NEET में 500 से कम मार्क्स आने पर मिलेगा कौन सा मेडिकल कॉलेज? जानिए आपके लिए कौन से कोर्सेज और विकल्प हैं खुले
देश के सबसे कठिन और प्रतिष्ठित प्रवेश परीक्षाओं में शुमार नीट (NEET UG) का परिणाम आने के बाद हर साल लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों के सामने एक बहुत बड़ा सवाल खड़ा हो जाता है कि यदि स्कोर 500 से कम है, तो क्या डॉक्टर बनने का सपना अधूरा रह जाएगा। मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) और राज्य कोटे की काउंसलिंग के दौरान अक्सर यह देखा जाता है कि सरकारी एमबीबीएस सीटों के लिए कटऑफ आसमान छूती रहती है। ऐसे में यदि आपके भी नीट परीक्षा में 500 से कम अंक आए हैं, तो निराश होने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है, क्योंकि देश में ऐसे कई बेहतरीन मेडिकल कॉलेज और अल्टरनेटिव कोर्सेज मौजूद हैं जहां कम स्कोर पर भी आसानी से प्रवेश मिल सकता है। आइए जानते हैं कि कम मार्क्स आने पर आपके पास क्या-क्या शानदार विकल्प उपलब्ध हैं।
कम मार्क्स आने पर सरकारी और प्राइवेट कॉलेजों का गणित
नीट में 500 से नीचे का स्कोर हासिल करने वाले छात्रों के लिए सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की सीट मिलना जनरल कैटेगरी के तहत थोड़ा मुश्किल जरूर हो जाता है, लेकिन आरक्षित श्रेणियों या कुछ राज्यों के लो-कटऑफ कॉलेजों में अभी भी उम्मीद की किरण बाकी रहती है। इसके अलावा, देश के कई प्रतिष्ठित प्राइवेट मेडिकल कॉलेज और डीम्ड यूनिवर्सिटीज ऐसी हैं जो कम स्कोर वाले छात्रों को भी एमबीबीएस में प्रवेश का मौका देती हैं, हालांकि इसके लिए ट्यूशन फीस का बजट थोड़ा ज्यादा हो सकता है। यदि आपका स्कोर 400 से 490 के बीच है, तो स्टेट कोटा काउंसलिंग के जरिए सेमी-गवर्नमेंट या मैनेजमेंट कोटे की सीटों पर विचार किया जा सकता है।
बीडीएस, बीएएमएस और अन्य पैरामेडिकल कोर्सेज के बेहतरीन विकल्प
यदि एमबीबीएस में प्रवेश पाना संभव नहीं हो पा रहा है, तो इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि मेडिकल फील्ड में आपके करियर के रास्ते बंद हो गए हैं। आज के समय में बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी यानी बीडीएस (BDS), आयुर्वेद चिकित्सा में बीएएमएस (BAMS), होम्योपैथी में बीएचएमएस (BHMS) और यूनानी चिकित्सा में बीयूएमएस (BUMS) जैसे कोर्स छात्रों के बीच बेहद लोकप्रिय हो रहे हैं। कम मार्क्स वाले छात्र इन आयुष कोर्सेज के जरिए भी एक सफल डॉक्टर बनने का अपना सपना पूरा कर सकते हैं। इसके अलावा फिजियोथेरेपी (BPT), ऑक्यूपेशनल थेरेपी, नर्सिंग (B.Sc Nursing) और विभिन्न पैरामेडिकल एवं फार्मेसी कोर्सेज में भी नीट स्कोर के आधार पर शानदार करियर ऑप्शंस मिल जाते हैं।
काउंसलिंग के दौरान सही रणनीति अपनाना है सबसे जरूरी
कम मार्क्स आने पर एडमिशन मिलने की संभावना पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करती है कि आप काउंसलिंग प्रक्रिया में किस तरह की रणनीति अपनाते हैं। कई बार छात्र सही जानकारी न होने के कारण बेहतरीन विकल्पों से चूक जाते हैं। इसलिए जरूरी है कि आप मॉप-अप राउंड और स्ट्रे वैकेंसी राउंड तक की सभी काउंसलिंग प्रक्रियाओं पर पैनी नजर रखें। विभिन्न राज्यों की काउंसलिंग वेबसाइट्स की कटऑफ लिस्ट का बारीकी से विश्लेषण करें और अपने बजट व स्कोर के अनुसार सही कॉलेज का चुनाव करें। सही रिसर्च और सूझबूझ से की गई काउंसलिंग आपको कम स्कोर पर भी एक बेहतरीन संस्थान में सीट दिला सकती है।