दशहरा पर दावत की थी तैयारी, वन विभाग ने चौपट किया प्लान

दशहरा पर दावत की थी तैयारी, वन विभाग ने चौपट किया प्लान

विजया दशमी और त्योहारी सीजन की खुशियों के बीच झारखंड और छत्तीसगढ़ की सीमा से वन्यजीव संरक्षण और सुरक्षा को लेकर एक चौंकाने वाली बड़ी खबर सामने आ रही है। झारखंड-छत्तीसगढ़ बॉर्डर के घने जंगलों में वन्यजीवों का अवैध शिकार करने की ताक में बैठे तस्करों के नापाक मंसूबों पर वन विभाग और एंटी-पोचिंग सेल की संयुक्त टीम ने पानी फेर दिया है। मिली जानकारी के अनुसार, कुछ स्थानीय शिकारी और पेशेवर तस्कर दशहरा के पावन अवसर पर बड़े पैमाने पर जंगली जानवरों की दावत और मांस की अवैध खरीद-फरोख्त की योजना बना रहे थे। इसके लिए उन्होंने जंगलों के बीच सुनसान रास्तों पर बेहद खतरनाक हथियारों और फंदों का जाल बिछा रखा था। लेकिन समय रहते खुफिया तंत्र से मिली सटीक सूचना के आधार पर वन विभाग की टीम ने इलाके में ताबड़तोड़ छापेमारी कर दी, जिससे तस्करों की पूरी योजना धरी की धरी रह गई।

झारखंड-छत्तीसगढ़ सीमा के जंगलों में बिछाया गया था मौत का जाल

दोनों राज्यों के सीमावर्ती इलाके अपनी जैव विविधता, घने जंगलों और वन्यजीवों (जैसे जंगली सुअर, हिरण और अन्य प्रजातियों) के लिए देश भर में जाने जाते हैं। लेकिन पिछले कुछ समय से इन इलाकों में सक्रिय शिकारी गिरोहों द्वारा वन्यजीवों को निशाना बनाए जाने की खबरें लगातार मिल रही थीं। दशहरा और दीपावली के त्योहारी सीजन के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में जंगली मांस की मांग अचानक बढ़ जाती है, जिसका फायदा उठाने के लिए तस्कर जंगलों में सक्रिय हो जाते हैं। इस बार भी तस्करों ने बेहद शातिर तरीके से जंगलों के उन हिस्सों को चुना जहां इंसानों की आवाजाही कम होती है। उन्होंने वन्यजीवों के आने-जाने वाले मुख्य रास्तों पर जमीन से लेकर झाड़ियों के बीच ऐसे जाल बिछाए थे कि कोई भी जानवर वहां फंसकर आसानी से उनका शिकार बन सके।

200 फीट लंबा घातक फंदा और आधुनिक तीर-धनुष बरामद

वन विभाग के अधिकारियों ने जब झारखंड-छत्तीसगढ़ बॉर्डर से सटे संदिग्ध जंगली इलाकों में सर्च ऑपरेशन चलाया, तो उनके होश उड़ गए। छापेमारी के दौरान टीम ने लगभग 200 फीट लंबा विशेष रूप से तैयार किया गया नायलॉन और तार का फंदा बरामद किया, जिसका उपयोग बड़े वन्यजीवों को दौड़ते वक्त जकड़ने के लिए किया जाता था। इसके अलावा मौके से कई जहरीले तीर, पारंपरिक धनुष और धारदार हथियार भी लावारिस हालत में मिले। अधिकारियों के अनुसार, यह फंदा इतना मजबूत और खतरनाक था कि यदि कोई भारी-भरकम वन्यजीव इसके दायरे में आ जाता, तो उसका बच पाना नामुमकिन था। वन विभाग की टीम ने इन सभी अवैध उपकरणों को मौके पर ही जब्त कर लिया और उन्हें नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

वन विभाग की मुस्तैदी से टला बड़ा वन्यजीव संकट, तस्करों की तलाश तेज

इस सफल कार्रवाई के बाद से वन विभाग के महकमे ने राहत की सांस ली है, लेकिन साथ ही सीमावर्ती इलाकों में गश्त और चौकसी को और अधिक बढ़ा दिया गया है। वन अधिकारियों का कहना है कि भले ही इस बार मुख्य आरोपी मौके से भागने में सफल रहे, लेकिन उनके ठिकानों और नेटवर्क के बारे में कई महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे हैं। स्थानीय मुखबिरों की मदद से उन लोगों की पहचान की जा रही है जो इस अवैध शिकार के धंधे को परोक्ष या अपरोक्ष रूप से बढ़ावा दे रहे थे। झारखंड और छत्तीसगढ़ के वन विभाग के अधिकारियों ने आपसी समन्वय बैठक कर यह तय किया है कि त्योहारी सीजन के बचे हुए दिनों में जंगलों के भीतर विशेष नाइट पेट्रोलिंग (Night Patrol) की जाएगी ताकि किसी भी वन्यजीव की जान को खतरा न हो सके।

पर्यावरण प्रेमियों ने की कार्रवाई की सराहना, कड़े कानूनों की मांग

झारखंड-छत्तीसगढ़ बॉर्डर पर वन विभाग द्वारा की गई इस त्वरित कार्रवाई की पर्यावरण प्रेमियों, वन्यजीव कार्यकर्ताओं और स्थानीय जागरूक नागरिकों ने खुलकर सराहना की है। लोगों का कहना है कि त्योहारों की आड़ में प्रकृति और मूक जीवों का शिकार करने वाले ऐसे तत्वों के खिलाफ पुलिस और वन विभाग को इसी तरह की सख्त और निर्णायक कार्रवाई जारी रखनी चाहिए। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत इन मामलों में संलिप्त पाए जाने वाले आरोपियों के खिलाफ गैर-जमानती धाराएं लगाकर उन्हें सलाखों के पीछे भेजना बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति जंगलों के इस अनमोल धरोहर को नुकसान पहुंचाने की हिम्मत न कर सके।