झारखंड में आसमान से बरसती आफत 18 साल में 6 बड़े विमान हादसे, जब मौत के मुंह से बाहर आए सूबे के मुख्यमंत्री

Post

News India Live, Digital Desk : झारखंड की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में हवाई सफर हमेशा से जोखिम भरा रहा है। पिछले 18 सालों का रिकॉर्ड देखें तो झारखंड में एक-दो नहीं बल्कि 6 बार ऐसे बड़े विमान हादसे हुए हैं, जिन्होंने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन हादसों में राज्य के कई मुख्यमंत्री भी शामिल थे, जो चमत्कारिक रूप से मौत को मात देकर वापस आए।

18 साल और 6 बड़े हादसे: एक नजर में

झारखंड के गठन के बाद से ही वीआईपी मूवमेंट के दौरान कई तकनीकी खराबी और क्रैश की घटनाएं सामने आई हैं। इन हादसों ने राज्य की एविएशन सुरक्षा और मेंटेनेंस पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

मुख्यमंत्रियों का 'खतरनाक' सफर: अर्जुन मुंडा से लेकर शिबू सोरेन तक, झारखंड के कई दिग्गज नेता हवाई दुर्घटनाओं का शिकार होते-होते बचे हैं।

अर्जुन मुंडा का वो खौफनाक हादसा: साल 2012 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा का हेलीकॉप्टर रांची एयरपोर्ट पर क्रैश हो गया था। इस हादसे में वे गंभीर रूप से घायल हुए थे, लेकिन उनकी जान बच गई थी।

तकनीकी विफलता बनी विलेन: ज्यादातर हादसों में खराब मौसम से ज्यादा हेलीकॉप्टर और विमानों की पुरानी तकनीक और मेंटेनेंस में कमी को मुख्य कारण माना गया है।

जब-जब थम गईं झारखंड की सांसें

हेलीकॉप्टर हार्ड लैंडिंग: कई बार मुख्यमंत्रियों के हेलीकॉप्टर की खेतों या जंगलों में इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी है।

पायलट की सूझबूझ: झारखंड की भौगोलिक स्थिति (पहाड़ और जंगल) उड़ान को और कठिन बनाती है। कई बार पायलटों की तत्परता ने बड़े वीआईपी हादसों को टाला है।

सिस्टम पर सवाल: बार-बार हो रहे इन हादसों के बावजूद क्या राज्य के बेड़े में शामिल विमानों की समय पर ऑडिटिंग होती है? यह एक बड़ा सवाल है।

सुरक्षा को लेकर अब क्या हैं तैयारी?

इन 6 बड़ी घटनाओं के बाद अब नागरिक उड्डयन विभाग (Civil Aviation) अधिक सतर्क है। पुराने पड़ चुके हेलीकॉप्टरों को बदलने और पायलटों के लिए विशेष ट्रेनिंग मॉड्यूल पर काम किया जा रहा है, ताकि भविष्य में 'सीएम' और अन्य वीआईपी के सफर को सुरक्षित बनाया जा सके।