केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रायपुर में लॉन्च की नेक्स्ट जेन सीजी डायल-112 सेवा और मोबाइल फॉरेंसिक लैब
छत्तीसगढ़ में कानून-व्यवस्था और अपराध अनुसंधान (क्राइम इन्वेस्टिगेशन) को हाईटेक बनाने की दिशा में सोमवार को एक बड़ा कदम उठाया गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्य के अपने तीन दिवसीय दौरे के दौरान छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के माना पुलिस परेड ग्राउंड में अल्ट्रा मॉर्डन 'नेक्स्ट जेन सीजी डायल-112 सर्विस' (Next Gen CG Dial-112 Service) और मोबाइल फॉरेंसिक लैब (Mobile Forensic Lab) का भव्य शुभारंभ किया।
गृह मंत्री शाह ने 'डायल-112' की 400 आधुनिक गाड़ियों और 32 मोबाइल फॉरेंसिक लैब वैन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस खास मौके पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह, उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा सहित कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे।
'एक्के नंबर, सब्बो बर': एक ही नंबर पर मिलेगी पुलिस, फायर और मेडिकल हेल्प
अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, 'नेक्स्ट जेन सीजी डायल-112' सेवा 'एक्के नंबर, सब्बो बर' (एक नंबर सभी के लिए) की थीम पर आधारित है। यह आधुनिक और एकीकृत (Integrated) आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली है:
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तीन सेवाएं एक साथ: अब प्रदेश के नागरिकों को पुलिस (Police), अग्निशमन (Fire) और चिकित्सा (Medical) आपातकाल के लिए अलग-अलग नंबरों पर फोन करने की जरूरत नहीं होगी। सभी आपातकालीन सेवाएं इसी एक नंबर पर उपलब्ध होंगी।
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24 घंटे निगरानी: यह सेवा 24 घंटे और सातों दिन काम करेगी। इसके सुचारू संचालन के लिए जीआईएस (GIS) आधारित निगरानी प्रणाली, एडवांस व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम और कॉलर की लोकेशन ट्रेस करने के लिए ऑटोमेटेड सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है।
स्मार्ट गैजेट्स से लैस हैं 400 गाड़ियां
लॉन्च की गई आपातकालीन गाड़ियों में तकनीकी सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया है। प्रत्येक गाड़ी में:
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स्मार्टफोन, जीपीएस (GPS) और वायरलेस रेडियो।
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रीयल-टाइम निगरानी के लिए पीटीजेड कैमरा (PTZ Camera), डैश कैम और मोबाइल एनवीआर (NVR)।
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किसी भी परिस्थिति में बिजली बैकअप के लिए सोलर पैनल सपोर्ट दिया गया है, जिससे घटनास्थल की लाइव मॉनिटरिंग और कंट्रोल रूम से सीधा संपर्क बना रहेगा।
व्हाट्सएप और ऐप से भी मांग सकेंगे इमरजेंसी मदद
इस नई व्यवस्था के तहत छत्तीसगढ़ के सभी 33 जिला केंद्रों को मुख्य नेटवर्क से जोड़ दिया गया है। अब नागरिक केवल फोन कॉल ही नहीं, बल्कि डिजिटल माध्यमों से भी तुरंत मदद हासिल कर सकते हैं। आपात स्थिति में लोग निम्नलिखित माध्यमों से संपर्क कर सकते हैं:
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सामान्य फोन कॉल और एसएमएस (SMS)
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ईमेल और आधिकारिक वेबसाइट
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व्हाट्सएप (WhatsApp) और चैटबॉट (Chatbot)
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'एसओएस-112 इंडिया' (SOS-112 India) मोबाइल एप्लिकेशन
65 लाख की मोबाइल फॉरेंसिक लैब से मौके पर ही होगी जांच
गृह मंत्री द्वारा रवाना की गई 32 मोबाइल फॉरेंसिक लैब राज्य में क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन के स्तर को पूरी तरह बदल देंगी। अब तक क्राइम सीन से सबूतों को दूर स्थित लैब तक भेजने में समय बर्बाद होता था, जिससे रिपोर्ट आने में देरी होती थी और सबूतों के नष्ट होने का खतरा भी रहता था।
प्रत्येक मोबाइल लैब की लागत लगभग 65 लाख रुपए है। इस वैन में वैज्ञानिक और डिजिटल जांच के लिए बेहद उन्नत (Advanced) उपकरण लगाए गए हैं, जिनमें शामिल हैं:
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घटनास्थल संरक्षण किट (Crime Scene Protection Kit)
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साक्ष्य संग्रहण एवं सीलिंग उपकरण (Evidence Collection & Sealing Tools)
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फिंगरप्रिंट डिटेक्शन सिस्टम और नार्कोटिक्स (ड्रग्स) परीक्षण किट
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बुलेट के निशान की स्क्रीनिंग प्रणाली और बैलिस्टिक जांच किट (Ballistics Investigation Kit)
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डिजिटल फॉरेंसिक सपोर्ट और हाई-क्वालिटी फोटोग्राफी व्यवस्था।
इस अत्याधुनिक पहल से अब क्राइम सीन पर ही प्रारंभिक वैज्ञानिक जांच, डिजिटल दस्तावेजीकरण और साक्ष्यों का सुरक्षित संरक्षण किया जा सकेगा। अधिकारियों का मानना है कि इन दोनों सेवाओं के शुरू होने से छत्तीसगढ़ में आपातकालीन सेवाओं की गुणवत्ता सुधरेगी, अपराधियों को पकड़ने में तेजी आएगी और न्याय प्रणाली पर आम नागरिकों का भरोसा और मजबूत होगा।