Anuradha Paudwal on LGBTQ: 'शादी कोई मजाक नहीं...', समलैंगिक विवाह पर अनुराधा पौडवाल का बड़ा बयान; छिड़ गई नई बहस
मुंबई/लखनऊ। भारतीय संगीत जगत की दिग्गज और मशहूर पाशर्व गायिका अनुराधा पौडवाल (Anuradha Paudwal) अपने भजनों और सुरीले गीतों के अलावा अब अपने एक बेबाक बयान को लेकर सुर्खियों में आ गई हैं। मनीकंट्रोल हिंदी (Moneycontrol Hindi) की एक विशेष एंटरटेनमेंट और सोशल ट्रेंड्स रिपोर्ट के मुताबिक, अनुराधा पौडवाल ने पारंपरिक विवाह संस्था (Institution of Marriage) की प्रासंगिकता पर चर्चा करते हुए एलजीबीटीक्यू (LGBTQ) समुदाय और समलैंगिक विवाह को लेकर कुछ गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया से लेकर सांस्कृतिक हलकों तक परंपरा बनाम आधुनिकता को लेकर एक नई राष्ट्रव्यापी बहस छिड़ गई है।
'शादी कोई मजाक या कॉन्ट्रैक्ट नहीं'—अनुराधा पौडवाल का पारंपरिक रुख
एक हालिया इंटरव्यू में जब गायिका से आधुनिक समाज में बदलते रिश्तों और समलैंगिक शादियों (Same-Sex Marriage) के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने सनातन और पारंपरिक मूल्यों का पुरजोर समर्थन किया:
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संस्कृति और पवित्रता का हवाला: अनुराधा पौडवाल ने कहा कि भारतीय संस्कृति में विवाह केवल दो व्यक्तियों का मिलन या कोई कानूनी कॉन्ट्रैक्ट (Contract) नहीं है, बल्कि यह एक बेहद पवित्र संस्कार है। यह दो परिवारों और समाज को जोड़ने वाली एक आध्यात्मिक व्यवस्था है, जिसे किसी भी नए सामाजिक प्रयोग के नाम पर हल्का नहीं किया जाना चाहिए।
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बदलते ट्रेंड्स पर चिंता: उन्होंने आज की युवा पीढ़ी और आधुनिक विचारधाराओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि शादी जैसी गहरी और गंभीर संस्था को कुछ लोग एक मजाक या महज एक ट्रेंडी लाइफस्टाइल (Lifestyle) विकल्प की तरह देखने लगे हैं, जो आने वाले समय में सामाजिक ताने-बाने के लिए सही नहीं है।
LGBTQ समुदाय को लेकर उठाए सवाल, सोशल मीडिया पर बंटी जनता
गायिका ने स्पष्ट किया कि वे किसी के व्यक्तिगत अधिकारों के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन जब बात पारंपरिक विवाह के नियमों और धार्मिक मान्यताओं की आती है, तो उनके मूल स्वरूप से छेड़छाड़ नहीं की जानी चाहिए।
उनके इस बयान के इंटरनेट पर आते ही नेटिजन्स (Netizens) दो धड़ों में बंट गए हैं:
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पारंपरिक वर्ग का समर्थन: एक बड़ा वर्ग अनुराधा पौडवाल के विचारों से पूरी तरह सहमत है। उनका मानना है कि आधुनिकता के नाम पर सदियों पुरानी भारतीय परंपराओं और विवाह के धार्मिक आधार को नष्ट नहीं किया जाना चाहिए।
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आधुनिक वर्ग का विरोध: वहीं, एलजीबीटीक्यू (LGBTQ+) अधिकारों के समर्थकों और युवा कार्यकर्ताओं का कहना है कि प्यार, गरिमा और कानूनी विवाह का अधिकार हर इंसान को मिलना चाहिए, चाहे उसका जेंडर या ओरिएंटेशन कुछ भी हो। वे इसे रूढ़िवादी सोच करार दे रहे हैं।
सांस्कृतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज
आपको बता दें कि अनुराधा पौडवाल पिछले कुछ समय से सामाजिक और धार्मिक मुद्दों पर काफी मुखर रही हैं। इससे पहले भी वे लाउडस्पीकर पर अज़ान और भजनों को लेकर दिए गए अपने बयानों के कारण काफी चर्चा में रही थीं। अब विवाह और एलजीबीटीक्यू समुदाय पर दिए गए उनके इस ताजा बयान ने मनोरंजन उद्योग और वैचारिक मंचों पर एक बार फिर हलचल तेज कर दी है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस संवेदनशील विषय पर फिल्म जगत और अन्य सामाजिक संस्थाओं से क्या प्रतिक्रियाएं सामने आती हैं।