जयपुर से चौमूं तक चर्चा, अतिक्रमण पर बुलडोजर चलने के बाद इमारतों को किया सील

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News India Live, Digital Desk : अक्सर हम देखते हैं कि सड़कों के किनारे बिना पक्के नक्शे के या पार्किंग की जगह छोड़कर लोग कॉम्प्लेक्स और दुकानें खड़ी कर देते हैं। चौमूं में भी कुछ ऐसा ही मामला था। स्थानीय प्रशासन और नगर पालिका की टीम ने बार-बार नोटिस जारी किए थे, लेकिन जब उन पर अमल नहीं हुआ, तो साल के दूसरे ही दिन प्रशासन भारी पुलिस जाब्ते के साथ मैदान में उतर आया।

बुलडोजर के बाद सीलिंग की नौबत
हकीकत ये है कि ज्यादातर कार्रवाई उन कॉम्प्लेक्स पर हुई है जहाँ पार्किंग एरिया में दुकानें बना दी गई थीं या बिना अनुमति के इमारतें तान दी गई थीं। कार्रवाई के दौरान पहले बुलडोजर के जरिए अवैध हिस्सों को हटाया गया और फिर उन बड़े परिसरों (Complexes) के प्रवेश द्वार पर 'सीलिंग' की मुहर लगा दी गई। यानी अब उन दुकानों में व्यापार तब तक संभव नहीं होगा जब तक कि नियमों की पालना नहीं हो जाती।

व्यापारियों और दुकानदारों का गुस्सा
इस कड़ी कार्रवाई के बाद व्यापारियों में काफी गुस्सा है। कुछ का कहना है कि उन्हें तैयारी का मौका नहीं दिया गया, वहीं प्रशासन का रुख एकदम साफ है— 'नियमों से कोई समझौता नहीं'। जिस तरह से जयपुर जिले के छोटे शहरों में अब बुलडोजर मॉडल सक्रिय हो रहा है, उसे देखकर यह तो साफ है कि अब अवैध कब्जों की खैर नहीं।

रात तक चली गहमागहमी
कार्रवाई के दौरान कई घंटों तक अफरा-तफरी का माहौल रहा। पुलिस के साये में हुए इस काम की वजह से ट्रैफिक भी काफी बाधित हुआ। लोग छतों पर चढ़कर इस नजारे को देख रहे थे, लेकिन जिनकी संपत्तियां इस घेरे में आईं, उनके लिए नया साल मायूसी भरा रहा। फिलहाल उन जगहों पर भारी फोर्स तैनात है ताकि कोई विरोध या अप्रिय घटना न हो।

सीलिंग के बाद अब क्या?
इमारतें सील होने का मतलब है कि अब उनके मालिकों को भारी जुर्माना और कानूनी औपचारिकताओं से गुजरना होगा। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यह उन लोगों के लिए एक बड़ा सबक है जो ये सोचते हैं कि राजनीति और सेटिंग के दम पर वे नक्शों में हेरफेर कर लेंगे।

अगर आप भी चौमूं या जयपुर के किसी भी हिस्से में अपनी कमर्शियल प्रॉपर्टी बना रहे हैं या उसमें पैसा निवेश करने जा रहे हैं, तो एक बार रेरा और नगर पालिका के कागजात ज़रूर जांच लें। क्योंकि बुलडोजर कब आपकी देहरी पर आ खड़ा हो, कोई नहीं जानता।