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March 13 2026 02:46 am

Dev Uthani Ekadashi 2025: नोट कर लें ये शुभ मुहूर्त, जानें कब लगेगा पंचक, कब से है भद्रा काल?

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News India Live, Digital Desk : सनातन धर्म में कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी का दिन बेहद पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु चार महीने की अपनी योग निद्रा से जागते हैं और सृष्टि के संचालन का कार्यभार फिर से संभालते हैं। इसीलिए इस एकादशी को देवउठनी, देवोत्थान या प्रबोधिनी एकादशी भी कहते हैं। इस दिन से ही शादी, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे सभी शुभ और मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो जाती है।

आइए, जानते हैं साल 2025 में देवउठनी एकादशी की सही तारीख, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इस दिन लगने वाले पंचक व भद्रा काल के बारे में ताकि आपकी पूजा बिना किसी विघ्न के सफल हो सके।

कब है देवउठनी एकादशी 2025? (Dev Uthani Ekadashi 2025 Date)

साल 2025 में देवउठनी एकादशी का व्रत 3 नवंबर, सोमवार को रखा जाएगा।

  • एकादशी तिथि प्रारंभ: 02 नवंबर 2025, रविवार को शाम 05:09 बजे से।
  • एकादशी तिथि समाप्त: 03 नवंबर 2025, सोमवार को शाम 07:02 बजे तक।
  • उदयातिथि के नियम के अनुसार, व्रत और पूजन 3 नवंबर को ही करना शास्त्र सम्मत है।

पूजा का शुभ मुहूर्त (Puja Muhurat)

इस दिन शाम के समय गोधूलि बेला में भगवान विष्णु की पूजा करना सबसे श्रेष्ठ माना जाता है।

  • शाम की पूजा का मुहूर्त: शाम 05:22 बजे से रात 08:35 बजे तक।
  • अभिजीत मुहूर्त (दिन में): सुबह 11:34 बजे से दोपहर 12:19 बजे तक।

व्रत पारण का समय (Paran Time)

एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि में सूर्योदय के बाद ही किया जाता है, जिसका विशेष महत्व है।

  • पारण का समय: 4 नवंबर 2025, मंगलवार की सुबह 06:18 बजे से सुबह 08:33 बजे के बीच।

इस दिन रहेगा भद्रा और पंचक का साया

किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले भद्रा और पंचक काल का विचार जरूर किया जाता है। इस बार देवउठनी एकादशी के दिन ये दोनों ही लग रहे हैं।

  • भद्रा काल: 03 नवंबर को भद्रा सुबह 06:48 बजे से शाम 07:02 बजे तक रहेगी। भद्रा काल में कोई भी नया या मांगलिक कार्य शुरू करना वर्जित माना जाता है। हालांकि, भगवान की पूजा-पाठ पर इसका कोई असर नहीं होता।
  • पंचक काल: देवउठनी एकादशी के पूरे दिन और पूरी रात पंचक का प्रभाव रहेगा। पंचक में भी शुभ कार्यों को करने की मनाही होती है, लेकिन देवउठनी एकादशी एक 'स्वयं सिद्ध मुहूर्त' है, इसलिए इस दिन पूजन, व्रत और तुलसी विवाह जैसे कार्यों पर पंचक का कोई दोष नहीं लगता।

देवउठनी एकादशी की सरल पूजा विधि (Puja Vidhi)

  1. सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।
  2. शाम के समय पूजा स्थल पर गेरू से भगवान विष्णु के चरण बनाएं या उनकी तस्वीर स्थापित करें।
  3. आंगन में गन्ने का एक छोटा सा मंडप बनाएं और उसके नीचे दीपक जलाएं।
  4. भगवान विष्णु को जगाने के लिए शंख, घंटी और थाली बजाते हुए इस मंत्र का जाप करें: "उत्तिष्ठो उत्तिष्ठ गोविन्द त्यज निद्रां जगत्पते। त्वयि सुप्ते जगन्नाथ जगत् सुप्तं भवेदिदम्॥" (हे गोविंद, निद्रा त्यागकर उठें! आपके सोने से सारा जगत सोया हुआ है।)
  5. इसके बाद भगवान को सिंघाड़ा, शकरकंद और अन्य मौसमी फल-फूल का भोग लगाएं।
  6. अंत में विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें और आरती करें। इसी दिन तुलसी विवाह का भी आयोजन किया जाता है।