छत्तीसगढ़ के बीजापुर में गरमाया स्वास्थ्य कर्मियों का पारा: ठेका प्रथा पूरी तरह खत्म करने की उठी जोरदार मांग
छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित और दूरदराज के जिले बीजापुर में स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों का गुस्सा आखिरकार सड़कों पर फूट पड़ा है। संविदा और ठेका प्रथा के खिलाफ लामबंद हुए स्वास्थ्य कर्मियों ने जिला मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ हुंकार भरी। कर्मचारियों का कहना है कि स्वास्थ्य जैसी बेहद संवेदनशील सेवा में भी ठेकेदारी और आउटसोर्सिंग सिस्टम लागू होना उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है। अपनी लंबे समय से चली आ रही मांगों को लेकर इन कर्मचारियों ने एकजुट होकर जिला प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम एक सख्त ज्ञापन सौंपा है, जिसमें चेतावनी दी गई है कि यदि जल्द ही उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा।
स्वास्थ्य सेवाओं में ठेका प्रथा से कर्मचारियों का हो रहा शोषण
प्रदर्शन कर रहे स्वास्थ्य कर्मियों और विभिन्न संघों के प्रतिनिधियों का आरोप है कि ठेका प्रथा के तहत काम करने वाले कर्मचारियों को न तो समय पर उचित मानदेय मिल पाता है और न ही उन्हें किसी प्रकार के सामाजिक सुरक्षा लाभ या बीमा की सुविधा मिलती है। कम वेतन में भारी काम करवाने और जॉब सिक्योरिटी न होने के कारण इन कर्मचारियों का मानसिक और आर्थिक शोषण हो रहा है। कोरोना काल समेत हर आपदा के वक्त अपनी जान हथेली पर रखकर जनता की सेवा करने वाले ये कर्मचारी अब खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। उनका साफ कहना है कि जब तक इस अन्यायपूर्ण ठेका प्रथा को पूरी तरह समाप्त कर उन्हें नियमित नहीं किया जाता, तब तक उनका यह संघर्ष जारी रहेगा।
मुख्यमंत्री के नाम सौंपा गया ज्ञापन, बड़े आंदोलन की चेतावनी
बीजापुर में हुए इस विरोध प्रदर्शन के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रशासनिक अधिकारियों को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के जरिए मांग की गई है कि राज्य सरकार तुरंत इस मामले में संज्ञान ले और स्वास्थ्य विभाग में आउटसोर्सिंग या ठेके पर कर्मचारियों की भर्ती बंद करे। कर्मचारियों ने सरकार को दो टूक अल्टीमेटम दिया है कि यदि उनकी जायज मांगों पर शीघ्र ही सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो वे प्रदेश स्तर पर काम बंद हड़ताल करने के लिए मजबूर होंगे, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं भी चरमरा सकती हैं।