श्वेता तिवारी के एक्स-पति राजा चौधरी का बड़ा खुलासा: 'बेटी के बदले 93 लाख का फ्लैट' लेने के आरोप पर सालों बाद बताया सच
टेलीविजन की मशहूर अभिनेत्री श्वेता तिवारी और उनके एक्स-हस्बैंड राजा चौधरी के बीच का विवाद सालों बाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। 'कसौटी जिंदगी की' फेम श्वेता तिवारी ने कभी दावा किया था कि उनके पूर्व पति राजा चौधरी ने अपनी 11 साल की बेटी पलक तिवारी की कस्टडी छोड़ने के एवज में 93 लाख रुपये का एक फ्लैट लिया था। अब इस गंभीर आरोप पर सालों की खामोशी तोड़ते हुए राजा चौधरी ने अपना पक्ष रखा है और श्वेता पर कहानी को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का आरोप लगाया है। सिद्धार्थ कन्नन को दिए एक हालिया इंटरव्यू में राजा ने उस 93 लाख के फ्लैट, तलाक की शर्तों और पलक की कस्टडी से जुड़े कई अनसुने राज खोले हैं जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।
क्या था 93 लाख के फ्लैट और पलक की कस्टडी का विवाद
इस पूरे विवाद की जड़ श्वेता तिवारी का वह पुराना बयान है जिसमें उन्होंने बताया था कि तलाक के वक्त उन्होंने राजा को पलक के साथ प्रॉपर्टी में जॉइंट ओनरशिप का ऑफर दिया था। श्वेता के मुताबिक, राजा ने इसे ठुकरा दिया था और बदले में 93 लाख रुपये की कीमत वाला वन-बीएचके फ्लैट अपने नाम करवा लिया था, जिसके बाद ही उन्होंने तलाक के कागजात पर साइन किए और बेटी पलक की कस्टडी छोड़ी थी। हालांकि, राजा चौधरी ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि यह फ्लैट असल में उनके पिता ने शादी के वक्त 9 लाख रुपये में खरीदा था और इसका डाउन पेमेंट भी उनके पिता ने ही किया था। राजा का कहना है कि फ्लैट की ईएमआई उन्होंने और श्वेता ने मिलकर चुकाई थी, इसलिए यह कहना बिल्कुल गलत है कि यह कोई भारी-भरकम संपत्ति थी जिसे उन्होंने बेटी के बदले मांगा था।
श्वेता तिवारी पर कोर्ट के आदेशों की अनदेखी का आरोप
राजा चौधरी ने इंटरव्यू के दौरान अपना दर्द बयां करते हुए श्वेता तिवारी पर कोर्ट की अवमानना के भी गंभीर आरोप लगाए हैं। राजा ने बताया कि साल 2007 में अलग होने के बाद 2012 तक उनका केस फैमिली कोर्ट में चला, लेकिन श्वेता इन पांच सालों में बमुश्किल 10 बार ही कोर्ट पहुंची होंगी, जबकि वह खुद हर तारीख पर मौजूद रहते थे। राजा का दावा है कि अदालत ने उन्हें अपनी बेटी पलक से एक तय जगह पर मिलने की कानूनी अनुमति दी थी, लेकिन श्वेता ने कभी भी कोर्ट के इस आदेश का पालन नहीं किया और पलक को उनसे मिलने के लिए नहीं भेजा। इन हालातों ने उन्हें मानसिक रूप से काफी तोड़ दिया था और वह इस लंबी कानूनी लड़ाई को लड़ते-लड़ते पूरी तरह से थक चुके थे।
'मुझे बस शांति चाहिए थी, इसलिए साम्राज्य और बच्चे श्वेता को सौंप दिए'
अपने हालातों का जिक्र करते हुए राजा चौधरी ने बताया कि तलाक के दौर में उन पर कई अन्य मामले भी चल रहे थे, जिसकी वजह से उन्हें कोई किराए पर मकान तक देने को तैयार नहीं था। वह दर-दर भटकने को मजबूर थे और जिंदगी में एक ऐसा मुकाम आ गया था जहां उन्हें सिर्फ और सिर्फ शांति चाहिए थी। इसी हताशा में उन्होंने श्वेता से कहा था कि वह अपनी दौलत, साम्राज्य और बच्चे अपने पास रखें, बस उन्हें सिर छुपाने के लिए वह फ्लैट दे दें ताकि वह सुकून से रह सकें। राजा ने श्वेता पर तंज कसते हुए कहा कि श्वेता ने उनकी मजबूरी को एक 'बलिदान' और 'सौदे' का रूप दे दिया, जबकि असलियत में वह सिर्फ रहने के लिए एक छत मांग रहे थे। उन्होंने सवाल उठाया कि एक बेघर इंसान के सिर छुपाने की जगह मांगने को दौलत और बच्चे के बीच के सौदे से कैसे जोड़ा जा सकता है