दिल्ली में यमुना नदी में कथित रूप से जहर मिलाने के मुद्दे पर आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी

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दिल्ली में यमुना नदी में कथित रूप से जहर मिलाने के मुद्दे पर आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है। इस मामले में उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने मंगलवार को मुख्यमंत्री आतिशी को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रमुख अरविंद केजरीवाल का यह बयान कि यमुना के पानी में ‘जहर’ मिलाया जा रहा है और दिल्ली में ‘नरसंहार का प्रयास’ हो रहा है, बेहद आपत्तिजनक और दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इससे राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हो सकता है। इस पर पलटवार करते हुए AAP ने कहा कि उपराज्यपाल को जन कल्याण और अपनी ‘राजनीतिक आकाओं’ में से किसी एक को चुनना होगा।

एलजी सक्सेना ने मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री केजरीवाल का आरोप कि भाजपा-शासित हरियाणा सरकार यमुना नदी में जहर मिला रही है और दिल्ली में ‘नरसंहार’ की कोशिश कर रही है, ‘आपत्तिजनक, दुर्भाग्यपूर्ण और अवांछनीय’ है। पत्र में उन्होंने कहा कि पेयजल जैसे संवेदनशील मुद्दे पर इस तरह के ‘झूठे और भ्रामक’ आरोप लगाना न केवल राज्यों के लिए, बल्कि राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए भी खतरे का कारण बन सकता है।

एलजी ने यह भी कहा कि केजरीवाल का ‘भ्रामक और तथ्यहीन’ बयान कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस बार उनके ‘सरासर झूठे’ दावे से दिल्ली के लोगों में ‘भ्रम और भय’ पैदा हो सकता है और दो पड़ोसी राज्यों के बीच बैरभाव उत्पन्न हो सकता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यमुना में हर साल होने वाली अमोनिया की समस्या का समाधान पिछले दस सालों में किया जा सकता था, लेकिन सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया और अब इस संकट की जिम्मेदारी दूसरे राज्यों पर डाल कर जनता को गुमराह किया जा रहा है।

इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए AAP ने दावा किया कि यमुना में अमोनिया का स्तर 7.2 पीपीएम तक पहुंच चुका है, जो स्वीकार्य सीमा से 700 प्रतिशत अधिक है। इसके बावजूद, उपराज्यपाल इस गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट पर कार्रवाई करने में ‘विफल’ रहे हैं। पार्टी ने कहा, “अगर वे पक्षपातपूर्ण राजनीति से ऊपर नहीं उठ सकते, तो उन्हें पद छोड़ देना चाहिए। यह राजनीति का मामला नहीं, बल्कि जिंदगियां बचाने का सवाल है।”