धार्मिक समारोह की अनुमति पर कोर्ट का आदेश, दरगाह पक्ष का दावा

Supreme Court Of India 1 Ht 1737

सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात के गिर सोमनाथ जिले में विवादित ढहाई गई दरगाह पर 1 से 3 फरवरी तक ‘उर्स’ उत्सव आयोजित करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। जस्टिस बी आर गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि मुख्य मामले पर सुनवाई किए बिना इस उत्सव को आयोजित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

सरकार का पक्ष

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने गुजरात सरकार का पक्ष रखते हुए बताया कि अतिक्रमण की गई भूमि पर किसी भी धार्मिक गतिविधि की अनुमति नहीं दी जा रही है, चाहे वह हिंदू धार्मिक अनुष्ठान हो या अन्य। हालांकि, याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि सरकार की अधिसूचना के अनुसार यह एक संरक्षित स्मारक है, और पुरातत्व विभाग ने भी कहा था कि 2023 में विध्वंस से पहले वहां कोई पुरातात्विक स्मारक नहीं मिला था।

दरगाह पक्ष का दावा

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने बताया कि वहां एक दरगाह थी, जिसे अधिकारियों ने ध्वस्त कर दिया। उन्होंने कहा कि ‘उर्स’ उत्सव की परंपरा कई वर्षों से चल रही थी और अधिकारियों ने इसके लिए अनुमति देने से इनकार किया। अदालत से कम से कम 20 लोगों के एकत्र होने की अनुमति देने की मांग की गई थी।

धार्मिक समारोह की अनुमति पर कोर्ट का आदेश

इस पर पीठ ने सॉलिसिटर जनरल मेहता से कहा, “आपको किसी भी धार्मिक समारोह की अनुमति नहीं देनी चाहिए, चाहे वह हिंदू हो या अन्य धर्म का।” मेहता ने जवाब दिया कि सोमनाथ ट्रस्ट को भी अधिकारियों से अनुमति नहीं मिली है। अदालत ने आवेदक के अधिवक्ता से सवाल किया, “आप अवमानना याचिका में यह राहत कैसे मांग सकते हैं?”

विध्वंस की प्रक्रिया

सॉलिसिटर जनरल मेहता ने कहा कि सभी धर्मों के अनधिकृत ढांचे को ध्वस्त किया गया है। उन्होंने बताया कि पहले चरण में 26 अतिक्रमण हटाए गए, जिनमें से एक हिंदू समुदाय का था। दूसरे चरण में 174 अतिक्रमण हटाए गए, जिनमें से 147 हिंदू समुदाय के थे। तीसरे और चौथे चरण में भी अतिक्रमण हटाए गए, जिनमें अधिकांश हिंदू समुदाय के थे। उन्होंने यह भी बताया कि पांचवे चरण में 102 एकड़ सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त किया गया।

मेहता ने अदालत को बताया कि इस विध्वंस की प्रक्रिया सार्वजनिक स्थान और सरकारी जमीन पर अतिक्रमण को हटाने के लिए की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि अवमानना याचिका निचली अदालत और उच्च न्यायालय में पहले ही खारिज की जा चुकी है।

अदालत ने 27 जनवरी को कहा था कि वह तीन सप्ताह बाद इस मामले पर सुनवाई करेगी, जिसमें गिर सोमनाथ जिले में आवासीय और धार्मिक संरचनाओं के कथित विध्वंस के आरोप और गुजरात के अधिकारियों के खिलाफ अवमानना याचिका शामिल है।