Crude Oil Price Crash: ट्रंप के एक एलान से क्रूड ऑयल में 17% की ऐतिहासिक गिरावट, $95 के नीचे आए दाम; क्या अब सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल?
नई दिल्ली/न्यूयॉर्क | वैश्विक ऊर्जा बाजार (Global Energy Market) से इस वक्त की सबसे बड़ी राहत भरी खबर सामने आ रही है। हफ्तों से जारी अमेरिका-ईरान तनाव के बीच सीजफायर (Ceasefire) की घोषणा ने कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त गिरावट ला दी है। बुधवार, 8 अप्रैल को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 17% की भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे ब्रेंट क्रूड और अमेरिकी क्रूड (WTI) दोनों के दाम जमीन पर आ गए हैं।
ट्रंप की 'शांति घोषणा' और होर्मुज स्ट्रेट खुलने का कमाल
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़े घटनाक्रम में ईरान के सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर पर बमबारी के फैसले पर 2 हफ्ते की रोक लगा दी है। ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर जानकारी दी कि ईरान के साथ विवादित मुद्दों पर सहमति बन गई है। इस समझौते के तहत ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को तुरंत और सुरक्षित रूप से फिर से खोलने पर राजी हो गया है। बता दें कि दुनिया का लगभग 20% तेल इसी रास्ते से गुजरता है, जिसके बंद होने की आशंका ने कीमतों को आसमान पर पहुंचा दिया था।
$95 के नीचे फिसला US क्रूड, मंदी की आहट से सहमा बाजार
सीजफायर की खबरों के साथ ही बाजार में भारी बिकवाली देखी गई। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) यानी US क्रूड की कीमतें सीधे 17% गिरकर 95 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गईं। वहीं, ब्रेंट क्रूड जो पिछले ट्रेड में 109.5 डॉलर पर बंद हुआ था, अब उसमें भी बड़ी गिरावट की उम्मीद है। जानकार मान रहे हैं कि अगले दौर की बातचीत जो 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में होनी है, अगर वह सफल रहती है तो कीमतें और भी नीचे जा सकती हैं।
क्या इतनी जल्दी सुधर जाएगी ग्लोबल सप्लाई चेन?
भले ही कीमतों में गिरावट आई है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि तेल की फिजिकल सप्लाई व्यवस्था को पटरी पर आने में समय लगेगा। वेस्टपैक बैंकिंग कॉर्प के रॉबर्ट रेनी के मुताबिक, "बंद पड़े कुओं को फिर से शुरू करने और जहाजों को दोबारा रूट पर भेजने में महीनों लग सकते हैं।" ऐसे में ब्रेंट क्रूड का $90-$95 के नीचे स्थिर रहना फिलहाल मुश्किल लग रहा है। मिडिल ईस्ट से होने वाली शिपमेंट में कटौती की वजह से अप्रैल में रोजाना 9 मिलियन बैरल तेल का उत्पादन प्रभावित रहने का अनुमान है।
भारत के लिए क्यों जरूरी है कच्चे तेल का सस्ता होना?
कच्चे तेल की कीमतों में यह गिरावट भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए संजीवनी के समान है। तेल के दाम बढ़ने से भारत का करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) बढ़ जाता है और रुपया कमजोर होने लगता है। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड इसी तरह सस्ता बना रहता है, तो घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती का रास्ता साफ हो सकता है, जिससे महंगाई से जूझ रही जनता को बड़ी राहत मिलेगी।