झारखंड में कुदरत का डबल अटैक 10 जिलों में भारी बारिश और ओलावृष्टि का अलर्ट, 60kmph की रफ्तार से चलेंगी हवाएं
News India Live, Digital Desk: तपती गर्मी से राहत की उम्मीद कर रहे झारखंड वासियों के लिए मौसम विभाग ने एक गंभीर चेतावनी जारी की है। बंगाल की खाड़ी से लेकर तेलंगाना तक बने निम्न दबाव के क्षेत्र (Low Pressure Zone) के चलते झारखंड के मौसम ने अचानक करवट ले ली है। मौसम विज्ञान केंद्र, राँची ने राज्य के 10 प्रमुख जिलों में अगले तीन दिनों तक (6 से 8 अप्रैल 2026) मूसलाधार बारिश और भीषण ओलावृष्टि (Hailstorm) का 'येलो' और 'ऑरेंज' अलर्ट जारी किया है। इस दौरान 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली विनाशकारी हवाएं जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर सकती हैं।
इन 10 जिलों पर मंडरा रहा है सबसे बड़ा खतरा
मौसम विभाग के अनुसार, राज्य के मध्य और उत्तर-पूर्वी हिस्सों में मौसम का सबसे ज्यादा असर देखने को मिलेगा। विशेष रूप से राँची, रामगढ़, बोकारो, कोडरमा, हजारीबाग, चतरा, गढ़वा, पलामू, सिमडेगा और चाईबासा में मेघ गर्जन के साथ तेज बारिश की संभावना है। रामगढ़ और बरही जैसे इलाकों में पहले ही हल्की बारिश दर्ज की जा चुकी है, जिससे तापमान में 1 से 7 डिग्री सेल्सियस तक की भारी गिरावट आई है। लोगों को सलाह दी गई है कि वे गरज-चमक के दौरान ऊंचे पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहें।
ओलावृष्टि से फसलों को भारी नुकसान की आशंका
यह बेमौसम बरसात किसानों के लिए नई मुसीबत लेकर आई है। 7 और 8 अप्रैल को दक्षिण-पूर्वी और मध्य झारखंड में ओले गिरने की प्रबल संभावना है। खेत में कटाई के लिए तैयार फसलों और खलिहानों में रखे अनाज को इससे भारी नुकसान पहुँच सकता है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि यदि संभव हो तो कटी हुई फसलों को सुरक्षित स्थानों पर ढक कर रखें। तेज हवाओं के कारण आम और लीची के मंजरों को भी काफी नुकसान होने की आशंका है, जिससे बागवानी करने वाले किसान चिंतित हैं।
तापमान में गिरावट से गर्मी से मिली राहत
भले ही यह बारिश किसानों के लिए चिंता का विषय है, लेकिन आम जनता को झुलसा देने वाली गर्मी से बड़ी राहत मिली है। पिछले 24 घंटों में डालटनगंज 37.2 डिग्री के साथ सबसे गर्म रहा, लेकिन अब बारिश के चलते पूरे राज्य के पारे में 3 से 4 डिग्री की गिरावट आने का अनुमान है। राँची का अधिकतम तापमान 30 से 31 डिग्री के आसपास रहने की संभावना है, जिससे मौसम सुहावना बना रहेगा। हालांकि, बिजली कड़कने (Lightning) की घटनाओं को देखते हुए प्रशासन ने 'वज्रपात' से बचने के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं।
10 अप्रैल के बाद ही साफ होगा आसमान
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के सक्रिय होने के कारण यह स्थिति बनी हुई है। 9 अप्रैल तक रुक-रुक कर बारिश और बादलों की आवाजाही जारी रहेगी। 10 अप्रैल 2026 के बाद ही मौसम पूरी तरह साफ होने की उम्मीद है, जिसके बाद तापमान में फिर से बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी और लू (Heat Wave) का असर शुरू हो सकता है। फिलहाल, जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके।