दिल्ली यूनिवर्सिटी में महासंग्राम! कुछ कॉलेजों ने किया धर्मेंद्र प्रधान का समर्थन, भड़के छात्र संगठनों ने दिया अल्टीमेटम
देश के सबसे प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों में से एक, दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) में इन दिनों भारी राजनीतिक और वैचारिक जंग छिड़ गई है। परीक्षा प्रणालियों और हालिया प्रशासनिक सुधारों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के रुख पर विश्वविद्यालय पूरी तरह से दो गुटों में बंट गया है। एक तरफ जहां दिल्ली यूनिवर्सिटी के कुछ बड़े और प्रमुख कॉलेजों के प्राचार्यों व शिक्षक संघों ने शिक्षा मंत्री की नीतियों और सुधारवादी कदमों का खुला समर्थन किया है, वहीं दूसरी तरफ प्रमुख छात्र संगठनों ने इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। छात्र नेताओं ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक कैंपस में विरोध प्रदर्शन और अनिश्चितकालीन धरना पूरी तरह जारी रहेगा।
कुछ कॉलेजों ने क्यों किया केंद्रीय शिक्षा मंत्री का समर्थन
विश्वविद्यालय के प्रशासनिक गलियारों और कई कॉलेज काउंसिलों की तरफ से शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के पक्ष में एक सकारात्मक सुर देखने को मिला है। समर्थन करने वाले कॉलेजों का तर्क है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा उच्च शिक्षा में पारदर्शिता लाने और तकनीकी बदलावों को लागू करने के लिए जो कदम उठाए जा रहे हैं, वे लंबी अवधि में छात्रों के हित में हैं। इन कॉलेजों के प्रबंधकों का मानना है कि परीक्षा सुधारों और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के प्रभावी क्रियान्वयन से दिल्ली यूनिवर्सिटी की वैश्विक रैंकिंग और शैक्षणिक स्तर में बड़ा सुधार होगा। इसी वजह से वे सरकार के इन फैसलों के साथ मजबूती से खड़े नजर आ रहे हैं।
छात्र संगठनों का आर-पार का मूड, कैंपस में सुरक्षा व्यवस्था सख्त
दूसरी तरफ, वामपंथी और अन्य विपक्षी विचारधारा वाले छात्र संगठनों ने इस समर्थन को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। छात्र नेताओं का आरोप है कि शिक्षा मंत्रालय के हालिया फैसले आम छात्रों के हितों के खिलाफ हैं और इससे शिक्षा के निजीकरण को बढ़ावा मिल रहा है। कैंपस में सुबह से ही भारी नारेबाजी और पोस्टर वॉर का दौर शुरू हो गया है। छात्र संगठनों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे किसी भी प्रशासनिक दबाव के आगे झुकने वाले नहीं हैं। दिल्ली के नॉर्थ और साउथ दोनों ही कैंपस में किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए स्थानीय पुलिस प्रशासन और यूनिवर्सिटी सिक्योरिटी ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं और चप्पे-चप्पे पर जवानों की तैनाती कर दी गई है।
संवाद या टकराव: दिल्ली यूनिवर्सिटी में आगे क्या होगा
इस कूटनीतिक और वैचारिक खींचतान के बीच आम छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होने का खतरा भी मंडराने लगा है। अकादमिक विशेषज्ञों का कहना है कि अगर दोनों पक्षों के बीच जल्द ही कोई सकारात्मक संवाद (Dialogue) स्थापित नहीं हुआ, तो यह टकराव आने वाले दिनों में और उग्र रूप ले सकता है। विश्वविद्यालय प्रशासन अब दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों को एक मेज पर लाने की कोशिश कर रहा है ताकि कैंपस के शांत और शैक्षणिक माहौल को दोबारा बहाल किया जा सके। अब देखना यह होगा कि शिक्षा मंत्रालय और यूनिवर्सिटी के शीर्ष अधिकारी इस सुलगते विवाद को शांत करने के लिए क्या बीच का रास्ता निकालते हैं।