सुरक्षाबलों के लिए मददगार बने पुराने 'दुश्मन': जानकारी देकर पहुंचा दिया सीक्रेट ठिकाने तक
भारतीय सुरक्षा बलों और देश विरोधी ताकतों के बीच चलने वाला चूहे-बिल्ली का खेल और खुफिया ऑपरेशंस हमेशा से ही किसी फिल्मी thriller से कम रोमांचक नहीं रहे हैं, लेकिन कई बार जमीनी हकीकत इन कहानियों से भी कहीं ज्यादा हैरान करने वाली होती है। उत्तर प्रदेश और देश के विभिन्न संवेदनशील इलाकों में जब आतंकवाद और संगठित अपराध के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों का शिकंजा कसता है, तो कई बार ऐसे अप्रत्याशित मोड़ सामने आते हैं जिन पर आसानी से विश्वास करना नामुमकिन हो जाता है। ताजा और बेहद सनसनीखेज खुफिया रिपोर्ट के अनुसार, एक ऐसा ही चौंकाने वाला मामला सामने आया है जहां कभी सुरक्षा बलों के सबसे बड़े 'दुश्मन' या विरोधी माने जाने वाले कुछ स्थानीय तत्वों ने मुखबिरी करते हुए खुद ही जवानों के मददगार की भूमिका निभा डाली। इन पुराने दुश्मनों ने न केवल सुरक्षा एजेंसियों को सटीक और अंदरूनी खुफिया जानकारियां मुहैया कराईं, बल्कि खुद आगे बढ़कर जवानों को आतंकियों और अपराधियों के उस बेहद गोपनीय और सीक्रेट ठिकाने तक पहुंचा दिया, जिसके बारे में पुलिस या सुरक्षा बलों को दूर-दूर तक कोई सुराग नहीं था। इस अचूक और सुनियोजित ऑपरेशन के तहत जब उस गुप्त ठिकाने पर छापा मारा गया, तो वहां से हथियारों, गोला-बारूद और आधुनिक असलाह का एक ऐसा भारी जखीरा बरामद हुआ जिसे देखकर बड़े-बड़े सुरक्षा अधिकारी भी सन्न रह गए। आइए इस विस्तृत और सनसनीखेज रिपोर्ट में जानते हैं कि आखिर इस पूरे नाटकीय घटनाक्रम के पीछे की असल कहानी क्या है और कैसे एक बड़े खतरे को समय रहते टाल दिया गया।
कैसे पलटी बाजी? पुराने दुश्मनों का पाला बदलना और खुफिया तंत्र का कमाल
सुरक्षा अभियानों के इतिहास में यह एक दुर्लभ मिसाल है जब कोई पुराना विरोधी या ऐसा व्यक्ति जो पहले कानून के खिलाफ गतिविधियों में संलिप्त रहा हो, वह खुद अपनी मर्जी से या परिस्थितियों के दबाव में आकर सुरक्षाबलों का सबसे बड़ा मददगार बन जाए। खुफिया सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों से सुरक्षा एजेंसियों को यह अंदेशा था कि किसी बड़े आपराधिक या विध्वंसक गिरोह द्वारा राज्य के भीतर हथियारों की एक बड़ी खेप डंप की जा रही है, जिसका इस्तेमाल किसी बड़ी सनसनीखेज वारदात को अंजाम देने के लिए किया जाना था। लेकिन स्थानीय स्तर पर मुखबिरों का नेटवर्क पूरी तरह से उस जगह को ढूंढ पाने में असमर्थ साबित हो रहा था। ऐसे में, सुरक्षा बलों ने अपनी पारंपरिक कार्यशैली से हटकर कुछ स्थानीय और पुराने संपर्कों का इस्तेमाल किया, जो कभी कानून की नजर में 'संदिग्ध' या 'दुश्मन' की श्रेणी में आते थे। जब इन लोगों पर खुफिया दबाव और देश की सुरक्षा का वास्ता पड़ा, तो उन्होंने पाला बदलते हुए न केवल अपनी पुरानी वफादारियों को दरकिनार किया, बल्कि सुरक्षाबलों को सीधे उस अंडरग्राउंड बंकर और सीक्रेट ठिकाने तक का नक्शा सौंप दिया जहां सारा सामान छिपाकर रखा गया था।
सीक्रेट ठिकाने पर छापा: हथियारों के जखीरे को देखकर उड़े अधिकारियों के होश
