महतारी वंदन योजना ने बढ़ाया महिलाओं का आत्मविश्वास, रक्षाबंधन के मौके पर सीएम को प्रदेश की बहनों ने बांधी राखी

महतारी वंदन योजना ने बढ़ाया महिलाओं का आत्मविश्वास, रक्षाबंधन के मौके पर सीएम को प्रदेश की बहनों ने बांधी राखी

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से लेकर दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों तक इस बार रक्षाबंधन का पर्व एक ऐतिहासिक और बेहद खास उल्लास के साथ मनाया गया। भाई-बहन के पवित्र प्रेम और अटूट विश्वास के प्रतीक इस पावन पर्व पर राज्य भर से आई हजारों माताओं और बहनों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सरकारी आवास पर पहुंचकर उनकी कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा और उनके दीर्घायु होने की कामना की। इस भव्य और स्नेह से परिपूर्ण कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने भी पूरे आत्मीय भाव से प्रदेश भर की बहनों का स्वागत किया और उन्हें यह विश्वास दिलाया कि राज्य सरकार उनकी सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन के लिए हमेशा पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस विशेष अवसर पर महिलाओं के चेहरों पर जो चमक और आत्मविश्वासी मुस्कान देखने को मिली, उसके पीछे सरकार की महत्वाकांक्षी 'महतारी वंदन योजना' का बहुत बड़ा योगदान रहा है, जिसने रक्षाबंधन के इस त्योहार को छत्तीसगढ़ की महिलाओं के लिए दोगुनी खुशियों में तब्दील कर दिया है।

मुख्यमंत्री निवास में सजा रक्षाबंधन का दरबार और उमड़ी बहनों की भीड़

रक्षाबंधन के पावन पर्व पर मुख्यमंत्री निवास का पूरा परिसर उत्सव के माहौल में रंगा नजर आया, जहां सुबह से ही महिलाओं का आना शुरू हो गया था। विभिन्न जिलों और क्षेत्रों से पहुंची बहनों ने कतारबद्ध होकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को राखी बांधी और पारंपरिक तरीके से उनका मुंह मीठा कराया। इस आयोजन में केवल आम ग्रहणी महिलाएं ही नहीं, बल्कि समाज के अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी एक अलग पहचान बनाने वाली स्व-सहायता समूहों की दीदियां, लखपति दीदियां, ड्रोन दीदियां, ई-रिक्शा चलाने वाली महिलाएं, मितानिन बहनें, महिला पत्रकार, दिव्यांग और विभिन्न समाजों की प्रतिनिधि महिलाएं भी भारी संख्या में शामिल हुईं। मुख्यमंत्री ने सभी बहनों का अभिवादन स्वीकार करते हुए कहा कि प्रदेश की माताओं-बहनों का यह असीम स्नेह और आशीर्वाद ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है, जो उन्हें और अधिक ऊर्जा के साथ जनसेवा करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि सरकार का मुख्य उद्देश्य सिर्फ योजनाओं का संचालन करना नहीं, बल्कि हर घर की महिला को आर्थिक रूप से संबल और आत्मनिर्भर बनाना है।

महतारी वंदन योजना की राशि ने बढ़ाया महिलाओं का आत्मविश्वास

इस रक्षाबंधन के उल्लास को और अधिक बढ़ाने का मुख्य कार्य राज्य सरकार की लोकप्रिय 'महतारी वंदन योजना' ने किया, जिसके तहत प्रदेश की लगभग 68 लाख महिलाओं के बैंक खातों में हर महीने एक हजार रुपये की वित्तीय सहायता सीधे अंतरित की जा रही है। त्योहार के इस पवित्र अवसर को ध्यान में रखते हुए सरकार ने तय समय से पहले ही 25 अगस्त को महतारी वंदन योजना की 31वीं किस्त के रूप में 631 करोड़ रुपये से अधिक की राशि बहनों के खातों में जमा करा दी थी। मुख्यमंत्री ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि यह योजना सिर्फ एक आर्थिक मदद भर नहीं है, बल्कि इसने प्रदेश की महिलाओं के भीतर एक नया आत्मविश्वास जगाया है। अब महिलाएं अपनी छोटी-छोटी वित्तीय जरूरतों, बच्चों की शिक्षा, सेहत और घरेलू आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए किसी पर निर्भर रहने को विवश नहीं हैं। वे अपने छोटे-मोटे फैसले खुद ले पा रही हैं और परिवार की मुख्यधारा में एक मजबूत आर्थिक निर्णयकर्ता के रूप में उभर रही हैं।

