Education Rules : राजस्थान हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फ़ैसला, अब कोचिंग को लेकर करना होगा ये बड़ा बदलाव
News India Live, Digital Desk: राजस्थान से आ रही ये ख़बर उन सभी स्टूडेंट्स, पेरेंट्स और कोचिंग सेंटर्स के लिए बहुत ज़रूरी है, जो बोर्ड एग्ज़ाम की तैयारी कर रहे हैं! राजस्थान हाईकोर्ट ने एक ऐसा अहम फ़ैसला सुनाया है, जिसका सीधा असर अब छात्रों के भविष्य पर पड़ने वाला है. हाईकोर्ट ने साफ़ कर दिया है कि जो छात्र कोचिंग जाने के लिए स्कूल बंक करते हैं, उन्हें बोर्ड एग्ज़ाम में बैठने की इज़ाज़त नहीं मिलनी चाहिए. जी हां, आपने ठीक सुना, अब कोचिंग के लिए स्कूल छोड़ना बच्चों को भारी पड़ सकता है!
ये फ़ैसला उन सभी छात्रों के लिए एक कड़ा संदेश है, जो स्कूल को सेकेंडरी मानकर सिर्फ़ कोचिंग पर ही ध्यान देते हैं. अक्सर देखा जाता है कि कई बच्चे स्कूल में कम आते हैं, जबकि कोचिंग क्लासेज़ अटेंड करने पर उनका पूरा ध्यान रहता है. इससे एक तरफ तो स्कूल की रेगुलर पढ़ाई और अनुशासन प्रभावित होता है, और दूसरी तरफ बच्चों के समग्र विकास पर भी असर पड़ता है, क्योंकि स्कूल सिर्फ़ पढ़ाई का नहीं, बल्कि सामाजिक सीख का भी एक प्लेटफॉर्म होता है.
हाईकोर्ट ने अपने इस आदेश से स्कूलों में छात्रों की नियमित उपस्थिति (regular attendance) पर ज़ोर दिया है. यह सुनिश्चित करने की कोशिश की गई है कि छात्र अपनी पढ़ाई को गंभीरता से लें और स्कूलों में दी जाने वाली शिक्षा को पूरा महत्व दें. इससे शिक्षा व्यवस्था में सुधार आएगा और छात्रों को सिर्फ़ एग्ज़ाम पास करने की नहीं, बल्कि ज्ञान प्राप्त करने की दिशा में भी सोचने का मौका मिलेगा.
इस फ़ैसले के बाद अब पेरेंट्स और कोचिंग सेंटर्स को भी अपनी रणनीति बदलनी होगी. कोचिंग को सिर्फ़ एक सपोर्ट सिस्टम के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि स्कूल का विकल्प. अब छात्रों को स्कूल और कोचिंग के बीच एक सही संतुलन बनाना होगा ताकि वे बोर्ड एग्ज़ाम में शामिल होने के पात्र हो सकें. यह राजस्थान की शिक्षा व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव लाने वाला फ़ैसला है, जिसका दीर्घकालिक प्रभाव देखना दिलचस्प होगा.