ITR भरने की जल्दी में कहीं कर न बैठें ये गलतियां, 15 सितंबर की डेडलाइन से पहले ध्यान रखें ये बातें

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इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की आखिरी तारीख जैसे-जैसे पास आती है, लोगों में इसे भरने की हड़बड़ी बढ़ जाती है. कई टैक्सपेयर्स, जिनके अकाउंट्स का ऑडिट होना है, उनके लिए ये डेडलाइन 15 सितंबर है. ऐसे में आखिरी पलों की जल्दबाजी अक्सर गलतियों की वजह बन जाती है. एक छोटी सी चूक भी आपको इनकम टैक्स विभाग का नोटिस भिजवा सकती है और आपको भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है.

अगर आप भी आखिरी समय में अपना ITR फाइल करने जा रहे हैं, तो इन जरूरी बातों का खास ध्यान रखें ताकि कोई परेशानी न हो.

1. सही ITR फॉर्म चुनें

सबसे पहली और सबसे आम गलती लोग सही ITR फॉर्म चुनने में करते हैं. आपकी आय के स्रोत (जैसे सैलरी, बिजनेस, कैपिटल गेन्स आदि) के आधार पर अलग-अलग फॉर्म होते हैं. गलत फॉर्म भरने पर आपका रिटर्न 'डिफेक्टिव' माना जा सकता है और आपको दोबारा सारी प्रक्रिया करनी पड़ सकती है. इसलिए, सबसे पहले यह सुनिश्चित करें कि आप अपनी आय के हिसाब से सही फॉर्म भर रहे हैं.

2. सारी इनकम की जानकारी दें

जल्दबाजी में लोग अक्सर अपनी सभी स्रोतों से हुई आय का ब्योरा देना भूल जाते हैं. अपनी सैलरी के अलावा, सेविंग अकाउंट के ब्याज, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) से मिली ब्याज, या किसी छोटे-मोटे फ्रीलांस काम से हुई कमाई को भी ITR में दिखाना जरूरी है. भले ही इन पर टैक्स कट चुका हो (TDS), इन्हें अपनी कुल आय में शामिल करना अनिवार्य है. आजकल आयकर विभाग के पास आपके सभी फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन की जानकारी होती है, इसलिए कुछ भी छिपाने की कोशिश न करें.

3. फॉर्म 26AS और AIS को जरूर चेक करें

फॉर्म 26AS और एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) आपके टैक्स फाइलिंग के सबसे बड़े मददगार हैं. इनमें आपके द्वारा साल भर में किए गए सभी फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन, काटे गए TDS और जमा किए गए टैक्स की पूरी जानकारी होती है. ITR भरने से पहले इन दोनों फॉर्म्स को इनकम टैक्स पोर्टल से डाउनलोड करें और अपनी इनकम और TDS की जानकारी से उसका मिलान कर लें. अगर कोई अंतर है, तो उसे समय रहते ठीक कराएं.

4. पर्सनल जानकारी को दोबारा जांचें

यह सुनने में बहुत छोटी बात लगती है, लेकिन सबसे ज्यादा गलतियां यहीं होती हैं. अपना नाम, पता, पैन नंबर, आधार नंबर और बैंक अकाउंट डिटेल्स को बहुत ध्यान से भरें. खासकर बैंक अकाउंट नंबर और IFSC कोड को दोबारा जांच लें. अगर यह गलत हुआ, तो आपका टैक्स रिफंड अटक सकता है.

5. फाइल करने के बाद वेरिफाई करना न भूलें

सिर्फ ITR फाइल कर देना ही काफी नहीं है. उसे वेरिफाई करना भी उतना ही जरूरी है. बिना वेरिफिकेशन के आपका ITR अधूरा माना जाता है और विभाग उस पर कोई कार्रवाई नहीं करता. आप आधार OTP, नेट बैंकिंग या डीमैट अकाउंट के जरिए आसानी से इसे ऑनलाइन वेरिफाई कर सकते हैं.

आखिरी तारीख का इंतजार करने से बेहतर है कि समय रहते अपना रिटर्न फाइल कर दें. लेकिन अगर आप आखिरी समय में फाइल कर भी रहे हैं, तो ठंडे दिमाग से और इन सभी बातों का ध्यान रखते हुए करें ताकि आपकी मेहनत पर पानी न फिरे.