Diya Significance : पूजा की थाली अधूरी रह जाएगी जानिए भगवान के सामने दीपक जलाना क्यों है इतना जरूरी?
News India Live, Digital Desk : हम में से शायद ही कोई ऐसा होगा जिसके घर में सुबह-शाम पूजा न होती हो। और पूजा की बात हो, तो दीपक (Diya) का जिक्र सबसे पहले आता है। बचपन से हम देखते आ रहे हैं कि नानी-दादी पूजा शुरू करने से पहले घी या तेल का दीया जरूर जलाती थीं। हम भी वही कर रहे हैं।
लेकिन क्या कभी आपने शांत दिमाग से सोचा है कि आखिर ऐसा क्यों? क्या भगवान अंधेरे में नहीं देख सकते? या फिर दीया जलाने के पीछे कोई गहरा रहस्य छिपा है? आज हम ऋग्वेद और हमारी मान्यताओं की उन परतों को खोलेंगे, जो शायद आपको नहीं पता होंगी।
अग्नि ही है वो मैसेंजर (The Messenger)
अगर हम पुराने धर्मग्रंथों, खासकर ऋग्वेद की बात करें, तो उसमें एक बहुत ही प्यारी बात लिखी है। वहां 'अग्नि देव' को एक मध्यस्थ (Mediator) माना गया है।
आसान भाषा में समझिए हम इंसान धरती पर हैं और ईश्वर कहीं ऊपर या निराकार रूप में। हम अपनी बात उन तक कैसे पहुंचाएं?
शास्त्रों के मुताबिक, अग्नि ही वो माध्यम है जो हमारी प्रार्थनाओं को, हमारे मंत्रों को और हमारी भावनाओं को ईश्वर तक पहुंचाती है। जैसे आपका मोबाइल नेटवर्क आपकी आवाज दूसरे तक ले जाता है, वैसे ही पूजा का दीपक आपके और परमात्मा के बीच का कनेक्शन जोड़ता है।
अंधेरे से उजाले का सफर
आपने वो संस्कृत का श्लोक तो सुना होगा "तमसो मा ज्योतिर्गमय" (मुझे अंधेरे से उजाले की ओर ले चलो)।
दीपक इसी का प्रतीक है।
- अंधेरा (Darkness): यह हमारे अज्ञान, डर और शत्रुओं का प्रतीक है।
- प्रकाश (Light): यह ज्ञान, सच्चाई और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है।
जब हम दीपक जलाते हैं, तो हम खुद से वादा करते हैं कि हम अपने अंदर की बुराई (अंधेरा) मिटाकर ज्ञान की रोशनी लाएंगे। दीपक का जलना यानी 'आत्मा का जागना'।
लौ हमेशा ऊपर क्यों जाती है?
एक और बहुत खूबसूरत फिलॉसफी है इसके पीछे। आपने गौर किया होगा कि दीपक चाहे तेल का हो या घी का, उसे टेढ़ा करो या उल्टा, उसकी लौ (Flame) हमेशा ऊपर आकाश की तरफ ही उठती है।
यह हमें जीवन जीने का तरीका सिखाती है। इसका मतलब है कि हालात चाहे जैसे भी हों, इंसान की सोच और कर्म हमेशा ऊँचे होने चाहिए। हमें दुनियादारी में फंसकर नीचे नहीं गिरना चाहिए, बल्कि अपनी चेतना (Consciousness) को ऊपर ईश्वर की तरफ ले जाना चाहिए।
घी या तेल: किसका दीया जलाएं?
वैसे तो श्रद्धा सबसे बड़ी है, लेकिन सात्विक पूजा में गाय के घी का दीपक सबसे उत्तम माना जाता है। कहते हैं इससे घर का वातावरण शुद्ध होता है और पॉजिटिविटी आती है। अगर घी नहीं है, तो तिल के तेल या सरसों के तेल का दीपक भी जलाया जाता है, खासकर शनि देव या हनुमान जी के लिए।