छोटी दिवाली पर सिर्फ़ घर नहीं, मन की भी करें सफ़ाई! जानें यम का दीया जलाने का सही समय और कहानी
Choti Diwali 2025 date and time : दिवाली की बड़ी रात से पहले एक और रात आती है, जो शायद उतनी शोर-शराबे वाली नहीं होती, लेकिन उसका महत्व बहुत गहरा है। यह है छोटी दिवाली, जिसे हम नरक चतुर्दशी और रूप चौदस के नाम से भी जानते हैं। यह दिन सिर्फ़ दीये जलाने और तैयारियों का नहीं, बल्कि हर तरह के अंधकार, बुराई और मन की नकारात्मकता को ख़त्म करके जीत का जश्न मनाने का है।
आज की शाम जब घर के आँगन में दीये जलते हैं, तो ऐसा लगता है मानो हम सिर्फ़ रोशनी नहीं, बल्कि सौभाग्य और सकारात्मकता को अपने घर बुला रहे हैं। तो चलिए जानते हैं, इस ख़ास दिन से जुड़ी हर छोटी-बड़ी बात।
सबसे बड़ा सवाल: छोटी दिवाली आज मनाएँ या कल?
इस साल तारीख़ को लेकर थोड़ा कन्फ़्यूज़न है, क्योंकि चतुर्दशी तिथि दो दिनों तक फैली हुई है।
- यह तिथि 19 अक्टूबर को दोपहर 1:53 बजे से शुरू होगी और 20 अक्टूबर को दोपहर 3:46 बजे तक रहेगी।
तो मनाएँ कब?
पूजा और यम का दीया जलाने का सबसे अच्छा समय 19 अक्टूबर की शाम (सूर्यास्त के बाद) है, क्योंकि यह पूजा प्रदोष काल में ही की जाती है। जबकि उबटन लगाकर नहाने यानी अभ्यंग स्नान का शुभ मुहूर्त 20 अक्टूबर की सुबह (5:12 से 6:25 बजे तक) है।
क्यों कहते हैं इसे 'नरक चतुर्दशी'?
यह नाम सुनने में थोड़ा डरावना लगता है, पर इसकी कहानी जीत और रोशनी की है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन भगवान श्री कृष्ण ने नरकासुर नाम के एक बहुत ही दुष्ट राक्षस का वध किया था। उस राक्षस ने 16,100 लड़कियों को बंदी बना रखा था। श्री कृष्ण ने न सिर्फ़ उन सभी को आज़ाद कराया, बल्कि दुनिया को उसके डर से भी मुक्ति दिलाई। इसी जीत की याद में इस दिन को मनाया जाता है।
पूजा कैसे करें और क्यों जलाते हैं 'यम का दीया'?
छोटी दिवाली पर शाम के समय श्री कृष्ण, हनुमान जी और यमराज की पूजा का बहुत महत्व है।
- यम का दीया: इस दिन की सबसे ख़ास परंपरा है 'यम का दीया' जलाना। घर के बाहर, दक्षिण दिशा की ओर मुँह करके आटे का एक चौमुखी दीया जलाया जाता है। माना जाता है कि ऐसा करने से परिवार पर से अकाल मृत्यु का ख़तरा टल जाता है और यमराज प्रसन्न होते हैं।
- कितने दीये जलाएँ? इस दिन घर में 14 दीये जलाने की परंपरा है। एक दीया यमराज के लिए, एक माँ काली के लिए और एक श्री कृष्ण के लिए होता है। बाक़ी दीये घर के हर कोने-रसोई, तुलसी, दरवाज़े और छत पर रखे जाते हैं, ताकि घर का कोई भी कोना अँधेरे में न रहे।
छोटी और बड़ी दिवाली में क्या फ़र्क़ है?
छोटी दिवाली जहाँ बुराई पर अच्छाई की जीत और घर की सफ़ाई से जुड़ी है, वहीं बड़ी दिवाली 14 साल के वनवास के बाद भगवान राम के अयोध्या लौटने के जश्न का प्रतीक है। असल में, छोटी दिवाली बड़ी दिवाली की तैयारी का आख़िरी और सबसे पवित्र पड़ाव है, ताकि अगले दिन जब माँ लक्ष्मी घर आएँ, तो उन्हें एक साफ़ और सकारात्मक माहौल मिले।