SIR के बाद सामने आई वोटर लिस्ट की बड़ी गड़बड़ी

SIR के बाद सामने आई वोटर लिस्ट की बड़ी गड़बड़ी

लोकतंत्र के सबसे बड़े आधार यानी मतदाता सूची (Voter List) की शुद्धता और पारदर्शिता को लेकर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। हाल ही में संपन्न हुई विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR) प्रक्रिया के बाद जब अंतिम और अपडेटेड डेटा सामने आया, तो उसमें ऐसी भारी-भरकम तकनीकी और मानवीय त्रुटियां देखने को मिलीं, जिन्हें देखकर हर कोई हैरान रह गया। इस बार की गड़बड़ी किसी आम मतदाता तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें कई नामी-गिरामी राजनीतिक हस्तियों और पूर्व जनप्रतिनिधियों के रिकॉर्ड के साथ भी बड़ा खिलवाड़ उजागर हुआ है। सबसे चौंकाने वाला मामला एक जानी-मानी पूर्व महिला महापौर (Mayor) से जुड़ा है, जिनका जेंडर ही इलेक्शन कमीशन के डिजिटल पोर्टल पर महिला से बदलकर पुरुष दर्ज कर दिया गया है। इस तरह की गंभीर गलतियों के सामने आने के बाद प्रशासनिक अमले की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

बीएलओ सर्वे और डिजिटल पोर्टल की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल

किसी भी लोकतांत्रिक देश में मतदाता सूची का अपडेट होना और उसका सही डेटाबेस तैयार करना चुनाव आयोग की सबसे प्राथमिक और संवेदनशील जिम्मेदारी होती है। इसके लिए बूथ लेवल ऑफिसर्स यानी बीएलओ (BLO) को घर-घर जाकर भौतिक सत्यापन (Physical Verification) करने का कड़ा जिम्मा सौंपा जाता है। लेकिन जमीनी हकीकत और पोर्टल पर अपलोड होने वाले डेटा के बीच का यह अंतर अब प्रशासनिक लापरवाही की पोल खोल रहा है। स्थानीय जानकारों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि मैदानी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों ने नियमों के तहत सही ढंग से जांच की होती, तो इस तरह की हास्यास्पद और गंभीर गलतियां पोर्टल पर जगह नहीं पातीं। एक प्रसिद्ध महिला हस्ती और पूर्व महापौर के लिंग (Gender) जैसी बुनियादी और स्पष्ट पहचान को डिजिटल रिकॉर्ड में गलत दर्ज कर देना सीधे तौर पर सिस्टम की बड़ी लापरवाही को उजागर करता है।

सिर्फ जेंडर परिवर्तन ही नहीं, कई नेताओं के नाम और तस्वीरों में भी मिला बड़ा झोल

इस पूरे मामले के तूल पकड़ने के बाद जब अन्य रिकॉर्ड्स की पड़ताल की गई, तो पता चला कि यह चूक केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं थी। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही दलों के कई स्थानीय दिग्गज नेताओं, पूर्व पार्षदों और सक्रिय कार्यकर्ताओं के नामों की स्पेलिंग, उनकी उम्र, पते और यहाँ तक कि तस्वीरों के मिलान में भी भारी त्रुटियां पाई गई हैं। किसी का नाम गायब है तो किसी के परिवार के सदस्यों के कॉलम में फेरबदल कर दिया गया है। इस तरह की धांधली और तकनीकी गड़बड़ियों के कारण चुनाव आयोग के डिजिटल पोर्टल की प्रामाणिकता और सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। विपक्षी दलों के नेताओं का कहना है कि इस प्रकार की त्रुटियां महज संयोग नहीं हो सकतीं, बल्कि इसके पीछे प्रशासनिक स्तर पर बड़ी चूक या सुनियोजित गड़बड़ी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

आम जनता से लेकर राजनीतिक गलियारों में मची खलबली, सुधार की उठी मांग

वोटर लिस्ट में सामने आई इन गंभीर विसंगतियों के बाद अब राजनीतिक दलों और आम नागरिकों में भारी रोष देखने को मिल रहा है। सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक प्रतिनिधियों ने चुनाव आयोग से तत्काल प्रभाव से इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। मांग यह भी उठ रही है कि एसआईआर प्रक्रिया के तहत जितने भी डेटा ऑनलाइन अपडेट किए गए हैं, उनकी दोबारा से सख्त समीक्षा की जाए ताकि आगामी चुनावों में किसी भी मतदाता को अपने मताधिकार का प्रयोग करने में अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े। यदि समय रहते इन तकनीकी और मानवीय त्रुटियों को दुरुस्त नहीं किया गया, तो चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर जनता का भरोसा डगमगा सकता है। फिलहाल इस ताजा घटनाक्रम ने प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा रखा है और हर कोई यही तलाश रहा है कि आखिर इस डिजिटल गड़बड़ी के पीछे असली जिम्मेदार कौन है।