लोहिया संस्थान में होगा टीडीएपी वैक्सीन का क्लिनिकल ट्रायल

लखनऊ,05 जुलाई (हि.स.)। डॉ० राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ ने ऐतिहासिक टी.डी.ए.-पी. चरण-III वैक्सीन क्लिनिकल ट्रायल प्रारंभ कर वैक्सीन अनुसंधान के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत की है।

बचपन में व्यापक टीकाकरण के बावजूद पर्टुसिस का फिर से उभरना, समय के साथ कम होती प्रतिरक्षा द्वारा उत्पन्न चुनौतियों को रेखांकित करता है। पारंपरिक अकोशिकीय पर्टुसिस वैक्सीन, पूरे सेल के पूर्ववर्ती की तुलना में सुरक्षित होते हुए भी अक्सर कम टिकाऊ सुरक्षा प्रदान करती है।

नैदानिक अध्ययनों ने पर्टुसिस के खिलाफ पारंपरिक टीकों की तुलना में बूस्टेजेनरेड की सुरक्षा के साथ-साथ उच्च और अधिक लगातार एंटीबॉडी स्तर को प्रेरित करने की इसकी क्षमता को प्रदर्शित किया है। इस वैक्सीन की प्रभावकारिता और सुरक्षा का परीक्षण लगभग 30 स्वस्थ वयस्क प्रतिभागियों में किया जा रहा है, जिन्हें पहले पारंपरिक डीपीटी मिला है। इस वैक्सीन की सुरक्षा और प्रतिरक्षात्मकता का परीक्षण अब मानव समुदाय में किया जाएगा।

इस शोध को प्रतिभागियों की सुरक्षा के सभी मानदंडों का सख्ती से पालन करने के बाद क्लीनिकल ट्रायल के लिए अनुमति दी गई है और संस्थान की संस्थागत नैतिकता समिति (आईईसी) द्वारा इसकी निगरानी की जाती है। चिकित्सकों और पैरामेडिकल कर्मियों से युक्त समर्पित फील्ड स्टाफ का एक समूह इस वैक्सीन को लेने वाले सभी प्रतिभागियों की कम से कम एक महीने तक लगातार निगरानी करेगा। प्रतिभागियों की रक्त जांच के माध्यम से प्रतिरक्षा उत्पन्न करने के लिए परीक्षण किया जाएगा, जो निःशुल्क किया जाएगा।

परीक्षण का पूरा बीमा आईसीआईसीआई लोम्बार्ड द्वारा किया गया है और यदि प्रतिभागियों में से किसी को कोई मामूली सा दुष्प्रभाव भी होता है, तो वह बीमा द्वारा आच्छादित किया जाएगा और प्रतिभागियों को पूरा उपचार निःशुल्क दिया जाएगा।

यह शोध देश भर में चल रही एक बहु-केंद्रित परियोजना का हिस्सा है जो भारतीयों में इस वैक्सीन की सुरक्षा और प्रभावकारिता स्थापित करेगी। इस पूरी प्रक्रिया पर संस्थान के निदेशक प्रोफेसर सी.एम. सिंह निगरानी करेंगे।