CBSE 12वीं में 75% से कम नंबर आने से क्या टूट जाएगा IIT का सपना? टेंशन में आए JEE Advanced के छात्र

CBSE 12वीं में 75% से कम नंबर आने से क्या टूट जाएगा IIT का सपना? टेंशन में आए JEE Advanced के छात्र

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने 13 मई को कक्षा 12वीं के परीक्षा परिणाम घोषित कर दिए हैं। रिजल्ट जारी होते ही देश भर के हजारों जेईई एडवांस्ड (JEE Advanced 2026) अभ्यर्थियों की धड़कनें तेज हो गई हैं और उनकी टेंशन काफी बढ़ गई है। इसका मुख्य कारण यह है कि इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले कई छात्रों के 12वीं बोर्ड में 75 फीसदी से कम अंक आए हैं। अब सोशल मीडिया से लेकर कोचिंग सेंटरों तक सिर्फ एक ही सवाल गूंज रहा है कि क्या बोर्ड में कम नंबर आने के बाद आईआईटी (IIT) में पढ़ने का सपना हमेशा के लिए खत्म हो गया? इस साल सीबीएसई का कुल पास प्रतिशत 85.20% दर्ज किया गया है, जो कि पिछले वर्ष की तुलना में 3.19% कम है। नतीजों में आई इस गिरावट ने छात्रों की चिंता को और ज्यादा गहरा कर दिया है।

क्या है आईआईटी का '75% वाला नियम'? जिसके फेर में फंसे छात्र

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IITs) में दाखिला पाने की राह सिर्फ देश की सबसे कठिन परीक्षा 'JEE Advanced' क्वालिफाई करने भर से पूरी नहीं होती। इसके लिए एक कड़ा शैक्षणिक मापदंड भी तय है। आधिकारिक नियमों के मुताबिक, आईआईटी और एनआईटी (NIT) जैसे शीर्ष संस्थानों में प्रवेश के लिए सामान्य (General), ओबीसी (OBC) और ईडब्ल्यूएस (EWS) कैटेगरी के छात्रों को अपनी 12वीं बोर्ड परीक्षा में कम से कम 75% कुल अंक (Aggregate Marks) हासिल करना अनिवार्य है। इसके अलावा दूसरा रास्ता यह है कि छात्र को अपने संबंधित शिक्षा बोर्ड के 'टॉप 20 पर्सेंटाइल' वाले छात्रों की सूची में शामिल होना चाहिए।

वहीं, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और दिव्यांग (PwD) वर्ग के छात्रों के लिए इस नियम में थोड़ी रियायत दी गई है, उनके लिए 12वीं बोर्ड में न्यूनतम 65% अंक लाना आवश्यक है। इस नियम का सीधा मतलब यह है कि यदि किसी छात्र ने जेईई एडवांस्ड में ऑल इंडिया रैंक-1 भी हासिल कर ली हो, लेकिन वह बोर्ड परीक्षा में इस तय प्रतिशत को छूने से चूक जाता है, तो उसे जोसा (JoSAA) काउंसलिंग के जरिए आईआईटी या एनआईटी में सीट आवंटित नहीं की जाएगी।

जेईई मेन में 97 पर्सेंटाइल, लेकिन बोर्ड में 67%; सोशल मीडिया पर फूटा दर्द

सीबीएसई रिजल्ट आने के बाद से ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर देश भर के प्रतिभावान छात्रों का दर्द और मानसिक तनाव साफ देखा जा सकता है। कई छात्र लगातार अपनी मार्कशीट और कहानियां साझा कर रहे हैं। एक अभ्यर्थी ने बताया कि उसने अत्यंत कठिन मानी जाने वाली जेईई मेन (JEE Main) परीक्षा में 97 पर्सेंटाइल जैसा शानदार स्कोर हासिल किया, जिससे उसका एडवांस्ड के लिए क्वालिफाई होना तय था, लेकिन जब सीबीएसई का रिजल्ट आया तो उसे महज 67% अंकों से ही संतोष करना पड़ा।

इसी तरह धनबाद के एक अन्य छात्र ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि जेईई मेन में 90 पर्सेंटाइल के करीब अंक होने के बावजूद सीबीएसई बोर्ड में उसे सिर्फ 71.8% मार्क्स मिले हैं। ऐसे सैकड़ों छात्र अब खुद को जोसा काउंसलिंग की रेस से बाहर मान रहे हैं। चूंकि 17 मई को जेईई एडवांस्ड की परीक्षा होनी तय है, उससे ठीक चार दिन पहले आए इस परिणाम ने हजारों अभ्यर्थियों को भारी मानसिक दबाव में डाल दिया है।

कम नंबर आने पर भी रास्ते हैं खुले, जानिए क्या हैं आपके पास विकल्प

अगर आपकी भी 12वीं बोर्ड परीक्षा में 75% (या आरक्षित वर्ग के लिए 65%) से कम अंक आए हैं, तो निराश होने या घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। शिक्षा प्रणाली और नियमों के भीतर अभी भी ऐसे कई रास्ते मौजूद हैं, जिनकी मदद से आप अपने आईआईटी के सपने को जिंदा रख सकते हैं:

री-इवैल्यूएशन और स्क्रूटनी (Re-evaluation): अगर आपको लगता है कि आपकी मेहनत के मुताबिक बोर्ड ने आपको कम नंबर दिए हैं, तो आप तुरंत सीबीएसई के री-इवैल्यूएशन (कॉपी दोबारा जांचने) और वेरिफिकेशन की प्रक्रिया के लिए आवेदन कर सकते हैं। कई बार इसमें नंबर बढ़ जाते हैं और छात्र 75% का आंकड़ा पार कर लेते हैं।

सीबीएसई सप्लीमेंट्री/इंप्रूवमेंट परीक्षा (Supplementary Exam): सीबीएसई छात्रों को अपने अंक सुधारने का एक और मौका देता है। आगामी 15 जुलाई को होने वाली सीबीएसई सप्लीमेंट्री परीक्षा में शामिल होकर छात्र उस विषय में अपने नंबर बढ़ा सकते हैं, जिसमें उनके कम अंक आए हैं।

एनआईओएस (NIOS) के जरिए सुधार: देश के कई छात्र नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (NIOS) के 'ऑन डिमांड एग्जामिनेशन' या आगामी ब्लॉक परीक्षाओं के जरिए भी अपनी 12वीं के अंकों में सुधार (Improvement) करने का रास्ता चुनते हैं, जिसे आईआईटी काउंसलिंग में पूरी मान्यता दी जाती है।

वैकल्पिक शीर्ष संस्थान (Alternative Top Institutes): यदि किसी कारणवश आईआईटी या एनआईटी का रास्ता मुश्किल नजर आता है, तो देश में कई अन्य बेहद प्रतिष्ठित सरकारी और निजी इंजीनियरिंग विश्वविद्यालय मौजूद हैं (जैसे IIITs, BITs, VIT, या शीर्ष राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज), जहां दाखिले के लिए कड़ा 75% वाला बोर्ड नियम आड़े नहीं आता और वे केवल जेईई मेन या अपनी प्रवेश परीक्षाओं के आधार पर बेहतरीन प्लेसमेंट वाले कोर्सेज में एडमिशन देते हैं।

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