बंद पड़े जीएसटी नंबरों से चल रहा था करोड़ों का फर्जी कारोबार! विभाग ने की 3 हजार नंबरों की पहचान
देशभर में टैक्स चोरी और फर्जी बिलिंग नेटवर्क के खिलाफ चल रहे देशव्यापी अभियानों के बीच कर विभाग (GST Department) की तरफ से एक बेहद सनसनीखेज और बड़ा खुलासा सामने आया है। टैक्स इंटेलिजेंस और डेटा एनालिसिस के जरिए विभाग ने ऐसे करीब तीन हजार जीएसटी (GST) नंबरों की पहचान की है जो आधिकारिक तौर पर काफी पहले बंद या रद्द (Cancelled) किए जा चुके थे, लेकिन हैरानी की बात यह है कि कागजों और सिस्टम में बंद होने के बावजूद इन नंबरों के जरिए धड़ल्ले से करोड़ों रुपये का कारोबार (Turnover) किया जा रहा था। इस भारी-भरकम फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद से व्यापारिक और औद्योगिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। विभाग ने इन सभी संदिग्ध जीएसटी नंबर धारकों को कड़े नोटिस जारी कर दिए हैं और चेतावनी दी है कि यदि समय पर संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो बिना किसी देरी के सीधी एफआईआर (FIR) दर्ज की जाएगी।
कैसे चल रहा था बंद जीएसटी नंबरों से करोड़ों के लेनदेन का खेल?
जीएसटी विंग के शुरुआती तकनीकी विश्लेषण से पता चला है कि शातिर ठगों और फर्जी फर्मों ने उन कारोबारियों के पैन या जीएसटी पंजीकरण को निशाना बनाया जिन्होंने अपने व्यवसाय बंद कर दिए थे या जिनके रजिस्ट्रेशन कैंसल हो चुके थे। इन बंद नंबरों का इस्तेमाल करके बिना किसी वास्तविक माल की आवाजाही (Goods Movement) के केवल फर्जी इनवॉइस और ई-वे बिल तैयार किए जा रहे थे। इसके जरिए करोड़ों रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) क्लेम करके सरकारी खजाने को भारी चपत लगाई जा रही थी। इस तरह के सुनियोजित सिंडिकेट यह उम्मीद कर रहे थे कि बंद हो चुके नंबरों पर विभाग की पैनी नजर नहीं जाएगी, लेकिन एडवांस्ड डेटा एनालिटिक्स और एआई-बेस्ड टूल्स ने इस पूरे फर्जीवाड़े का पर्दाफाश कर दिया।
विभाग की दो टूक: नोटिस का जवाब नहीं दिया तो होगी सीधी कानूनी कार्रवाई
कर विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि जिन लगभग तीन हजार संदिग्ध जीएसटी नंबरों की सूची तैयार की गई है, उनके संचालकों और फर्म मालिकों को तुरंत प्रभाव से कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) भेज दिए गए हैं। विभाग ने इन सभी मामलों में सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने वित्तीय लेनदेन और कारोबार का वैध प्रमाण प्रस्तुत करना होगा। यदि कोई भी व्यक्ति या फर्म नोटिस का जवाब देने में असफल रहती है या फर्जीवाड़ा सही पाया जाता है, तो उनके खिलाफ आर्थिक अपराध शाखा और स्थानीय थानों में तुरंत एफआईआर दर्ज कर जेल भेजने की कार्रवाई की जाएगी।
भौगोलिक और व्यापारिक स्तर पर बढ़ाई गई निगरानी
इस बड़े खुलासे के बाद से देश के विभिन्न वाणिज्यिक केंद्रों और औद्योगिक जिलों में टैक्स अधिकारियों की टीमें पूरी तरह एक्टिव मोड में आ गई हैं। विभाग यह भी जांच कर रहा है कि इस फर्जी नेटवर्क के पीछे कौन-कौन से बड़े मास्टरमाइंड और सीए (Chartered Accountants) या सिंडिकेट सक्रिय हैं। अधिकारियों का कहना है कि फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट और बोगस बिलिंग के इस नासूर को जड़ से खत्म करने के लिए आने वाले दिनों में इस तरह की औचक जांच और सख्त चेकिंग का अभियान और अधिक तीव्र किया जाएगा।