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March 31 2026 03:25 am

हजारीबाग दरिंदगी मामले में एक्शन में डीजीपी, जांच के लिए SIT गठित, आईजी और डीआईजी खुद संभालेंगे कमान

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News India Live, Digital Desk: झारखंड के हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ में 12 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ हुई हैवानियत और हत्या के मामले ने तूल पकड़ लिया है। राज्य में बढ़ते जन आक्रोश और 'हजारीबाग बंद' के व्यापक असर को देखते हुए झारखंड के पुलिस महानिदेशक (DGP) ने इस जघन्य कांड की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। डीजीपी ने मामले की तह तक जाने और दोषियों को सलाखों के पीछे भेजने के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। इस एसआईटी की निगरानी खुद आईजी (IG) और डीआईजी (DIG) स्तर के अधिकारी करेंगे, ताकि जांच में कोई ढिलाई न बरती जा सके।

वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर होगी दरिंदों की घेराबंदी पुलिस मुख्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, एसआईटी में फॉरेंसिक विशेषज्ञों और अनुभवी पुलिस अधिकारियों को शामिल किया गया है। टीम को निर्देश दिए गए हैं कि वे घटनास्थल से जुटाए गए वैज्ञानिक साक्ष्यों, डॉग स्क्वायड की रिपोर्ट और मोबाइल सर्विलांस के जरिए आरोपियों की जल्द से जल्द पहचान करें। डीजीपी ने स्पष्ट किया है कि यह मामला 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' की श्रेणी में आता है, इसलिए पुलिस चार्जशीट दाखिल करने में देरी नहीं करेगी और स्पीडी ट्रायल (Speedy Trial) के जरिए दोषियों को मृत्युदंड दिलाने की कोशिश की जाएगी।

मासूम की चीख से दहला झारखंड, प्रशासन पर बढ़ा दबाव विष्णुगढ़ के कुसुम्बा गांव में रामनवमी जुलूस के दौरान गायब हुई मासूम का शव जिस हालत में मिला था, उसने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों के बढ़ते दबाव के बाद सरकार बैकफुट पर है। हजारीबाग के सांसद मनीष जायसवाल और अन्य नेताओं ने सीधे तौर पर कानून-व्यवस्था को जिम्मेदार ठहराया था। अब एसआईटी के गठन को प्रशासन की ओर से डैमेज कंट्रोल और जनता को न्याय का भरोसा दिलाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

पुलिस छावनी में तब्दील हुआ विष्णुगढ़ तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए विष्णुगढ़ और आसपास के इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। एसआईटी की टीम ने गांव में डेरा डाल दिया है और संदिग्धों से पूछताछ शुरू कर दी गई है। आईजी और डीआईजी खुद पल-पल की रिपोर्ट ले रहे हैं। ग्रामीणों से भी अपील की गई है कि वे जांच में सहयोग करें और किसी भी प्रकार की अफवाह पर ध्यान न दें। फिलहाल, पूरे झारखंड की नजरें अब एसआईटी की कार्रवाई पर टिकी हैं कि आखिर कब तक उन दरिंदों के चेहरे बेनकाब होते हैं।