जुकरबर्ग का रिकॉर्ड ध्वस्त: 22 साल के भारतीय मूल के सूर्या मिधा बने दुनिया के सबसे युवा सेल्फ-मेड अरबपति

जुकरबर्ग का रिकॉर्ड ध्वस्त: 22 साल के भारतीय मूल के सूर्या मिधा बने दुनिया के सबसे युवा सेल्फ-मेड अरबपति

आमतौर पर 22 साल की उम्र में युवा अपने कॉलेज के असाइनमेंट पूरे कर रहे होते हैं या अपनी पहली नौकरी की तलाश में भटक रहे होते हैं। लेकिन भारतीय मूल के युवा सूर्या मिधा (Surya Midha) ने इस उम्र में एक ऐसा कीर्तिमान स्थापित कर दिया है, जिसने वैश्विक बिजनेस जगत और सिलिकॉन वैली को हैरत में डाल दिया है।

सूर्या मिधा महज 22 साल की उम्र में दुनिया के सबसे युवा 'सेल्फ-मेड' (अपने दम पर बनने वाले) अरबपतियों की एलीट लिस्ट में शामिल हो गए हैं। उनकी इस ऐतिहासिक कामयाबी की सबसे बड़ी यूएसपी यह है कि उन्होंने फेसबुक (अब मेटा) के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग का सालों पुराना रिकॉर्ड भी तोड़ दिया है। जुकरबर्ग साल 2008 में 23 साल की उम्र में सबसे युवा अरबपति बने थे, जबकि सूर्या ने यह जादुई आंकड़ा 22 की उम्र में ही छू लिया। 'फोर्ब्स 2026' की रीयल-टाइम बिलियनेयर्स लिस्ट के मुताबिक, सूर्या मिधा की व्यक्तिगत नेटवर्थ लगभग 2.2 बिलियन डॉलर (करीब ₹18,000 करोड़) आंकी गई है।

स्कूल के दोस्तों के साथ शुरू हुआ 'मर्कोर' (Mercor) का सफर: कॉलेज बीच में ही छोड़ा

कैलिफोर्निया के सैन जोस में पले-बढ़े सूर्या मिधा के माता-पिता मूल रूप से भारत की राजधानी नई दिल्ली के रहने वाले हैं, जो बाद में अमेरिका जाकर बस गए थे। सूर्या ने अपने स्कूल के दिनों के दोस्तों— आदर्श हिरेमठ और ब्रेंडन फूडी के साथ मिलकर साल 2023 में 'मर्कोर' (Mercor) नामक एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) स्टार्टअप की नींव रखी थी। ये तीनों दोस्त स्कूल के समय में एक ही डिबेट टीम का हिस्सा हुआ करते थे।

तकनीक के प्रति अपने जुनून और आंत्रप्रेन्योरशिप के चलते सूर्या मिधा ने वाशिंगटन की प्रतिष्ठित जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी से फॉरेन स्टडीज की अपनी पढ़ाई को बीच में ही अलविदा कह दिया (College Drop-out) और पूरा ध्यान एआई स्टार्टअप को बड़ा करने में लगा दिया। आगे चलकर इन तीनों दोस्तों के आइडिया को टेक इन्वेस्टर पीटर थिएल के मशहूर ‘थिएल फेलोशिप’ प्रोग्राम का भी मजबूत सपोर्ट मिला।

इंसान नहीं, एआई अवतार लेता है इंटरव्यू: क्या काम करती है यह अनोखी कंपनी?

मर्कोर (Mercor) कोई ट्रेडिशनल जॉब सर्च या पारंपरिक हायरिंग प्लेटफॉर्म नहीं है। यह पूरी तरह से अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित एक नेक्स्ट-जेनरेशन रिक्रूटमेंट और टैलेंट-मैचिंग प्लेटफॉर्म है। इस प्लेटफॉर्म की सबसे खास बात यह है कि यहां नौकरी के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों का इंटरव्यू कोई इंसान नहीं, बल्कि एक 'AI अवतार' (AI Avatar) लेता है।

यह पूरी तरह से एक ऑटोमेटेड सिस्टम है, जो कुछ ही मिनटों के भीतर उम्मीदवारों के स्किल्स, कोडिंग एबिलिटी, पिछले अनुभव और रेज्यूमे का बारीकी से मूल्यांकन करके कंपनियों के लिए सबसे सटीक वर्कफोर्स (कर्मचारी) ढूंढ निकालता है। शुरुआत में इस प्लेटफॉर्म ने भारत के प्रतिभाशाली फ्रीलांस कोडर्स और इंजीनियरों को अमेरिकी टेक कंपनियों से जोड़ने का काम किया। आज मर्कोर के पास दुनिया भर के हजारों ऐसे एक्सपर्ट कॉन्ट्रैक्टर्स का नेटवर्क है, जो टेक दिग्गजों के लिए बड़े एआई मॉडल्स को ट्रेन करने और रिसर्च का काम करते हैं।

साल 2025 में आई जादुई तेजी: $10 बिलियन पहुंचा कंपनी का वैल्यूएशन

साल 2025 दुनिया भर में एआई एक्सपर्ट्स,软件 डेवलपर्स और रिमोट वर्क सॉल्यूशंस के लिहाज से एक टर्निंग पॉइंट साबित हुआ, जिसकी मांग में अचानक भारी उछाल आया। इसी ग्लोबल ट्रेंड का बंपर फायदा सूर्या मिधा के स्टार्टअप मर्कोर को मिला। फोर्ब्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी का सालाना रेवेन्यू (Annual Revenue) साल 2025 की शुरुआत में जहां $100 मिलियन था, वह महज कुछ ही महीनों में 5 गुना बढ़कर $500 मिलियन (करीब ₹4,100 करोड़) के पार पहुंच गया।

इस जबरदस्त ग्रोथ को देखते हुए बेंचमार्क, फेलिसिस और जनरल कैटलिस्ट जैसे सिलिकॉन वैली के दिग्गज वेंचर कैपिटलिस्ट निवेशकों ने कंपनी में करीब $350 मिलियन का भारी-भरकम फंड निवेश किया। इस फंडिंग राउंड के बाद मर्कोर का वैल्यूएशन सीधे 10 बिलियन डॉलर (करीब ₹83,000 करोड़) के पार पहुंच गया। सूर्या मिधा वर्तमान में इस बेहद सफल टेक कंपनी के चेयरमैन के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं और ग्लोबल टेक इंडस्ट्री का एक नया चेहरा बनकर उभरे हैं।

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