जन्माष्टमी के बाद न भूलें कान्हा की 'छठी' मनाना, जानें इस दिन क्या खास भोग लगाने से पूरी होती है हर मुराद

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भगवान श्री कृष्ण के जन्म का उल्लास, यानी जन्माष्टमी का पर्व, भले ही समाप्त हो गया हो, लेकिन नंदलाला के जन्मोत्सव की श्रृंखला अभी खत्म नहीं हुई है। जिस प्रकार हमारे घरों में किसी नवजात शिशु के जन्म के छठे दिन उसकी 'छठी' पूजने की परंपरा है, ठीक उसी प्रकार भाद्रपद मास की नवमी तिथि को भगवान श्री कृष्ण की छठी मनाई जाती हैं। यह दिन लड्डू गोपाल को अपने घर के सदस्य और एक नन्हे बालक के रूप में पूजने का एक बहुत ही विशेष और शुभ अवसर होता हैं।

इस दिन कान्हा की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और उन्हें पारंपरिक भोग अर्पित किए जाते हैं। मान्यता है कि इस दिन पूरे विधि-विधान से बाल गोपाल की पूजा करने से वे प्रसन्न होते हैं, घर में सुख-समृद्धि का वास होता है और संतान संबंधी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। तो चलिए, विस्तार से जानते हैं कान्हा की छठी के महत्व, 2025 में इसकी तिथि, शुभ मुहूर्त, और इस दिन लगाए जाने वाले विशेष भोग के बारे में।

 

कृष्ण छठी 2025: तिथि और शुभ मुहूर्त (Date and Auspicious Time)

हिन्दू पंचांग के अनुसार, भगवान कृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को हुआ था। इसके ठीक छठे दिन, यानी नवमी तिथि पर उनकी छठी मनाई जाती हैं।

  • जन्माष्टमी  2025 तिथि: सोमवार, 18 अगस्त 2025
  • कृष्ण छठी 2025 तिथि: रविवार, 24 अगस्त 2025

इस दिन पूजा का कोई विशेष मुहूर्त नहीं होता; आप अपनी सुविधानुसार पूरे दिन पूजा और उत्सव मना सकते हैं। हालांकि, सुबह के समय स्नान आदि के बाद पूजा करना सर्वोत्तम माना जाता हैं।

 

क्यों इतनी खास है कान्हा की छठी? (Significance of Krishna Chhathi)

हिंदू धर्म में, किसी भी बच्चे के जन्म के छठे दिन को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता हैं। इस परंपरा के पीछे गहरे आध्यात्मिक और सांस्कृतिक कारण हैं:

  • षष्ठी देवी की पूजा: माना जाता हैं कि षष्ठी देवी बच्चों की रक्षक और भाग्य विधाता होती हैं। जन्म के छठे दिन उनकी पूजा करने से बच्चे को लंबी आयु, अच्छा स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद मिलता हैं। कान्हा की छठी पर भी यही कामना की जाती है।
  • भाग्य का लेखन: लोक मान्यताओं के अनुसार, इसी रात को विधाता बच्चे का भाग्य लिखते हैं। इसलिए, इस दिन रात भर जागरण करने और भजन-कीर्तन करने का भी विधान हैं, ताकि बालक का भाग्य उत्तम हो।
  • नामकरण संस्कार: कई जगहों पर इसी दिन बच्चे का नामकरण संस्कार भी किया जाता है।

जब हम अपने घर में लड्डू गोपाल को एक बालक के रूप में रखते हैं तो हम इन सभी परंपराओं का पालन करके उनके प्रति अपनी भक्ति और वात्सल्य भाव प्रकट करते हैं।

 

छठी पर कान्हा को क्या लगाएं भोग? (Special Bhog for Kanha Ji)

कृष्ण छठी पर सबसे महत्वपूर्ण होता ਹੈ उन्हें लगाया जाने वाला विशेष भोग। इस दिन उन्हें उनकी पसंदीदा चीजों के साथ कुछ पारंपरिक व्यंजन भी अर्पित किए जाते हैं:

1. कढ़ी-चावल (Kadhi Chawal)

यह छठी का सबसे प्रमुख और अनिवार्य भोग है।

  • क्यों है महत्वपूर्ण?: कढ़ी, जिसे बेसन (चने के आटे) से बनाया जाता है, को हिंदू पूजा-पाठ में बहुत शुद्ध और शुभ माना जाता है। छठी के दिन विशेष रूप से बेसन की कढ़ी और चावल बनाकर बाल गोपाल को भोग लगाया जाता है। यह भोग कान्हा के स्वस्थ और सुखमय जीवन की कामना के साथ लगाया जाता ਹੈ।

2. माखन-मिश्री (Makhan Mishri)

कान्हा का नाम आते ही माखन-मिश्री का ध्यान सबसे पहले आता है।

  • क्यों है महत्वपूर्ण?: माखन चोर नंदकिशोर का माखन के प्रति प्रेम जगजाहिर है। यह उनका सबसे प्रिय भोग है। जन्माष्टमी से लेकर छठी तक, उन्हें हर दिन ताजा माखन और मिश्री का भोग अवश्य लगाना चाहिए।

3. पंजीरी (Panjiri)

यह भी एक बहुत ही पारंपरिक और स्वास्थ्यवर्धक प्रसाद हैं।

  • क्यों ਹੈ महत्वपूर्ण?: पंजीरी को अक्सर नवजात शिशु की मां को ताकत देने के लिए खिलाया जाता है। 

4. अन्य व्यंजन:

इनके अलावा, आप अपनी श्रद्धा के अनुसार पूड़ी-सब्जी, खीर, और लड्डू जैसे अन्य पकवानों का भी भोग लगा सकते हैं।

 

घर पर कैसे करें छठी की पूजा? (Simple Puja Vidhi)

  1. सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  2. अपने लड्डू गोपाल को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से स्नान कराएं, फिर गंगाजल से स्नान कराएं।
  3. कान्हा को नए, विशेषकर पीले रंग के, वस्त्र पहनाएं और उनका सुंदर श्रृंगार करें।
  4. उन्हें साफ आसन पर विराजमान करें।
  5. ऊपर बताए गए सभी भोगों को तैयार करें और उन्हें कान्हा के समक्ष अर्पित करें। भोग में तुलसी दल डालना न भूलें।
  6. धूप, दीप जलाकर भगवान कृष्ण की आरती करें।
  7. परिवार के सभी सदस्यों में प्रसाद बांटें।

कान्हा की छठी का यह पर्व वात्सल्य और भक्ति का एक अनूठा संगम ਹੈ, जो हमें भगवान को अपने परिवार के एक नन्हे सदस्य के रूप में प्यार करने का अवसर देता हैं। जय श्री कृष्णा!