहलुओं और भावनाओं से ओत-प्रोत इस फिल्म ने रिलीज के साथ ही दर्शकों के दिलों पर इस कदर कब्जा जमाया कि सिनेमाघरों में हाउसफुल के बोर्ड टंगने शुरू हो गए। आठवें दिन भी जहां अन्य बड़ी फिल्मों की टिकट खिड़की पर सन्नाटा पसरा रहा, वहीं 'हनुमान अंश' ने अपनी मजबूत वर्ड-ऑफ-माउथ पब्लिसिटी के दम पर शानदार उछाल दर्ज करते हुए बॉक्स ऑफिस के सभी पुराने आंकड़ों को पीछे छोड़ दिया। इस फिल्म की सफलता ने एक बार फिर से इस बात पर मुहर लगा दी है कि जब कोई कहानी अपनी माटी की खुशबू और मजबूत सनातन सांस्कृतिक ताने-बाने के साथ पर्दे पर उतरती है, तो दर्शक खुद-ब-खुद खिंचे चले आते हैं और उसे ब्लॉकबस्टर बना देते हैं।

बड़े बजट की फिल्म Toxic की खामोशी और इंडस्ट्री में सन्नाटा

इस पूरे बॉक्स ऑफिस क्लैश में सबसे ज्यादा हैरानी इस बात को लेकर जताई जा रही है कि जिस बहुप्रचर्चित फिल्म 'Toxic' को लेकर सोशल मीडिया से लेकर हर तरफ जबरदस्त हाइप क्रिएट किया गया था, उसकी रफ्तार लगभग पूरी तरह थम सी गई है। ऐसा लग रहा है कि इस फिल्म को बॉक्स ऑफिस की रेस में उतरने से पहले ही किसी बड़े संकट का सामना करना पड़ा है क्योंकि सिनेमाघरों से लेकर टिकट विंडो तक इसकी चर्चाएं अचानक न्यूनतम स्तर पर आ गई हैं। फिल्म समीक्षकों का मानना है कि अत्यधिक देरी, मार्केटिंग रणनीतियों में कमी या फिर दर्शकों की बदलती हुई पसंद के आगे 'Toxic' का जादू वह असर नहीं दिखा पाया जिसकी उम्मीद मेकर्स ने की थी। बॉक्स ऑफिस पर मचे इस उठापटक के दौर में जहां एक तरफ छोटे बजट और मजबूत कंटेंट वाली फिल्में बाजी मार रही हैं, वहीं दूसरी तरफ भारी-भरकम बजट वाली फिल्मों का इस तरह से हांफ जाना फिल्म इंडस्ट्री के लिए एक बहुत बड़ा सबक साबित हो रहा है।

दर्शकों की बदली हुई पसंद और आने वाले दिनों के लिए बड़ा सबक

फिल्म जगत का यह हफ्ता इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण बन चुका है कि अब देश का आम दर्शक किसी भी फिल्म को केवल इसलिए सिनेमाघरों में देखने नहीं जाता है कि उसमें कोई बड़ा स्टार काम कर रहा है या किसी लोकप्रिय सीरीज का नाम जुड़ा हुआ है। आज के समय में दर्शक अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई और अपने कीमती वक्त का सही इस्तेमाल वहीं करना चाहते हैं जहां उन्हें पर्दे पर एक संपूर्ण मनोरंजन, नयापन और भावनात्मक जुड़ाव देखने को मिले। मिर्जापुर से जुड़ी इस फिल्म को आठवें दिन मिला झटका और 'हनुमान अंश' की धमाकेदार सफलता यह चीख-चीख कर कह रही है कि अब केवल हाइप और मार्केटिंग के सहारे फिल्में बॉक्स ऑफिस पर लंबे समय तक राज नहीं कर सकती हैं। आने वाले हफ्तों में जब नई फिल्में सिनेमाघरों में दस्तक देंगी, तो निर्माताओं को इन ताजा रुझानों को ध्यान में रखना होगा ताकि वे दर्शकों की उम्मीदों पर खरा उतर सकें और बॉक्स ऑफिस पर इस तरह के अप्रत्याशित झटकों से खुद को बचा सकें।