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March 20 2026 11:30 am

Dev Deepawali 2025: माँ लक्ष्मी को करना है प्रसन्न? जानिए कार्तिक पूर्णिमा पर कब, कहाँ और कितने दीये जलाएं

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News India Live, Digital Desk: कार्तिक का महीना हिंदू धर्म में सबसे पवित्र और पुण्यदायी महीनों में से एक माना जाता है, और इस महीने का शिखर होता है कार्तिक पूर्णिमा का दिन। इस दिन को 'त्रिपुरारी पूर्णिमा' और 'देव दीपावली' के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का वध कर देवताओं को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई थी, जिसकी खुशी में सभी देवताओं ने काशी (वाराणसी) में आकर दीप जलाकर उत्सव मनाया था।

तभी से कार्तिक पूर्णिमा पर दीपदान करने की परंपरा चली आ रही है। माना जाता है कि इस दिन किया गया दीपदान हज़ार गुना फल देता है और इससे घर में सुख, समृद्धि और माँ लक्ष्मी का स्थायी वास होता है। लेकिन अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि इस दिन कितने दीये जलाने चाहिए और इन्हें कहाँ-कहाँ रखना चाहिए। तो चलिए, आज हम आपको दीपदान से जुड़ी हर छोटी-बड़ी बात बताते हैं।

कब है कार्तिक पूर्णिमा 2025?

इस साल कार्तिक पूर्णिमा 5 नवंबर, दिन बुधवार को मनाई जाएगी। दीपदान करने का सबसे उत्तम समय शाम को प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद) में होता है।

कितने दीये जलाना होता है शुभ?

शास्त्रों में दीपदान के लिए दीयों की कोई निश्चित संख्या तय नहीं की गई है। आप अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार दीये जला सकते हैं। लेकिन कुछ संख्याएँ विशेष रूप से शुभ मानी जाती हैं:

  • कम से कम 1 दीया: अगर आप ज़्यादा कुछ नहीं कर सकते, तो कम से कम एक घी का दीया अपने घर के पूजा स्थान पर ज़रूर जलाएं।
  • 5 या 7 दीये: यह संख्या भी बहुत शुभ मानी जाती है। आप घर के अलग-अलग कोनों में 5 या 7 दीये जला सकते हैं।
  • 11, 21 या 51 दीये: अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए आप 11, 21 या 51 दीयों का भी दान कर सकते हैं।
  • 365 दीये: कुछ लोग साल के 365 दिनों का प्रतीक मानकर इतने दीये भी नदी के किनारे जलाते हैं, ताकि पूरा साल प्रकाशमय रहे।

दीपदान कहाँ-कहाँ करें?

कार्तिक पूर्णिमा के दिन सिर्फ़ घर में ही नहीं, बल्कि कुछ ख़ास जगहों पर दीये जलाने से विशेष पुण्य मिलता है।

  1. पवित्र नदी या सरोवर के किनारे: देव दीपावली पर सबसे महत्वपूर्ण दीपदान किसी पवित्र नदी (जैसे गंगा, यमुना, सरयू) या तालाब के किनारे किया जाता है। माना जाता है कि इससे पितरों को शांति मिलती है।
  2. घर के मुख्य द्वार पर: शाम के समय घर के मुख्य दरवाज़े के दोनों ओर एक-एक दीया ज़रूर जलाएं। इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश नहीं करती और माँ लक्ष्मी का आगमन होता है।
  3. तुलसी के पौधे के पास: तुलसी को भगवान विष्णु का प्रिय माना जाता है। इस दिन तुलसी के पास घी का दीया जलाने से श्रीहरि और माँ लक्ष्मी, दोनों की कृपा प्राप्त होती है।
  4. पूजा घर में: अपने घर के मंदिर में अखंड दीपक जलाएं, या कम से कम एक घी का दीया रात भर जलने दें।
  5. पीपल के पेड़ के नीचे: पीपल के पेड़ में सभी देवी-देवताओं का वास माना जाता है। इस दिन पीपल के नीचे दीया जलाने से सभी देवता प्रसन्न होते हैं और कुंडली के दोष भी दूर होते हैं।
  6. रसोई घर और पानी की जगह पर: अपने किचन और जहाँ पानी का भंडारण करते हैं (जैसे मटका या RO के पास), वहाँ भी एक-एक दीया जलाएं। इससे घर में अन्न-धन के भंडार हमेशा भरे रहते हैं।

इस कार्तिक पूर्णिमा पर आप भी दीपदान करके अपने जीवन के अंधकार को दूर करें और देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त करें।