टीचर ने किया दशहरे पर रावण का पुतला जलाने का विरोध
देशभर में जहां एक तरफ विजया दशमी का पर्व और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक रावण दहन बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा था, वहीं दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश के एक इलाके से बेहद संवेदनशील और सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां एक सरकारी स्कूल के शिक्षक द्वारा दशहरे के पावन पर्व पर रावण का पुतला जलाने का खुलेआम विरोध किए जाने और साथ ही हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ कथित तौर पर बेहद आपत्तिजनक व अमर्यादित टिप्पणियां किए जाने का गंभीर मामला प्रकाश में आया है। इस घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोगों और हिंदू संगठनों में भारी आक्रोश फैल गया। जब इस मामले की सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी शिक्षक से पूछताछ करने की कोशिश की, तो उसने पुलिस दल को देखकर वहां से भागने का प्रयास किया, जिससे स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो गई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को हिरासत में ले लिया है और मामले की गहराई से जांच शुरू कर दी है।
क्या है पूरा मामला और कैसे भड़का स्थानीय ग्रामीणों का गुस्सा?
प्राप्त जानकारी और स्थानीय लोगों द्वारा दी गई शिकायतों के अनुसार, यह घटना एक स्थानीय विद्यालय और उससे जुड़े ग्रामीण इलाके में घटी। विजय दशमी के दिन जब आसपास के लोग रावण दहन की तैयारियों में जुटे हुए थे और पारंपरिक उत्सव का माहौल था, तब वहां मौजूद एक शिक्षक ने अचानक इसका कड़ा विरोध करना शुरू कर दिया। चश्मदीदों का आरोप है कि शिक्षक ने न केवल रावण दहन को गलत बताया, बल्कि सनातन धर्म और हिंदू देवी-देवताओं के संबंध में ऐसी अपमानजनक और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया जिससे वहां मौजूद लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हो गईं। त्योहार के माहौल में इस तरह के बयानों को सुनकर वहां मौजूद युवा और ग्रामीण भड़क गए और उन्होंने तुरंत इसकी सूचना स्थानीय पुलिस थाने को दी। देखते ही देखते मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई और शिक्षक के खिलाफ नारेबाजी शुरू हो गई।
पुलिस को आते देख भागने की फिराक में था आरोपी शिक्षक
मामले की गंभीरता को भांपते हुए स्थानीय थाना पुलिस और चौकी प्रभारी तुरंत भारी पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस ने भीड़ को शांत कराते हुए जब आरोपी शिक्षक को अपने संरक्षण में लेकर पूछताछ करने की कोशिश की, तो उसने अपनी गलती स्वीकार करने के बजाय वहां से भागने की कोशिश की। पुलिस कर्मियों और वहां मौजूद लोगों ने तत्परता दिखाते हुए उसे भागने से रोक लिया और अपनी गिरफ्त में ले लिया। आरोपी के इस प्रकार भागने की कोशिश करने से ग्रामीणों का गुस्सा और अधिक सातवें आसमान पर पहुंच गया। पुलिस ने किसी तरह स्थिति को नियंत्रित किया और आरोपी शिक्षक को थाने ले आई ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय या हिंसक घटना से बचा जा सके।
हिंदू संगठनों और स्थानीय लोगों की मांग- शिक्षक पर हो रा NSDL या बर्खास्तगी की कार्रवाई
इस घटना के तूल पकड़ने के बाद विभिन्न हिंदू संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने थाने के बाहर जमकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि एक शिक्षक, जो समाज के नौनिहालों को अच्छी शिक्षा और संस्कार देने के लिए जिम्मेदार होता है, यदि वही इस प्रकार की द्वेषपूर्ण और धार्मिक उन्माद फैलाने वाली हरकतें करेगा, तो समाज में क्या संदेश जाएगा। संगठनों ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों से मांग की है कि इस शिक्षक को तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspend) किया जाए और उसके खिलाफ सख्त धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा जाए ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति इस तरह की सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाली हरकत करने की हिम्मत न जुटा सके।
प्रशासनिक अधिकारियों की अपील- शांति और संयम बनाए रखें नागरिक
घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए जिले के वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने तुरंत मोर्चा संभाल लिया है। पुलिस अधिकारियों ने प्रेस को जानकारी देते हुए बताया कि आरोपी शिक्षक के खिलाफ संबंधित गंभीर धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है। प्रशासन ने क्षेत्र के सभी नागरिकों और समुदायों के लोगों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और इलाके में शांति एवं सौहार्द का माहौल बनाए रखें। पुलिस का कहना है कि कानून अपने हाथ में लेने वाले या माहौल बिगाड़ने की कोशिश करने वाले किसी भी पक्ष को बख्शा नहीं जाएगा और दोषियों के खिलाफ कानून के मुताबिक सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।