छत्तीसगढ़ : खत्म हुआ 25 साल का इंतजार, अब DA के लिए MP सरकार के आगे नहीं फैलाना पड़ेगा हाथ
छत्तीसगढ़ के लाखों सरकारी पेंशनभोगियों के लिए एक बेहद बड़ी और ऐतिहासिक खुशखबरी सामने आई है। राज्य के गठन के बाद से पिछले ढाई दशकों यानी 25 वर्षों से चली आ रही पेंशनरों की एक सबसे बड़ी और जटिल समस्या का आखिरकार स्थाई समाधान हो गया है। अब छत्तीसगढ़ के सेवानिवृत्त कर्मचारियों और अधिकारियों को अपने महंगाई भत्ते (DA) या महंगाई राहत (DR) में बढ़ोतरी के लिए पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश सरकार की सहमति या हरी झंडी का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। दोनों राज्यों के बीच इस नियम को लेकर चल रहा पुराना गतिरोध अब पूरी तरह खत्म हो चुका है।
राज्य पुनर्गठन अधिनियम की इस धारा के चलते फंसा था पेंच
दरअसल, साल 2000 में जब मध्य प्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ नया राज्य बना, तब मध्य प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम की धारा-49 के तहत दोनों राज्यों के बीच पेंशन और भत्तों से जुड़े वित्तीय दायित्वों को साझा करने का नियम बनाया गया था। इस तकनीकी नियम की वजह से जब भी छत्तीसगढ़ सरकार अपने पेंशनरों का महंगाई भत्ता (DA) बढ़ाना चाहती थी, तो उसे मध्य प्रदेश सरकार से औपचारिक लिखित सहमति लेनी पड़ती थी। कई बार फाइलें महीनों तक भोपाल और रायपुर के चक्कर काटती रहती थीं, जिसके चलते छत्तीसगढ़ के बुजुर्ग पेंशनर्स समय पर मिलने वाले आर्थिक लाभ से महरुम रह जाते थे।
अब रायपुर से ही तुरंत जारी होंगे आदेश और बढ़ेगा पैसा
इस 25 साल पुरानी कानूनी और प्रशासनिक बाधा के हटने के बाद अब छत्तीसगढ़ सरकार पूरी तरह स्वतंत्र हो गई है। जैसे ही राज्य के नियमित कर्मचारियों का डीए बढ़ेगा, वैसे ही राज्य सरकार बिना किसी बाहरी देरी के अपने पेंशनभोगियों के लिए भी तत्काल आदेश जारी कर सकेगी। इस फैसले से प्रदेश के करीब 1.5 लाख से अधिक बुजुर्ग पेंशनर्स सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे। पेंशनर यूनियनों ने इस ऐतिहासिक फैसले का पुरजोर स्वागत किया है और इसे बुजुर्गों के सम्मान और वित्तीय स्वतंत्रता की दिशा में एक बड़ा क्रांतिकारी कदम बताया है।
नए नियम से एरियस और बढ़े हुए भत्ते का रास्ता हुआ साफ
प्रशासनिक गलियारों से मिल रही जानकारी के अनुसार, इस सहमति के बाद अब छत्तीसगढ़ के वित्त विभाग ने अपनी स्वतंत्र गाइडलाइन तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अब तक मध्य प्रदेश सरकार से मंजूरी मिलने में होने वाली देरी के कारण पेंशनर्स को मिलने वाले एरियर का भी भारी नुकसान होता था। लेकिन अब सीधे रायपुर से फैसला होने के कारण न सिर्फ समय पर पैसा बैंक खातों में आएगा, बल्कि एरियर की गणना भी बेहद पारदर्शी और तेज हो जाएगी, जिससे प्रदेश के सेवानिवृत्त कर्मचारियों की आर्थिक चिंता हमेशा के लिए दूर हो गई है।