दिल्ली की 'लाइफलाइन' यमुना बनी 'खौफ' की वजह, हरियाणा से छोड़े गए पानी ने बढ़ाई टेंशन, बाढ़ का हाई अलर्ट
पहाड़ों पर हो रही आफत की बारिश का असर अब मैदानी इलाकों पर कहर बनकर टूटने वाला है। हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज से 1.78 लाख क्यूसेक से भी ज़्यादा पानी छोड़े जाने के बाद, दिल्ली और हरियाणा के निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा चरम पर पहुंच गया ਹੈ। यमुना नदी उफान पर ਹੈ और उसका जलस्तर तेजी से खतरे के निशान की ओर बढ़ रहा है, जिसके चलते दिल्ली सरकार राष्ट्रीय राजधानी में बाढ़ का हाई अलर्ट (Flood Alert) जारी कर दिया हैं।
यह चेतावनी उन लाखों लोगों के लिए एक गंभीर खतरे की घंटी है, जो यमुना के किनारे या निचले इलाकों में रहते हैं। प्रशासन ने 'युद्धस्तर' पर तैयारियां शुरू कर दी हैं और नदी के किनारे बसे लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए कहा गया हैं। आने वाले 72 घंटे दिल्ली के लिए बेहद नाजुक और चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं।
क्यों बजाई गई खतरे की घंटी? (समझें हथिनीकुंड बैराज का पूरा गणित)
इस बाढ़ के खतरे के केंद्र में हरियाणा का हथिनीकुंड बैराज है, जो यमुना नदी के प्रवाह को नियंत्रित करता हैं।
- पहाड़ों पर भारी बारिश: पिछले 48 घंटों में हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के पहाड़ी जलग्रहण क्षेत्रों (catchment areas) में मूसलाधार बारिश हुई है। इस बारिश का सारा पानी सीधा हथिनीकुंड बैराज में पहुंच रहा हैं।
- बैराज की मजबूरी: एक बैराज की पानी को रोकने की एक निश्चित क्षमता होती ਹੈ। जब पानी का प्रवाह (inflow) 1 लाख क्यूसेक से ऊपर चला जाता है, तो उसे 'निम्न स्तर की बाढ़' माना जाता है और चेतावनी जारी कर दी जाती हैं। 1.78 लाख क्यूसेक पानी का मतलब है कि स्थिति गंभीर हो चुकी हैं। बैराज की सुरक्षा के लिए, इसके गेट खोलकर पानी को दिल्ली की ओर छोड़ना एक मजबूरी बन जाती है, वरना बैराज के टूटने का खतरा पैदा हो सकता है।
दिल्ली पहुंचने में लगेगा 72 घंटे का वक्त
यह जानना बेहद ज़रूरी है कि हथिनीकुंड बैराज से छोड़ा गया पानी तुरंत दिल्ली नहीं पहुंचता। इस पानी के विशाल बहाव को दिल्ली तक पहुंचने में आमतौर पर लगभग 72 घंटे (3 दिन) का समय लगता है। इसका मतलब है कि प्रशासन के पास तैयारी और बचाव कार्यों के लिए एक सीमित लेकिन महत्वपूर्ण समय हैं।
- दिल्ली में खतरे का निशान: दिल्ली में यमुना का जलस्तर पुराने लोहे के पुल (Old Railway Bridge) पर मापा जाता हैं। यहां खतरे का निशान 205.33 मीटर है। उम्मीद हैं कि अगले दो दिनों में यमुना का जलस्तर तेजी से बढ़ेगा और इस निशान को पार कर सकता हैं।
इन इलाकों पर है सबसे ज्यादा खतरा, खाली कराने के आदेश
दिल्ली में, यमुना के निचले इलाकों जिन्हें 'यमुना खादर' कहा जाता हैं पर बाढ़ का सबसे पहला और सबसे विनाशकारी असर होता है। प्रशासन نے इन इलाकों को तत्काल खाली करने के आदेश जारी किए हैं
- पुराना किला और मठ बाजार (Monastery Market)
- यमुना खादर के निचले इलाके
- मयूर विहार और सोनिया विहार के कुछ हिस्से
- अन्य निचले और तटीय क्षेत्र
प्रशासन हाई अलर्ट पर, NDRF की टीमें तैनात
इस आसन्न संकट से निपटने के लिए दिल्ली और हरियाणा का प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट मोड पर है।
- राहत शिविरों की स्थापना: निचले इलाकों से निकाले गए लोगों के लिए सुरक्षित स्थानों पर अस्थायी राहत शिविर बनाए जा रहे हैं जहां उनके खाने-पीने और रहने की व्यवस्था की जाएगी।
- NDRF की तैनाती: राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की कई टीमों को संवेदनशील स्थानों पर तैनात किया गया ਹੈ, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत बचाव कार्य शुरू किया जा सके।
- पुराने लोहे के पुल पर रोक: यमुना का जलस्तर बढ़ने पर पुराने लोहे के पुल पर यातायात (रेल और सड़क दोनों) को एहतियातन रोक दिया जाता है।
- 24x7 निगरानी: एक सेंट्रल कंट्रोल रूम से चौबीसों घंटे स्थिति पर नजर रखी जा रही हैं।
नागरिकों के लिए सुरक्षा सलाह (Safety Advisory)
यदि आप प्रभावित क्षेत्रों में या उसके आसपास रहते हैं, तो इन बातों का विशेष ध्यान रखें:
- अफवाहों पर ध्यान न दें: केवल आधिकारिक घोषणाओं पर ही विश्वास करें।
- सुरक्षित स्थान पर जाएं: प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और तुरंत सुरक्षित ऊंचे स्थानों पर चले जाएं।
- यमुना के पास न जाएं: सेल्फी लेने या पानी देखने के लिए नदी के किनारों पर बिल्कुल न जाएं। यह जानलेवा हो सकता हैं।
- जरूरी सामान तैयार रखें: एक इमरजेंसी किट तैयार रखें जिसमें आपके महत्वपूर्ण दस्तावेज, टॉर्च, फर्स्ट-एड किट, और कुछ नकदी हो।
- बिजली के उपकरणों से बचें: पानी भरने की स्थिति में घर की बिजली का मेन स्विच बंद कर दें।
आने वाले 2-3 दिन दिल्ली-एनसीआर के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। थोड़ी सी सावधानी और जागरूकता एक बड़ी त्रासदी को टाल सकती हैं।