लाहौर की हवा में घुला खतरनाक जहर, बना दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर
News India Live, Digital Desk : पाकिस्तान का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक केंद्र कहा जाने वाला लाहौर शहर आज एक जानलेवा संकट से जूझ रहा है. यहां की हवा इतनी जहरीली हो चुकी है कि लाहौर को दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर घोषित कर दिया गया है. एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) पर शहर का आंकड़ा 312 तक पहुंच गया, जो "खतरनाक" (Hazardous) श्रेणी में आता है. यह एक ऐसी स्थिति है, जिसे स्वास्थ्य के लिए आपातकाल माना जाता है.
आखिर लाहौर का ये हाल हुआ कैसे?
लाहौर के आसमान पर छाई धुएं और धुंध (स्मॉग) की यह मोटी चादर कोई एक दिन में नहीं बनी है. इसके पीछे कई बड़े कारण हैं जो हर साल सर्दियों की शुरुआत में इस संकट को और गंभीर बना देते हैं.
- वाहनों और उद्योगों का धुआं: शहर में लाखों गाड़ियों और अनगिनत फैक्ट्रियों से निकलने वाला धुआं इसका सबसे बड़ा कारण है.
- फसलों के अवशेष जलाना: पंजाब प्रांत के किसान फसलों की कटाई के बाद बचे हुए अवशेषों (पराली) को जला देते हैं, जिससे भारी मात्रा में जहरीला धुआं पैदा होता है.
- कूड़ा-कचरा जलाना: शहर में कचरा प्रबंधन की सही व्यवस्था न होने के कारण लोग अक्सर कूड़े के ढेरों में आग लगा देते हैं.
- मौसम की भूमिका: सर्दियों में हवा ठंडी और भारी हो जाती है, जिस वजह से यह प्रदूषक कण ऊपर उड़ने के बजाय वायुमंडल की निचली परत में ही कैद होकर रह जाते हैं.
लोगों की सेहत पर सीधा हमला
300 से ऊपर का AQI हर उम्र के व्यक्ति के लिए बेहद खतरनाक माना जाता है. डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि इस जहरीली हवा में सांस लेने से स्ट्रोक, हृदय रोग, फेफड़ों का कैंसर, और सांस से जुड़ी पुरानी और गंभीर बीमारियां हो सकती हैं. इसका सबसे ज्यादा खतरा बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों पर होता है. अधिकारियों ने लोगों को घरों के अंदर रहने, मास्क पहनने और गैर-जरूरी तौर पर बाहर निकलने से बचने की सख्त सलाह दी है.
सरकार क्या कदम उठा रही है?
इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए पंजाब प्रांत की सरकार ने कई आपातकालीन कदम उठाए हैं. प्रदूषण फैलाने वाली फैक्ट्रियों और गाड़ियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है. इसके साथ ही, शहर में पहली बार "एंटी-स्मॉग गन" का इस्तेमाल शुरू किया गया है. ये मशीनें हवा में पानी की बारीक बूंदों का छिड़काव करती हैं ताकि धूल और धुएं के कण भारी होकर नीचे बैठ जाएं.
हालांकि, पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि ये सिर्फ फौरी राहत देने वाले उपाय हैं. जब तक प्रदूषण की असल जड़ों, जैसे कि फसलों के अवशेष जलाने पर स्थायी रोक और औद्योगिक व वाहनों के उत्सर्जन पर सख्ती से काबू नहीं पाया जाता, तब तक लाहौर के लोगों को हर साल इसी तरह जहरीली हवा में जीने को मजबूर होना पड़ेगा.