Chhattisgarh News: नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई भीषण बाढ़, अंबिकापुर की डॉक्टर समेत छत्तीसगढ़ की तीन महिलाएं लापता
नेपाल और तिब्बत सीमा से लगे ऊंचे पर्वतीय अंचलों में प्रकृति का एक ऐसा भयानक और दिल दहला देने वाला तांडव देखने को मिला है, जिसने छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग के मुख्यालय अंबिकापुर समेत पूरे राज्य में गहरी शोक की लहर दौड़ा दी है। आमतौर पर हिमालय की इन वादियों को उनकी प्राकृतिक सुंदरता और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र माना जाता है, जहां लोग अपनी व्यस्त जिंदगी से सुकून के पल तलाशने के लिए जाते हैं। लेकिन हाल ही में जब इन बर्फीले और ऊंचाई वाले इलाकों में मौसम ने अचानक करवट ली और बादलों के फटने के कारण भीषण बाढ़ और आकाशीय आपदा आई, तो वहां पल भर में सब कुछ तबाह हो गया। इस कुदरती कहर की चपेट में छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर की रहने वाली तीन साहसी और प्रतिभावान महिलाएं भी आ गईं, जो अपने कुछ साथियों के साथ पर्वतारोहण और प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेने के लिए उस क्षेत्र की यात्रा पर गई हुई थीं। अचानक आई इस तेज बाढ़ और मलबे के बहाव में इन तीनों महिलाओं के लापता होने की खबर मिलते ही उनके परिवारजनों के साथ-साथ पूरे छत्तीसगढ़ प्रशासन में भी हड़कंप मच गया है। लापता होने वाली महिलाओं में अंबिकापुर की एक जानी-मानी और बेहद होनहार डॉक्टर भी शामिल हैं, जिन्होंने अपनी चिकित्सा सेवा से समाज में एक खास पहचान बनाई थी। आपदा की यह खबर जैसे ही छत्तीसगढ़ पहुँची, वैसे ही पीड़ित परिवारों के घरों में कोहराम मच गया और हर कोई ईश्वर से यही प्रार्थना करने लगा कि किसी तरह उनकी सुरक्षित वापसी हो जाए। स्थानीय प्रशासन से लेकर राज्य सरकार के उच्च अधिकारी और नेपाल में स्थित भारतीय दूतावास के अधिकारी लगातार इस मामले पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए हैं और युद्ध स्तर पर खोजबीन तथा बचाव अभियान चलाया जा रहा है ताकि लापता महिलाओं का कोई सुराग जल्द से जल्द हासिल किया जा सके।
नेपाल-तिब्बत सीमा पर अचानक आई बाढ़ और कुदरती कहर का मंजर
हिमालय की गोद में बसे नेपाल और तिब्बत के सीमावर्ती इलाके अपनी भौगोलिक बनावट के कारण बेहद संवेदनशील माने जाते हैं, जहां मौसम कब और किस करवट बदल ले, इसका अनुमान लगाना बड़े-बड़े मौसम वैज्ञानिकों के लिए भी मुश्किल साबित होता है। इस बार मानसून और पर्वतीय मौसमी तंत्र में आए अचानक बदलाव के चलते इन उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में बादल फटने की गंभीर घटनाएं सामने आईं, जिसके परिणामस्वरूप छोटे नाले और नदियां कुछ ही मिनटों में उफान पर आ गईं और पानी का तेज सैलाब अपने साथ चट्टानों, पेड़ों और मिट्टी को बहाकर ले जाने लगा। जब यह भयंकर प्राकृतिक आपदा आई, तो छत्तीसगढ़ से गई महिलाओं का यह दल वहीं पास के एक कैंप या ट्रेकिंग रूट पर मौजूद था। प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय गाइडों के अनुसार, पानी का बहाव इतना तेज और अचानक था कि किसी को भी संभलने या सुरक्षित स्थान पर भागने का मौका तक नहीं मिला। कुछ ही पलों में सब कुछ पानी और मलबे की चपेट में आ गया। इस अप्रत्याशित आपदा ने एक बार फिर से यह याद दिला दिया है कि इंसान चाहे कितनी भी तरक्की कर ले, लेकिन प्रकृति के इस विराट और रौद्र रूप के सामने वह कितना लाचार और विवश हो जाता है। नेपाल प्रशासन की स्थानीय आपदा प्रबंधन टीमें और रेस्क्यू दल तुरंत हरकत में आ गए और उन्होंने दुर्गम रास्तों तथा खराब मौसम के बावजूद खोज अभियान शुरू कर दिया। हालांकि, लगातार हो रही बारिश, धुंध और बर्फीले रास्तों पर पसरे मलबे के कारण बचाव कार्यों में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे लापता महिलाओं के परिजनों की चिंता दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।
