दहेज में 2 से 3 करोड़ नकद और लग्जरी कार मांगने का आरोप, जानिए पूरी खबर
छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक महकमे और नौकरशाही के गलियारों से एक बेहद चौंकाने वाली और प्रशासनिक साख पर सवाल उठाने वाली खबर सामने आई है। धमतरी में पदस्थ राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी और डिप्टी कलेक्टर मनोज बंजारे पर उनकी अपनी ही पत्नी ने दहेज प्रताड़ना, मारपीट और मानसिक उत्पीड़न का बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई है। पीड़िता पूजा बंजारे की शिकायत के अनुसार, शादी के महज दूसरे दिन से ही कम दहेज लाने को लेकर उन्हें ताने मारे जाने लगे थे। आरोप है कि अधिकारी पति और उनके परिजनों द्वारा लगातार 2 से 3 करोड़ रुपये की मोटी नकद राशि और एक महंगी लग्जरी कार की मांग की जा रही थी। मांग पूरी न होने पर पीड़िता को न केवल शारीरिक व मानसिक यातनाएं दी गईं, बल्कि उन पर मायके की कीमती जमीन बेचने तक का भारी दबाव बनाया गया। इस हाई-प्रोफाइल मामले के महिला थाने पहुंचने और परिवार परामर्श केंद्र में कराई गई काउंसलिंग के नाकाम होने के बाद पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आइए आज इस विस्तृत रिपोर्ट में जानते हैं कि इस पूरे मामले की अंदरूनी सच्चाई क्या है और महिला थाना पुलिस अब तक क्या कार्रवाई कर रही है।
शादी के दूसरे दिन से ताने और मायके की जमीन बेचकर 3 करोड़ लाने का दबाव
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरंग क्षेत्र के भानसोज निवासी पूजा बंजारे का विवाह जुलाई 2024 में धमतरी के जोधापुर वार्ड निवासी मनोज बंजारे के साथ संपन्न हुआ था। विवाह के समय मायके वालों ने अपनी हैसियत के मुताबिक सोने के जेवर, घरेलू सामान और उपहार दिए थे। हालांकि, पीड़िता का आरोप है कि सुहागरात और शादी के दूसरे दिन से ही ससुराल पक्ष यह कहकर ताने मारने लगा कि मनोज राज्य प्रशासनिक सेवा में डिप्टी कलेक्टर हैं और यदि किसी रसूखदार घराने में रिश्ता होता, तो करोड़ों रुपये की नकदी और लग्जरी कार मिलती। पीड़िता ने अपनी शिकायत में उल्लेख किया है कि जनवरी 2025 में पति ने उन पर मायके की संपत्ति बेचकर 2 से 3 करोड़ रुपये लाने का जबरन दबाव बनाया। जब उन्होंने इतनी बड़ी रकम लाने में अपनी असमर्थता जताई, तो उनके साथ बेरहमी से मारपीट और गाली-गलौज की गई।
अमानवीयता की हदें पार: गर्भावस्था और प्रसव के दौरान भी जारी रही प्रताड़ना
दहेज लोभियों की अमानवीयता का सिलसिला यहीं नहीं थमा, बल्कि पीड़िता के अनुसार उनकी गर्भावस्था के दौरान भी उन्हें लगातार प्रताड़ित किया जाता रहा। मई 2025 में प्री-मैच्योर डिलीवरी (समय से पूर्व प्रसव) के समय अस्पताल के इलाज का खर्च भी पीड़िता के मायके वालों को ही उठाना पड़ा। प्रसव के तुरंत बाद पीड़िता और उनके नवजात शिशु को मायके छोड़ दिया गया और पति ने अपना फोन नंबर भी ब्लॉक कर दिया। आरोप है कि इसके बाद भी सितंबर 2026 में पति अपने भाइयों के साथ मायके पहुंचकर गाली-गलौज, तोड़फोड़ और मारपीट करने पर आमादा हो गए।
काउंसलिंग रही विफल: पुलिस ने BNS की धाराओं में दर्ज किया मामला
पीड़िता द्वारा रायपुर के महिला थाने में न्याय की गुहार लगाए जाने के बाद सबसे पहले परिवार परामर्श केंद्र में दोनों पक्षों को बुलाकर काउंसलिंग के माध्यम से समझौता कराने का प्रयास किया गया। हालांकि, ससुराल पक्ष के अडिग रवैये के कारण सुलह की तमाम कोशिशें पूरी तरह विफल साबित हुईं। इसके बाद पुलिस ने त्वरित संज्ञान लेते हुए डिप्टी कलेक्टर मनोज बंजारे, उनकी मां ललिता बंजारे और पिता कोमल सिंह बंजारे के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 85, 115(2) और 3(5) के तहत औपचारिक मामला दर्ज कर लिया है। एक जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी पर इस तरह के गंभीर क्रिमिनल चार्ज लगने के बाद राज्य के प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है और अब देखना होगा कि जांच के बाद पुलिस क्या कानूनी कदम उठाती है।