UP NEET UG Counselling 2026: यूपी नीट यूजी काउंसलिंग से 69 से अधिक अभ्यर्थी बाहर! डीजीएमई का बड़ा एक्शन, जानिए डिबार होने की 2 मुख्य वजहें

UP NEET UG Counselling 2026: यूपी नीट यूजी काउंसलिंग से 69 से अधिक अभ्यर्थी बाहर! डीजीएमई का बड़ा एक्शन, जानिए डिबार होने की 2 मुख्य वजहें

उत्तर प्रदेश के मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में एमबीबीएस (MBBS) और बीडीएस (BDS) पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए शुरू हुई UP NEET UG 2026-27 काउंसलिंग प्रक्रिया के बीच चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण महानिदेशालय (DGME UP) ने बड़ी कार्रवाई की है। महानिदेशालय ने नियमों का उल्लंघन करने के कारण 69 अभ्यर्थियों (कुल 71 मामलों का हवाला) को आगामी काउंसलिंग प्रक्रिया से 'डिबार' (Debarred) घोषित कर दिया है। इसका सीधा मतलब यह है कि ये अभ्यर्थी शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए उत्तर प्रदेश के किसी भी सरकारी या निजी मेडिकल/डेंटल कॉलेज में काउंसलिंग के माध्यम से प्रवेश नहीं ले सकेंगे। डीजीएमई ने इस संबंध में आधिकारिक सूची और आदेश भी जारी कर दिया है।

अभ्यर्थियों को डिबार करने के पीछे की 2 मुख्य वजहें

महानिदेशालय द्वारा जारी सूचना के अनुसार, अभ्यर्थियों पर यह कड़ा एक्शन काउंसलिंग के तय नियमों का पालन न करने की वजह से लिया गया है। इस कार्रवाई के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण हैं:

  1. सीट अलॉटमेंट के बाद कॉलेज में रिपोर्ट न करना (Non-Reporting):

    पिछले सत्र (2025-26) की काउंसलिंग के स्ट्रे वैकेंसी (Stray Vacancy) या स्पेशल स्ट्रे वैकेंसी राउंड में जिन अभ्यर्थियों को एमबीबीएस या बीडीएस की सीट आवंटित की गई थी, लेकिन उन्होंने तय समय सीमा के भीतर संबंधित संस्थान में जाकर प्रवेश नहीं लिया, उन्हें नियमानुसार अगली काउंसलिंग प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया है। ऐसे में लगभग 51 अभ्यर्थी (38 एमबीबीएस और 13 बीडीएस) शामिल हैं जिन्होंने सीट ब्लॉक की लेकिन ज्वाइन नहीं किया।

  2. कोर्स पूरा होने से पहले बीच में सीट छोड़ना (Resignation):

    काउंसलिंग के अंतिम दौर में सीट आवंटित होने और दाखिला लेने के बाद कई छात्रों ने कोर्स पूरा किए बिना ही बीच में ही अपनी सीट से इस्तीफा (Resign) दे दिया। सरकारी शासनादेश संख्या के नियमों के तहत, यदि कोई अभ्यर्थी अंतिम राउंड में अलॉटेड सीट पर एडमिशन लेने के बाद पढ़ाई छोड़ता है, तो उसे अगले शैक्षणिक सत्र की दाखिला प्रक्रिया से प्रतिबंधित कर दिया जाता है। इस श्रेणी में 20 अभ्यर्थी (13 एमबीबीएस और 7 बीडीएस) शामिल हैं।

डीजीएमई ने क्यों उठाया यह सख्त कदम?

चिकित्सा शिक्षा विभाग का कहना है कि जब कोई अभ्यर्थी काउंसलिंग के अंतिम दौर में सीट अलॉट होने के बावजूद रिपोर्ट नहीं करता या एडमिशन लेने के बाद सीट छोड़ देता है, तो वह मूल्यवान मेडिकल सीट खराब (Waste) हो जाती है। इससे दूसरे योग्य और मेधावी अभ्यर्थी एमबीबीएस/बीडीएस में दाखिला पाने से वंचित रह जाते हैं। सीटों की इस बर्बादी और 'सीट ब्लॉकिंग' (Seat Blocking) के खेल को रोकने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार और डीजीएमई ने काउंसलिंग गाइडलाइंस में इस दंडात्मक नियम को सख्ती से लागू किया है।

काउंसलिंग में भाग ले रहे नए अभ्यर्थियों के लिए जरूरी सलाह

यूपी नीट यूजी 2026-27 की काउंसलिंग में भाग ले रहे सभी छात्र-छात्राओं को सलाह दी गई है कि वे अपनी चॉइस फिलिंग (Choice Filling) बेहद सावधानी से करें। जिस कॉलेज या सीट पर आप वाकई एडमिशन लेना चाहते हैं, केवल उसी का विकल्प चुनें। यदि आपको स्ट्रे वैकेंसी या किसी भी राउंड में सीट अलॉट होती है और आप रिपोर्ट नहीं करते हैं, तो आपकी सिक्योरिटी मनी (Security Deposit) जब्त कर ली जाएगी और आपको अगले सत्र की काउंसलिंग से भी बाहर किया जा सकता है।

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