अंबिकापुर की डॉक्टर समेत तीन महिलाओं के लापता होने से शहर में पसरा मातम
छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के अंतर्गत आने वाले अंबिकापुर शहर में इस हृदयविदारक घटना के बाद से पूरी तरह से सन्नाटा और मायूसी छाई हुई है। जिस डॉक्टर महिला के इस आपदा में लापता होने की पुष्टि हुई है, वे न केवल अपने परिवार की बल्कि पूरे इलाके की एक सम्मानित और मिलनसार शख्सियत थीं, जिन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद लोगों की सेवा को अपना मुख्य धर्म बनाया था। उनके साथ गई अन्य दो महिलाएं भी अंबिकापुर और आसपास के क्षेत्रों से ताल्लुक रखती थीं, जो पर्वतारोहण और घूमने-फिरने का शौक रखती थीं। जब से परिजनों को यह दुखद सूचना मिली है, तब से उनका रो-रोकर बुरा हाल है और वे समझ नहीं पा रहे हैं कि इस कुदरती विपदा से कैसे पार पाया जाए। शहर के तमाम गणमान्य नागरिक, रिश्तेदार और परिचित पीड़ित परिवारों के घर पहुंचकर उन्हें ढांढस बंधा रहे हैं और हर संभव मदद का भरोसा दे रहे हैं। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी इस पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए तुरंत संज्ञान लिया है और केंद्र सरकार तथा विदेश मंत्रालय के माध्यम से नेपाल में चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन में तेजी लाने के लिए समन्वय स्थापित किया है। हर कोई यही उम्मीद लगाए बैठा है कि चमत्कार हो और किसी सुरक्षित जगह पर इन महिलाओं के होने की कोई शुभ सूचना मिल जाए। इस घटना ने एक बार फिर से इस बात को रेखांकित कर दिया है कि जब भी लोग पर्यटन या एडवेंचर के लिए ऐसे जोखिम भरे और दूर-दराज के इलाकों में जाएं, तो वहां की भौगोलिक परिस्थितियों और मौसम की चेतावनी को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए।
प्रशासन और दूतावास स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन और युद्ध स्तर पर खोजबीन जारी
इस गंभीर और संवेदनशील संकट की घड़ी में छत्तीसगढ़ सरकार और भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के बीच लगातार उच्चस्तरीय संपर्क बना हुआ है। नेपाल स्थित भारतीय दूतावास (इंडियन एंबेसी) ने स्थानीय नेपाली प्रशासन, सेना और पुलिस के साथ मिलकर खोज और बचाव अभियान (सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन) को और अधिक तेज कर दिया है। चूंकि यह घटना नेपाल और तिब्बत के बेहद दूरदराज और दुर्गम पहाड़ी बॉर्डर पर हुई है, इसलिए वहां कम्यूनिकेशन नेटवर्क की भारी समस्या आ रही है, जिससे पल-पल की सटीक जानकारी मिलने में देरी हो रही है। इसके बावजूद, ड्रोन कैमरों, खोजी कुत्तों (स्निफर डॉग्स) और पर्वतारोहण के विशेषज्ञों की मदद से मलबे के नीचे और नदी के तेज बहाव वाले किनारों पर लगातार तलाशी ली जा रही है। छत्तीसगढ़ से भी कुछ प्रशासनिक अधिकारियों के संपर्क सूत्र नेपाल के राहत दलों के साथ लगातार जुड़े हुए हैं ताकि पीड़ित परिवारों को हर ताजा अपडेट तुरंत दी जा सके। जैसे-जैसे वक्त बीतता जा रहा है, वैसे-वैसे उम्मीदों और आशंकाओं का दौर भी गहराता जा रहा है, लेकिन बचाव दल अभी भी अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं कि किसी भी तरह से लापता महिलाओं को सकुशल ढूंढा जा सके। इस पूरी त्रासदी ने यह साबित कर दिया है कि जीवन कितना अनिश्चित है, और प्रकृति के इस तांडव के आगे इंसान कितना बेबस है। छत्तीसगढ़ की इन तीन महिलाओं की सलामती के लिए इस वक्त पूरा राज्य दुआएं मांग रहा है और हर कोई यही कामना कर रहा है कि वे जल्द से जल्द सुरक्षित अपने घर लौट आएं।