Astrology : ग्रहण पर मृत्यु पंचक का साया: साल के सबसे अशुभ दिन लग रहा चंद्र ग्रहण, भूलकर भी न करें ये गलतियां
News India Live, Digital Desk: साल 2025 का आखिरी चंद्र ग्रहण सिर्फ एक खगोलीय घटना नहीं, बल्कि ज्योतिष की दृष्टि से एक बहुत ही अशुभ और दुर्लभ संयोग लेकर आ रहा है. 7-8 सितंबर को लगने वाला यह पूर्ण चंद्र ग्रहण 'मृत्यु पंचक' के दौरान लग रहा है, जो इसे और भी ज्यादा संवेदनशील और प्रभावशाली बना देता है. ज्योतिष शास्त्र में पंचक को बेहद अशुभ माना जाता है और जब यह ग्रहण के साथ पड़ जाए, तो विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है.
क्या होता है मृत्यु पंचक?
वैदिक ज्योतिष के अनुसार, जब चंद्रमा धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद और रेवती नक्षत्र में गोचर करता है, तो इस पांच दिन की अवधि को 'पंचक' कहते हैं. पंचक हर महीने आते हैं, लेकिन जब यह शनिवार से शुरू होता है, तो इसे 'मृत्यु पंचक' कहा जाता है, जो सभी पंचकों में सबसे ज्यादा अशुभ और कष्टदायी माना जाता है. इस दौरान किसी भी तरह के शुभ और मांगलिक कार्य करने की सख्त मनाही होती है.
ग्रहण और पंचक का खतरनाक संयोग
इस साल 7 सितंबर को चंद्र ग्रहण लग रहा है, जो 'मृत्यु पंचक' के अशुभ समय में पड़ेगा. यह ग्रहण भारत में भी दिखाई देगा, इसलिए इसका सूतक काल भी मान्य होगा. सूतक काल ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले लग जाता है और इस दौरान कोई भी शुभ काम नहीं किया जाता. ऐसे में ग्रहण और पंचक का एक साथ आना एक ऐसा अशुभ संयोग बना रहा है, जिसमें की गई एक छोटी सी गलती भी भारी पड़ सकती है.
सूतक काल और पंचक में भूलकर भी न करें ये काम:
- कोई नया काम या लेन-देन न करें: मृत्यु पंचक और सूतक काल में किसी भी नए काम की शुरुआत, नई नौकरी ज्वाइन करना, कोई बड़ा सौदा या लेन-देन करना अशुभ माना जाता है. इससे काम में सफलता नहीं मिलती और धन हानि की आशंका बनी रहती है.
- लकड़ी से जुड़ा काम न करें: पंचक के दौरान लकड़ी खरीदना या घर की छत डलवाना मना होता है. माना जाता है कि ऐसा करने से आग लगने का खतरा रहता है. ग्रहण के समय भी इन कामों से बचना चाहिए.
- दक्षिण दिशा में यात्रा से बचें: मृत्यु पंचक में दक्षिण दिशा की यात्रा को यम की दिशा माना गया है, इसलिए इस दिशा में यात्रा करना वर्जित होता है. अगर बहुत जरूरी हो तो हनुमान जी को गुड़-चने का भोग लगाकर ही यात्रा शुरू करें.
- गर्भवती महिलाएं रखें विशेष ध्यान: ग्रहण के सूतक काल में गर्भवती महिलाओं को घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए. उन्हें चाकू, कैंची, सुई-धागे जैसी नुकीली चीजों का इस्तेमाल भी नहीं करना चाहिए. माना जाता है कि इसका गर्भ में पल रहे शिशु पर बुरा असर पड़ सकता है.
- वाद-विवाद से दूर रहें: यह समय नकारात्मक ऊर्जा से भरा होता है, इसलिए घर में शांति का माहौल बनाए रखें. किसी से भी लड़ाई-झगड़ा या वाद-विवाद न करें, इससे मानसिक तनाव बढ़ सकता है.
- सोने और खाने से बचें: सूतक काल शुरू होने के बाद और ग्रहण के दौरान सोना, खाना बनाना और खाना-पीना वर्जित माना गया है. इस समय भगवान का ध्यान करें, मंत्र जाप या भजन-कीर्तन करना सबसे उत्तम होता है.
यह समय थोड़ा संवेदनशील है, इसलिए नियमों का पालन करना और अपने ईष्ट देव का ध्यान करना ही सबसे बेहतर उपाय है.