लखपति दीदी और ड्रोन दीदियों की नई तकनीकी क्रांति

छत्तीसगढ़ में महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण का दायरा अब केवल वित्तीय सहायता तक ही सीमित नहीं रहा है, बल्कि वे आधुनिक तकनीक और आजीविका के नए साधनों को अपनाकर एक नई क्रांति लिख रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देश भर में महिलाओं को लखपति दीदी बनाने के संकल्प को आगे बढ़ाते हुए छत्तीसगढ़ ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। राज्य को शुरुआती तौर पर 8 लाख महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य मिला था, लेकिन प्रदेश की माताओं-बहनों की मेहनत और उद्यमशीलता के बल पर पिछले दो वर्षों के भीतर ही 13 लाख 85 हजार से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। इसके अलावा गांवों की महिलाएं अब कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक यानी ड्रोन का इस्तेमाल कर रही हैं। 'ड्रोन दीदी' के रूप में प्रशिक्षित होकर ये महिलाएं खेतों में उर्वरक और कीटनाशकों का छिड़काव कर रही हैं, जिससे उनकी आमदनी में भारी इजाफा हुआ है और वे प्रतिदिन हजारों रुपये की कमाई कर रही हैं। इसी तरह रायपुर और अन्य शहरी इलाकों में ई-रिक्शा चलाकर महिलाएं अपनी आजीविका के नए द्वार खोल रही हैं।

सीमाओं पर तैनात जवानों के लिए भी सजा रक्षा का धागा

मुख्यमंत्री निवास के इस कार्यक्रम का एक और बेहद भावुक और प्रेरक पहलू देखने को मिला, जहां बहनों ने केवल राजनीतिक या प्रशासनिक हस्तियों को ही नहीं, बल्कि देश और प्रदेश की सुरक्षा में सरहद पर तैनात वीर जवानों को भी राखी समर्पित की। 'स्नेह की डोर' कार्यक्रम के तहत स्व-सहायता समूहों की बहनों, दिव्यांग बहनों और शहीद परिवारों की महिलाओं ने सीआरपीएफ, बीएसएफ, सीआईएसएफ और आईटीबीपी सहित विभिन्न सुरक्षा बलों के लगभग 1600 जवानों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनके अटूट साहस और बलिदान के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की। मुख्यमंत्री ने कहा कि जो जवान अपने घरों और परिवारों से कोसों दूर रहकर त्योहारों के दिन भी हमारी रक्षा के लिए मुस्तैद रहते हैं, उनका सम्मान करना और उनके प्रति आदर भाव रखना हर नागरिक का सबसे बड़ा कर्तव्य है। महिलाओं द्वारा जवानों को बांधी गई यह राखी राष्ट्रभक्ति और सामाजिक समरसता की एक अनूठी मिसाल बनकर सामने आई।

पंचायती राज से लेकर नेतृत्व के हर मोर्चे पर बढ़ती भागीदारी

आज छत्तीसगढ़ की महिलाएं केवल घर-परिवार की चारदीवारी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि स्थानीय स्वशासन और पंचायती राज संस्थाओं में भी उनकी मजबूत भागीदारी ने ग्रामीण विकास की पूरी तस्वीर बदल दी है। पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं को दिए गए 50 प्रतिशत आरक्षण के बाद से गांवों की सत्ता और विकास की बागडोर अब 'सरपंच दीदियों' के हाथों में आ चुकी है। वे अपने नेतृत्व कौशल, नवाचार और सूझबूझ से गांवों में स्वच्छता, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी विकास कार्यों को नई दिशा दे रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का स्पष्ट विजन है कि महिलाएं केवल योजनाओं की लाभार्थी बनकर न रहें, बल्कि वे उद्यमी बनें और अपने साथ-साथ दूसरे लोगों को भी रोजगार देने वाली सशक्त शख्सियत के रूप में अपनी पहचान बनाएं। रक्षाबंधन के इस पावन पर्व पर राज्य की बहनों के चेहरे की खुशी और उनके बढ़ते कदम इस बात की गवाही दे रहे हैं कि छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तीकरण अब केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक हकीकत बन चुका है।

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