मैं हूं ना VFX ब्रेकडाउन: शाहरुख की गोलियां वीडियो नहीं, बल्कि एक सिंगल फोटो से फराह खान ने रचा था इतिहास

मैं हूं ना VFX ब्रेकडाउन: शाहरुख की गोलियां वीडियो नहीं, बल्कि एक सिंगल फोटो से फराह खान ने रचा था इतिहास

साल 2004 में आई शाहरुख खान, सुष्मिता सेन और सुनील शेट्टी स्टारर फिल्म 'मैं हूं ना' (Main Hoon Na) बॉलीवुड की सबसे बेहतरीन मसाला फिल्मों में से एक मानी जाती है। इस फिल्म का हर एक एक्शन सीन आज भी फैंस के जेहन में ताजा है। विशेष रूप से वो सीन तो आपको भी याद होगा, जिसमें शाहरुख खान (मेजर राम) दुश्मनों का पीछा करते हुए एक रिक्शे को हवा में काफी ऊंचाई तक उछाल देते हैं और फिर हवा में उड़ते हुए ही गोलियां बरसाते हैं।

ज्यादातर दर्शकों को लगता है कि यह सीन पूरी तरह से कंप्यूटर ग्राफिक्स यानी VFX से तैयार किया गया था, लेकिन सच यह है कि यह स्टंट काफी हद तक रियल था। हालांकि, इसे उस तरह नहीं फिल्माया गया था जैसा आप सोच रहे हैं। आइए करते हैं 'मैं हूं ना' के इस आइकॉनिक सीन का पूरा VFX ब्रेकडाउन और समझते हैं कि डायरेक्टर फराह खान ने इसे कैसे मुमकिन बनाया।

VFX नहीं, सिंगल तस्वीरों से तैयार हुआ पूरा सीन: फराह खान का मास्टरमाइंड

यह बात साल 2004 की है, जब भारतीय सिनेमा में आधुनिक विजुअल इफेक्ट्स (VFX) की तकनीक शुरुआती दौर में थी और आज की तरह एडवांस सॉफ्टवेयर मौजूद नहीं थे। ऐसे में इस कड़े सीन को फिल्माने के लिए डायरेक्टर फराह खान ने एक अनोखा और चालाकी भरा रास्ता चुना।

बहुत कम लोग जानते हैं कि शाहरुख खान का हवा में रिक्शे के साथ उड़कर गोलियां चलाने वाला वो शॉट कोई बहती हुई वीडियो फुटेज (Moving Video) नहीं, बल्कि एक सिंगल स्टिल फोटोग्राफ था। फराह खान ने एक खास हॉलीवुड तकनीक का इस्तेमाल करके उस सिंगल फोटो को वीडियो में बदला था, जो स्क्रीन पर इतना रियल लगा कि लोग आज भी दांतों तले उंगली दबा लेते हैं।

विदेश से मंगवाई गई थी 'मल्टी-कैमरा रिंग': ऐसे हुआ था शूट

मेकर्स ने इस पूरे स्टंट को अंजाम देने के लिए एक बेहद सटीक और चरणबद्ध प्लानिंग की थी:

  • 3D स्टोरीबोर्डिंग: सबसे पहले विजुअल इफेक्ट्स टीम ने पूरे सीन की टाइमिंग और एंगल्स को समझने के लिए एक 3D स्टोरीबोर्ड तैयार किया।

  • मल्टी-कैमरा रिंग (Bullet Time Rig): इस शॉट को परफेक्ट बनाने के लिए फराह खान ने विदेश से एक खास 'मल्टी-कैमरा रिंग' और हॉलीवुड के एक्सपर्ट टेक्नीशियन्स की टीम बुलाई थी। यह एक विशाल गोलाकार रिंग होती है, जिस पर एक साथ दर्जनों कैमरे एक निश्चित दूरी पर फिट किए जाते हैं।

  • हार्नेस और क्रेन का खेल: शूटिंग के दौरान शाहरुख खान और रिक्शे को मजबूत हार्नेस (सेफ्टी बेल्ट) और क्रेन की मदद से हवा में एक तय ऊंचाई पर लटकाया गया। अगर आप फिल्म के उस सीन को बहुत ध्यान से (फ्रेम-बाय-फ्रेम) देखेंगे, तो एक शॉट में शाहरुख खान के पैरों पर बंधी वो बेल्ट्स साफ नजर आ जाती हैं, जिन्हें बाद में पूरी तरह छुपाया नहीं जा सका था।

360 डिग्री एंगल और गोलियों का स्पेशल इफेक्ट

जब शाहरुख खान हवा में रिक्शे के साथ अपनी पोजीशन पर स्थिर (फ्रीज) हो गए, तब उस विशाल कैमरा रिंग पर लगे सभी कैमरों ने एक ही मिलीसेकंड के भीतर 360 डिग्री एंगल पर उनकी सैकड़ों तस्वीरें क्लिक कर लीं। इसके बाद पोस्ट-प्रोडक्शन (एडिटिंग टेबल) पर इन सभी स्टिल फोटोज को एक के बाद एक क्रमानुसार जोड़ दिया गया, जिससे दर्शकों को यह भ्रम हुआ कि कैमरा शाहरुख के चारों तरफ घूम रहा है, जबकि असल में शाहरुख हवा में स्थिर थे।

इस 360 डिग्री फील को देने के बाद, एडिटिंग के दौरान शाहरुख खान की बंदूक से निकलने वाली गोलियों (Muzzle Flash) का डिजिटल इफेक्ट और धमाकेदार बैकग्राउंड साउंड जोड़ा गया। जैसे ही यह 'फ्रीज शॉट' खत्म होता है, शाहरुख खान रिक्शे के साथ जमीन पर आते हैं और मेकर्स तुरंत फोटो सीक्वेंस से हटाकर वापस नॉर्मल वीडियो कैमरा फुटेज पर शिफ्ट हो जाते हैं। हॉलीवुड में इस तकनीक को 'बुलेट टाइम इफेक्ट' कहा जाता है, जिसका इस्तेमाल मशहूर फिल्म 'द मैट्रिक्स' (The Matrix) में भी हुआ था।

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