Credit Card Balance Transfer:भारी ब्याज से बचने का स्मार्ट तरीका या एक छिपा हुआ जाल?

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महीने के आखिर में आने वाला क्रेडिट कार्ड का बिल... और उसकी वो ‘न्यूनतम देय राशि’ (Minimum Amount Due) जिसे भरने के बाद भी, अगली बार बिल और ज्यादा बढ़कर आता है! यह कहानी हममें से लाखों लोगों की है जो क्रेडिट कार्ड के 25-40% सालाना वाले भारी-भरकम ब्याज के चक्रव्यूह में फंसे हुए हैं।

लेकिन क्या हो अगर हम आपसे कहें कि इस ब्याज के मीटर पर एक ‘पॉज बटन’ लगाने का तरीका है? एक ऐसा तरीका जो आपको इस कर्ज के दलदल से बाहर निकलने के लिए कुछ महीनों की ‘ऑक्सीजन’ दे सकता है?

इसी ‘जादुई’ तरीके का नाम है क्रेडिट कार्ड बैलेंस ट्रांसफर (Credit Card Balance Transfer)। लेकिन सवाल यह है कि यह सचमुच एक स्मार्ट तरीका है या फिर एक और बड़ा और छिपा हुआ जाल?

चलिए, आज इस पूरे ‘खेल’ को आसान भाषा में समझते हैं।

सबसे पहले, यह बैलेंस ट्रांसफर आखिर है क्या?
यह बहुत ही सीधा और सरल कॉन्सेप्ट है।

  • इसे ऐसे समझें: मान लीजिए, आपके HDFC बैंक के क्रेडिट कार्ड पर ₹1 लाख का बकाया है, जिस पर आप हर महीने भारी-भरकम ब्याज भर रहे हैं।
  • अब, ICICI बैंक आपको एक ऑफर देता है - "आप अपना पूरा ₹1 लाख का कर्ज हमारे कार्ड पर ले आओ, हम आपसे अगले 6 या 12 महीने तक कोई ब्याज नहीं लेंगे (या बहुत ही मामूली ब्याज लेंगे)!"

यही है बैलेंस ट्रांसफर! एक बैंक के कर्ज को दूसरे बैंक में ट्रांसफर करना, ताकि आपको कम ब्याज वाले कुछ महीने मिल जाएं और आप इस समय का फायदा उठाकर अपनी मूल रकम (principal amount) को चुका सकें।

 

यह एक स्मार्ट तरीका क्यों है? (इसके फायदे)

  1. ब्याज के मीटर पर ‘पॉज’ बटन: इसका सबसे बड़ा फायदा यही है। आपको 3, 6, 9 या 12 महीने के लिए ब्याज से लगभग पूरी तरह से मुक्ति मिल जाती है, जो हजारों रुपये की सीधी-सीधी बचत है।
  2. कर्जों को एक जगह लाना: अगर आपके 2-3 अलग-अलग कार्डों पर थोड़ा-थोड़ा कर्ज है, तो आप उन सबको एक ही कार्ड पर ट्रांसफर करके, सिर्फ एक EMI में बदल सकते हैं।
  3. कर्ज से जल्दी मुक्ति: जब आपका पैसा ब्याज भरने में बर्बाद नहीं होता, तो आपकी हर  EMI सीधे आपकी मूल रकम को कम करती है, जिससे आप कर्ज से बहुत तेजी से बाहर निकल सकते हैं।

 

यह एक छिपा हुआ जाल क्यों हो सकता है? (इसके नुकसान)

यह सुविधा जितनी अच्छी लगती है, उतनी ही इसमें कुछ छिपी हुई ‘शर्तें’ भी हैं, जिन्हें जानना बहुत जरूरी है:

  1. प्रोसेसिंग फीस का ‘झटका’: यह सुविधा मुफ्त नहीं है। बैंक आपसे ट्रांसफर की जाने वाली रकम का 1% से 2% तक प्रोसेसिंग फीस वसूलते हैं। यानी, ₹1 लाख ट्रांसफर करने पर आपको ₹1000 से ₹2000 तक का चार्ज तुरंत देना होगा।
  2. इंट्रोडक्टरी पीरियड का ‘टाइम बम’: 0% ब्याज का ऑफर हमेशा के लिए नहीं होता, यह सिर्फ कुछ महीनों (Introductory Period) के लिए होता है। अगर आप इस अवधि में पूरा पैसा नहीं चुका पाए, तो बची हुई रकम पर जो नया ब्याज दर लगेगा, वह अक्सर आपके पुराने कार्ड से भी कहीं ज्यादा हो सकता है!
  3. नई खरीदारी की मनाही: सबसे बड़ी गलती जो लोग करते हैं! वे जिस नए कार्ड पर कर्ज ट्रांसफर करते हैं, उसी से नई शॉपिंग भी शुरू कर देते हैं। याद रखें, 0% ब्याज का ऑफर सिर्फ ट्रांसफर की गई रकम पर होता है, नई खरीदारी पर नहीं। नई खरीदारी पर पहले दिन से ही 30-40% वाला भारी ब्याज लगना शुरू हो जाता है।
  4. सिबिल स्कोर पर असर: जब आप एक नया क्रेडिट कार्ड अप्लाई करते हैं, तो आपका सिबिल स्कोर (CIBIL Score) कुछ समय के लिए थोड़ा सा गिरता है।

 

तो आखिरी फैसला क्या है? आपको यह करना चाहिए या नहीं?

यह फैसला पूरी तरह से आपकी नीयत और अनुशासन पर निर्भर करता है।

  • यह आपके लिए ‘अमृत’ है, अगर:
    • आप पूरी तरह से अनुशासन में हैं।
    • आपके पास एक पक्का प्लान है कि आप 6 या 12 महीने के अंदर पूरा पैसा चुका देंगे।
    • आप कसम खाते हैं कि इस अवधि में उस नए कार्ड से एक भी रुपये की नई शॉपिंग नहीं करेंगे।
  • यह आपके लिए ‘जहर’ है, अगर:
    • आप सिर्फ कुछ महीनों की ‘सांस’ लेने के लिए यह कर रहे हैं और आपके पास चुकाने का कोई प्लान नहीं है।
    • आप सोचते हैं कि इस कार्ड से और शॉपिंग कर लेंगे।