जब मुखबिरों से मिली उस अचूक और सटीक जानकारी के आधार पर सुरक्षाबलों और आतंकवाद रोधी दस्तों (ATS/STF) की संयुक्त टीम ने बताए गए गुप्त ठिकाने पर धावा बोला, तो वहां का नजारा बेहद डरावना था। जमीन के भीतर बनाए गए एक गुप्त और बेहद सुरक्षित बंकर के अंदर आधुनिक ऑटोमैटिक हथियार, भारी मात्रा में कारतूस, विस्फोटक सामग्रियां और कई अन्य खतरनाक असलाह करीने से छिपाकर रखे गए थे। हथियारों के इस विशाल जखीरे को देखकर मौके पर मौजूद सुरक्षा अधिकारियों के भी होश उड़ गए, क्योंकि यदि समय रहते यह खेप सुरक्षाबलों के हाथ न लगती, तो यह किसी बड़े आतंकी हमले या खूनी संघर्ष का कारण बन सकती थी। जवानों ने बिना एक भी पल गंवाए तुरंत पूरे इलाके को अपने कब्जे में ले लिया और एक-एक करके सभी हथियारों और गोला-बारूद को अपने कब्जे में लेना शुरू कर दिया। इस बड़ी सफलता के बाद पूरे महकमे में राहत की सांस ली गई है और यह माना जा रहा है कि इस एक कार्रवाई ने कई बड़ी साजिशों को समय से पहले ही दफना दिया है।
स्थानीय भूगोल और मुखबिरी का तालमेल: कैसे संभव हुआ यह असंभव ऑपरेशन?
इस पूरे मिशन की सबसे बड़ी खूबी यह रही कि इसमें सुरक्षाबलों की आधुनिक तकनीकी निगरानी और स्थानीय स्तर पर मिले उस 'आंतरिक सहयोग' का अद्भुत तालमेल देखने को मिला, जिसे आम तौर पर नामुमकिन माना जाता था। उत्तर प्रदेश और उससे सटे संवेदनशील इलाकों की भौगोलिक बनावट, घने जंगलों और बीहड़ या शहरी इलाकों के गुप्त ठिकानों की जानकारी हर किसी के पास नहीं होती है। जो लोग कभी खुद इन रास्तों का इस्तेमाल गैरकानूनी गतिविधियों के लिए करते थे, उन्हें चप्पे-चप्पे की भौगोलिक स्थिति जुबानी याद थी। जब वही लोग सुरक्षाबलों के लिए गाइड बनकर आगे आए, तो बदमाशों और अपराधियों के सारे छिपने के रास्ते अपने आप बंद हो गए। इस ऑपरेशन ने यह साबित कर दिया कि जब देश की सुरक्षा और कानून का खौफ आमने-सामने होता है, तो अपराध की दुनिया के समीकरण भी रातों-रात बदल जाते हैं। सुरक्षा एजेंसियों अब इस बात की भी गहनता से जांच कर रही हैं कि आखिर इस भारी-भरकम हथियारों के जखीरे को देश के भीतर इतनी सफाई से किसने और किस मकसद से डंप किया था, और इसके पीछे कौन-कौन से बड़े चेहरे या सिंडिकेट जुड़े हुए हैं।
देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा यह खुलासा
सुरक्षा विश्लेषकों का यह मानना है कि हथियारों के इस जखीरे की बरामदगी और पुराने दुश्मनों का मददगार बनना देश की आंतरिक सुरक्षा के लिहाज से एक बहुत बड़ा मोड़ है। यह घटना इस बात का प्रमाण है कि सुरक्षा एजेंसियां अब केवल पारंपरिक तरीकों पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि वे हर उस संभव रणनीति का इस्तेमाल कर रही हैं जिससे देश विरोधी ताकतों के मंसूबों को मिट्टी में मिलाया जा सके। पकड़े गए हथियारों की फोरेंसिक जांच शुरू कर दी गई है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इनकी तस्करी कहाँ से की गई थी और इन्हें किन नापाक इरादों के लिए इस्तेमाल किया जाना था। आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े कई और बड़े और चौंकाने वाले खुलासे होने की पूरी संभावना है, जिससे कई अन्य अपराधियों और स्लीपर सेल के चेहरों से भी नकाब उतर सकता है। बहरहाल, सुरक्षाबलों की इस मुस्तैदी और समय रहते उठाए गए साहसिक कदम ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया है कि देश की रक्षा के आगे हर बड़ी से बड़ी चुनौती छोटी पड़ जाती है।