दशहरा 2025: नोट कर लें सही तारीख़, पूजा का शुभ मुहूर्त और इस दिन का असली महत्व

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त्यौहारों का मौसम आते ही मन में एक अलग ही ख़ुशी छा जाती है, और इसी मौसम का एक सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण त्यौहार है दशहरा, जिसे विजयादशमी भी कहते हैं। यह त्यौहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। हर साल इसकी तारीख़ को लेकर लोगों में थोड़ा कन्फ़्यूज़न रहता है, तो आइए जानते हैं कि साल 2025 में दशहरा कब मनाया जाएगा और इसका क्या महत्व है।

दशहरा 2025 में कब है?

हिन्दू पंचांग के अनुसार, दशहरा का पर्व हर साल आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है।

  • साल 2025 में, दशमी तिथि 1 अक्टूबर, बुधवार को दोपहर 12:47 बजे शुरू होगी।
  • यह तिथि अगले दिन, यानी 2 अक्टूबर, गुरुवार को दोपहर 01:42 बजे तक रहेगी।

चूंकि हिन्दू धर्म में कोई भी त्यौहार उदया तिथि (जब सूर्योदय होता है) के आधार पर मनाया जाता है, इसलिए विजयादशमी यानी दशहरा का त्यौहार 2 अक्टूबर 2025, गुरुवार को मनाया जाएगा।

पूजा का शुभ मुहूर्त

इस दिन शस्त्र पूजा और अन्य शुभ कार्यों के लिए विजय मुहूर्त को सबसे अच्छा माना जाता है।

  • विजय मुहूर्त: 2 अक्टूबर को दोपहर 01:25 बजे से दोपहर 02:11 बजे तक रहेगा।
  • अपराह्न पूजा का समय: दोपहर 12:38 बजे से दोपहर 02:58 बजे तक।

क्यों मनाया जाता है दशहरा?

इस एक दिन से दो महान पौराणिक कथाएँ जुड़ी हैं:

  1. भगवान राम की रावण पर विजय: मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्री राम ने लंका के राजा, अहंकारी रावण का वध किया था और माता सीता को उसकी क़ैद से मुक्त कराया था। यह दिन बुराई के अंत का प्रतीक है, इसीलिए इस दिन रावण के पुतले जलाए जाते हैं।
  2. माँ दुर्गा की महिषासुर पर विजय: एक और कथा के अनुसार, इसी दिन माँ दुर्गा ने नौ दिनों तक चले युद्ध के बाद महिषासुर नामक राक्षस का संहार किया था। इसी वजह से इसे विजयादशमी कहते हैं और यह दिन माँ दुर्गा की शक्ति और विजय का भी प्रतीक है।

इस दिन शस्त्र पूजा करने, नए काम शुरू करने और गाड़ी या सोना ख़रीदने को भी बेहद शुभ माना जाता है। यह दिन हमें सिखाता है कि चाहे बुराई कितनी भी ताक़तवर क्यों न हो, अंत में जीत हमेशा अच्छाई और सच्चाई की ही होती है।