छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई के स्तर को परखने के लिए राज्य स्तरीय दल का गठन

छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई के स्तर को परखने के लिए राज्य स्तरीय दल का गठन

भारतीय शिक्षा प्रणाली और सरकारी स्कूलों की कार्यप्रणाली में सुधार लाने के उद्देश्य से समय-समय पर विभिन्न राज्यों में कड़े प्रशासनिक कदम उठाए जाते रहे हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ से इस वक्त शिक्षा जगत को झकझोर देने वाली एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। राज्य के सरकारी विद्यालयों में बच्चों को मिलने वाली शिक्षा की गुणवत्ता, शिक्षकों की उपस्थिति और पठन-पाठन के वास्तविक स्तर की जमीनी हकीकत का जायजा लेने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने एक विशेष राज्य स्तरीय उच्चाधिकारी दल (State Level Inspection Team) का गठन कर दिया है। शिक्षा के स्तर में सुधार की इस बड़ी कवायद के तहत फिलहाल राज्य के पांच महत्वपूर्ण जिलों को चिन्हित किया गया है, जिसमें औद्योगिक और शैक्षणिक रूप से अग्रणी माने जाने वाले दुर्ग जिले को भी विशेष रूप से शामिल किया गया है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, यह राज्य स्तरीय दल बिना किसी पूर्व सूचना के अचानक स्कूलों का औचक निरीक्षण करेगा और कक्षाओं में जाकर बच्चों की पठन-पाठन की योग्यताओं, गणित-विज्ञान के ज्ञान तथा शिक्षकों की शिक्षण शैली का बारीकी से मूल्यांकन करेगा। इस औचक निरीक्षण अभियान के फरमान के जारी होते ही चयनित जिलों के शिक्षा अधिकारियों, प्राचार्यों और शिक्षकों के बीच भारी खलबली मच गई है, क्योंकि पिछले कुछ समय से लगातार मिल रही शिकायतों के बाद सरकार अब किसी भी प्रकार की कोताही बरतने के मूड में नहीं दिखाई दे रही है।

दुर्ग समेत पांच जिलों में अचानक निरीक्षण की क्यों पड़ी जरूरत?

छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा उठाए गए इस सख्त कदम के पीछे मुख्य वजह लंबे समय से सरकारी स्कूलों के परीक्षा परिणामों और बुनियादी साक्षरता को लेकर मिल रही नकारात्मक फीडबैक रिपोर्ट है। राज्य सरकार का यह स्पष्ट मानना है कि कागजों पर भले ही स्कूलों में शत-प्रतिशत नामांकन और बेहतरीन बुनियादी सुविधाओं के दावे किए जा रहे हों, लेकिन धरातल पर कई जगहों पर शिक्षा का स्तर अभी भी चिंताजनक स्थिति में बना हुआ है। इसी सत्यता को परखने के लिए दुर्ग सहित पांच प्रमुख जिलों का चयन किया गया है, जहां विभिन्न क्षेत्रों के ग्रामीण और शहरी स्कूलों की मॉनिटरिंग की जाएगी। इस राज्य स्तरीय दल में शिक्षा विशेषज्ञों, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और विषय विशेषज्ञों को शामिल किया गया है, जो सीधे तौर पर छात्रों से बातचीत करके यह जानेंगे कि उन्हें निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुसार शिक्षा मिल रही है या नहीं। अचानक होने वाले इन छापों से लापरवाह शिक्षकों और व्यवस्थाओं की पोल खुलने की पूरी संभावना जताई जा रही है।

शिक्षकों की कार्यप्रणाली और कक्षाओं में पठन-पाठन का होगा सूक्ष्म मूल्यांकन

राज्य स्तरीय निरीक्षण दल जब स्कूलों में पहुंचेगा, तो उनका मुख्य फोकस केवल बुनियादी दस्तावेजों या रजिस्टरों की जांच करना नहीं होगा, बल्कि वे सीधे क्लासरूम के भीतर जाकर शिक्षण कार्य का प्रत्यक्ष अवलोकन करेंगे। दल के सदस्य बच्चों से किताबें पढ़वाकर, गणित के बुनियादी सवाल पूछकर और विज्ञान के प्रयोगों की जानकारी लेकर यह परखेंगे कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे अपनी कक्षाओं के स्तर के अनुरूप कितना ज्ञान अर्जित कर पा रहे हैं। इसके साथ ही, स्कूलों में मध्याह्न भोजन (Mid-Day Meal) की गुणवत्ता, साफ-सफाई, पीने के पानी की व्यवस्था और खेलकूद के संसाधनों का भी जायजा लिया जाएगा। यदि निरीक्षण के दौरान कोई शिक्षक अनुपस्थित पाया जाता है या पढ़ाने में गंभीर लापरवाही बरतता पाया जाता है, तो उस पर तत्काल प्रभाव से अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।

शिक्षा विभाग के इस बड़े अभियान से सुस्त पड़ी व्यवस्था में आएगी तेजी

छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में अकादमिक सुधार के लिए इस तरह के राज्य स्तरीय अभियानों का एक दूरगामी सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलता है। जब शासन स्तर से सीधे टीमें मैदान में उतरती हैं, तो जिला और ब्लॉक स्तर के शिक्षा अधिकारियों पर भी काम का दबाव बढ़ जाता है और वे स्कूलों की नियमित मॉनिटरिंग करने के लिए बाध्य हो जाते हैं। दुर्ग और अन्य चार चयनित जिलों के स्कूलों में इस औचक निरीक्षण की सुगबुगाहट से ही शिक्षकों में सतर्कता का माहौल बन गया है। जो शिक्षक अपनी कक्षाओं में समय पर नहीं पहुंचते थे या बिना तैयारी के बच्चों को पढ़ाते थे, वे अब अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करने लगे हैं। शिक्षाविदों का मानना है कि यदि इस प्रकार के औचक निरीक्षण की यह प्रक्रिया पूरे साल नियमित रूप से जारी रखी जाए, तो सरकारी स्कूलों के परीक्षा परिणामों में अभूतपूर्व सुधार देखने को मिल सकता है।

बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों पर कसेगा शिकंजा

राज्य सरकार का यह सख्त संदेश साफ है कि बच्चों के भविष्य और शिक्षा के अधिकार के साथ किसी भी स्तर पर खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आने वाले कुछ दिनों में यह राज्य स्तरीय दल अचानक किसी भी स्कूल का दरवाजा खटखटा सकता है, जिससे प्रशासनिक अमले में पूरी तरह से सतर्कता बरती जा रही है। इस पूरी कवायद का अंतिम उद्देश्य यही सुनिश्चित करना है कि छत्तीसगढ़ के दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी क्षेत्रों तक के हर एक छात्र को गुणवत्तापूर्ण और प्रतिस्पर्धी शिक्षा मिल सके, ताकि वे भविष्य में देश और राज्य का नाम रोशन कर सकें।

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