540 करोड़ के कोल लेवी घोटाले की नई चार्जशीट में बड़ा खुलासा
छत्तीसगढ़ के राजनीतिक गलियारों में उस वक्त भारी भूचाल आ गया है जब राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा और एंटी करप्शन ब्यूरो (EOW/ACB) ने बहुचर्चित 540 करोड़ रुपये के कोयला लेवी घोटाले (Coal Levy Scam) मामले में एक बेहद चौंकाने वाला और विस्तृत पूरक चालान अदालत में पेश किया है। लगभग 10 हजार पन्नों के इस छठे सप्लीमेंट्री चालान में कई बड़े खुलासे किए गए हैं, जिससे विपक्षी दल कांग्रेस की मुश्किलें काफी बढ़ती हुई नजर आ रही हैं। इस जांच रिपोर्ट और सीक्रेट डायरियों के आधार पर यह दावा किया गया है कि अवैध रूप से वसूली गई इस विशाल रकम का एक बड़ा हिस्सा कांग्रेस पार्टी के कई प्रमुख नेताओं और चुनाव प्रबंधन में पानी की तरह बहाया गया था। विशेष रूप से भिलाई नगर के युवा कांग्रेस विधायक देवेंद्र सिंह यादव (Devendra Yadav) को इस सिंडिकेट से 3 करोड़ रुपये से अधिक की राशि मिलने का सनसनीखेज दावा किया गया है, जिसके बाद सूबे की सियासत का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। आइए इस विस्तृत रिपोर्ट में जानते हैं कि इस नई चार्जशीट में किस-किस कांग्रेस नेता का नाम शामिल है और किसे कितना पैसा मिलने की बात सामने आई है।
क्या है 540 करोड़ का कोल लेवी घोटाला और कैसे चलता था अवैध वसूली का पूरा खेल?
जांच एजेंसियों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में जुलाई 2020 से जून 2022 के बीच ट्रांसपोर्ट किए जाने वाले कोयले पर प्रति क्विंटल 25 रुपये की अवैध लेवी (अवैध वसूली) का एक संगठित सिंडिकेट चलाया जा रहा था। इस दो साल की अवधि के दौरान कुल मिलाकर लगभग 540 करोड़ रुपये की अवैध रकम का वारा-न्यारा किया गया। EOW की इस नई चार्जशीट में मुख्य आरोपी के तौर पर सूर्यकांत तिवारी और अन्य सिंडिकेट संचालकों की भूमिका को केंद्र में रखा गया है, जो इस अवैध रकम को एकत्र करने, उसका हिसाब-किताब रखने और विभिन्न राजनीतिक मंचों या नेताओं तक पहुंचाने का काम करते थे। इस गोरखधंधे के सबूत के रूप में एजेंसियों को कई डिजिटल चैट्स, व्हाट्सएप ग्रुप्स (जैसे दुर्ग ग्रुप, टुडे ग्रुप, जय मां काली ग्रुप) और एक सीक्रेट डायरी हाथ लगी है, जिसमें लेन-देन का पूरा कच्चा-चिट्ठा दर्ज है। इस काली कमाई को वैध रूप देने के लिए फर्जी कंपनियों, बिना गारंटी के कर्जों और बेनामी संपत्तियों में निवेश किए जाने के चौंकाने वाले तथ्य भी सामने आए हैं।
विधायक देवेंद्र यादव को मिले 3 करोड़ रुपये, खैरागढ़ और यूपी चुनाव प्रचार में हुआ इस्तेमाल
EOW द्वारा दाखिल किए गए इस नए चालान के पेज और दस्तावेजों के मुताबिक, भिलाई नगर के कांग्रेस विधायक देवेंद्र सिंह यादव को इस अवैध सिंडिकेट से 3 करोड़ रुपये से अधिक की भारी-कलमी रकम मिलने का पुख्ता दावा किया गया है। जांच में यह बात सामने आई है कि इस पैसे का मुख्य रूप से खैरागढ़ विधानसभा उपचुनाव और उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान चुनाव प्रचार, स्थानीय प्रबंधन और राजनीतिक कार्यक्रमों में पानी की तरह इस्तेमाल किया गया था। डिजिटल साक्ष्यों और व्हाट्सएप चैट्स के हवाले से यह भी खुलासा हुआ है कि एक सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजन (कवि कुमार विश्वास की रामकथा) के लिए भी इसी फंड से 25 लाख रुपये की व्यवस्था की गई थी। राजनीतिक हलकों में देवेंद्र यादव पर लगे इन गंभीर आरोपों के बाद विपक्षी दलों को सरकार और कांग्रेस पर हमलावर होने का बड़ा मौका मिल गया है, हालांकि बचाव पक्ष के वकीलों ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे राजनीतिक बदले की भावना करार दिया है।
चार्जशीट में फंसे अन्य कांग्रेस नेता: जानिए किसे मिला कितना हिस्सा
इस 10 हजार पन्नों के पूरक चालान में केवल देवेंद्र यादव ही नहीं, बल्कि कांग्रेस पार्टी के कई अन्य जाने-माने नेताओं और पूर्व विधायकों के नाम भी प्रमुखता से शामिल किए गए हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, कांग्रेस नेता रामप्रताप सिंह पर करीब 2 करोड़ 1 लाख रुपये और विनोद तिवारी पर 1 करोड़ 87 लाख रुपये की राशि प्राप्त करने का गंभीर आरोप लगाया गया है, जिसका उपयोग कथित तौर पर मीडिया प्रबंधन, गाड़ियों के किराए और रैलियों के इंतजाम में किया गया था। इसके अलावा, बिलाईगढ़ के तत्कालीन विधायक चंद्रदेव प्रसाद राय पर सिंडिकेट से लगभग 46 लाख रुपये प्राप्त करने का दावा किया गया है, जिसमें से अधिकांश राशि का उपयोग चुनाव प्रबंधन और रायपुर के एक बड़े ज्वेलर से सोने के आभूषण खरीदने में किया गया था। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के तत्कालीन कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल का नाम भी इस अवैध फंड को संभाल
कानूनी शिकंजा और आने वाले दिनों में राजनीतिक संग्राम के आसार
राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा द्वारा अदालत में पेश किए गए इस छठे पूरक चालान और 72 से अधिक गवाहों के बयानों ने इस पूरे मामले को और अधिक मजबूत कर दिया है। हालांकि बचाव पक्ष के वकीलों का यह कहना है कि इनमें से अधिकांश लोग पहले से ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) के मामलों में आरोपी रह चुके हैं और अदालत में वे कानूनी रूप से इन बेबुनियाद आरोपों का पूरी ताकत से मुकाबला करेंगे, लेकिन राजनीतिक रूप से यह खुलासा कांग्रेस पार्टी के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। जैसे-जैसे अदालत में इस मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी, छत्तीसगढ़ की सियासत में इस 540 करोड़ के घोटाले की गूंज और अधिक तेज होने की पूरी संभावना है। जनता और राजनीतिक विश्लेषकों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में इस हाई-प्रोफाइल मामले में न्यायपालिका की तरफ से क्या रुख अपनाया जाता है और आरोपी नेताओं का अगला राजनीतिक कदम क्या होता है।