Dharmendra in Ranchi : जब एक फैन के घर साधारण इंसान बनकर पहुंचे सुपरस्टार, रांची वालों के लिए आज भी जिंदा हैं वो पल

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News India Live, Digital Desk : आज (25 नवंबर 2025) जब पूरा देश और बॉलीवुड हमारे प्यारे 'धरम पाजी' के जाने का शोक मना रहा है, तो रांची के एक खास परिवार की आंखें कुछ ज्यादा ही नम हैं। हम बात कर रहे हैं रांची के भाटिया परिवार (Bhatia Family) की। उनके लिए धर्मेंद्र सिर्फ एक स्टार नहीं, बल्कि एक ऐसे मेहमान थे जिन्होंने 21 साल पहले उनके घर और दिल, दोनों में जगह बना ली थी।

किस्सा साल 2004 का है। यह वो दौर था जब सितारों को देखना ही किसी सपने से कम नहीं होता था। लेकिन जब 'ही-मैन' रांची आए, तो उन्होंने दिखा दिया कि असल मायने में 'बड़ा आदमी' वही होता है जो जमीन से जुड़ा हो।

आइए, उस सुनहरी याद को दोबारा ताज़ा करते हैं।

जब स्टारडम छोड़, आम आदमी बन गए 'पाजी'

साल 2004 में धर्मेंद्र रांची आए थे। उस वक्त वे भाटिया परिवार के होटल (या आतिथ्य) में रुके थे। आमतौर पर स्टार्स के नखरे होते हैं— यह नहीं खाऊंगा, वह नहीं पियूंगा। लेकिन धर्मेंद्र जी एकदम अलग थे।
भाटिया परिवार के सदस्यों को आज भी याद है कि उन्होंने 5-स्टार मेन्यू को साइड में रखकर बड़े प्यार से कहा था, "मुझे घर जैसा सादा खाना खिलाओगे? मुझे वो मसालेदार ढाबे वाला चिकन (Desi Chicken) और रोटी चाहिए।"

उनकी यह बात सुनकर वहां मौजूद हर शख्स हैरान और खुश हो गया था। उन्होंने बिना किसी तामझाम के, परिवार के साथ बैठकर खाना खाया और खूब गप्पे भी लड़ाए।

रांची में 'शोले' वाला फैन मोमेंट

भाटिया परिवार, जो धर्मेंद्र का जबरा फैन था, उनके लिए यह पल भगवान से मिलने जैसा था।
परिवार के बुजुर्ग बताते हैं कि धर्मेंद्र जी ने उन्हें यह कभी महसूस ही नहीं होने दिया कि वो इतने बड़े सुपरस्टार हैं। उन्होंने 'शोले' फिल्म की बातें कीं, जय और वीरू के किस्से सुनाए और परिवार के बच्चों को गोद में उठाकर खूब लाड़ किया।
जाते-जाते उन्होंने परिवार को एक ऑटोग्राफ दिया और सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद भी दिया।

"लगता है आज फिर कोई अपना चला गया"

आज जब टीवी पर धर्मेंद्र जी के निधन की खबर चली, तो भाटिया परिवार के लिए यह किसी निजी क्षति से कम नहीं था। उन्होंने अपनी पुरानी एल्बम से 2004 की वो तस्वीरें निकालीं और उस नेक दिल इंसान को याद किया।

रांची के लोगों का कहना है कि नेता और अभिनेता तो बहुत आते हैं, लेकिन जिस अपनापन से 'धरम जी' मिले थे, वो शायद ही कोई और मिल पाए।