रिजल्ट आते ही शुरू होगा मेडिकल कॉलेज का सफर, जानिए काउंसलिंग में सिलेक्शन पाने की पूरी प्रक्रिया
नीट यूजी (NEET UG 2026) का रिजल्ट जारी होते ही देश भर के लाखों छात्रों की नजरें मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन की प्रक्रिया पर टिक जाएंगी। नीट की परीक्षा पास करना तो केवल पहली सीढ़ी है, लेकिन असली चुनौती तो अब शुरू होगी—'काउंसलिंग'। एमबीबीएस (MBBS) और बीडीएस (BDS) की प्रतिष्ठित सीटों के लिए काउंसलिंग का दौर बेहद महत्वपूर्ण होता है, जहां छोटी सी चूक भी आपके सपनों के कॉलेज में दाखिले का रास्ता रोक सकती है। जैसे ही स्कोरकार्ड आपके हाथों में होगा, काउंसलिंग का पोर्टल खुल जाएगा, इसलिए आपको पहले से ही अपनी पूरी तैयारी और रणनीति तैयार रखनी होगी।
ऐसे काम करती है नीट काउंसलिंग की पूरी प्रणाली
नीट काउंसलिंग मुख्य रूप से दो स्तरों पर होती है: ऑल इंडिया कोटा (AIQ - 15%) और स्टेट कोटा (85%)। एमसीसी (MCC) द्वारा आयोजित ऑल इंडिया काउंसलिंग में भाग लेने के लिए आपको आधिकारिक वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन करना होगा, जहां आप अपनी पसंद के कॉलेजों और कोर्सों को प्राथमिकता के आधार पर चुनते हैं। वहीं, स्टेट कोटा के लिए आपको संबंधित राज्य की मेडिकल काउंसलिंग की वेबसाइट पर अलग से पंजीकरण करना अनिवार्य है। कॉलेज अलॉटमेंट पूरी तरह से आपकी नीट रैंक, कैटेगरी और सीटों की उपलब्धता पर निर्भर करता है, इसलिए चॉइस फिलिंग के दौरान बहुत सावधानी बरतें।
काउंसलिंग में सफलता पाने के लिए जरूरी टिप्स
एडमिशन पक्का करने के लिए केवल अच्छे अंक ही काफी नहीं, बल्कि सही काउंसलिंग रणनीति भी जरूरी है। सबसे पहले अपने सभी दस्तावेज जैसे—नीट एडमिट कार्ड, स्कोरकार्ड, कक्षा 10वीं और 12वीं की मार्कशीट, जाति प्रमाण पत्र और पहचान पत्र तैयार रखें। कॉलेज चुनते समय केवल टॉप कॉलेजों के नाम ही न भरें, बल्कि अपने रैंक के अनुसार उन कॉलेजों की लिस्ट भी तैयार रखें जहाँ पिछले सालों में कट-ऑफ आपके स्कोर के दायरे में रही हो। काउंसलिंग के दौरान हर राउंड की तारीखों और दिशा-निर्देशों पर पैनी नजर रखें। याद रखें, रजिस्ट्रेशन से लेकर कॉलेज रिपोर्टिंग तक की हर प्रक्रिया समयबद्ध होती है, इसलिए किसी भी स्टेप को अंतिम समय के लिए न छोड़ें।