Chhattisgarh Naxalism : शिक्षा देने वालों को क्यों डर लग रहा है अपनी जान का, सुकमा में प्रशासन पर उठा बड़ा सवाल

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News India Live, Digital Desk: Chhattisgarh Naxalism : शिक्षा और बच्चों का भविष्य हम सबके लिए बहुत मायने रखता है. लेकिन कुछ इलाक़ों में आज भी इतनी मुश्किल हालात हैं कि बच्चों को पढ़ाने के लिए जान तक का जोख़िम उठाना पड़ता है. छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा ज़िले से ऐसी ही एक बेहद चिंताजनक ख़बर आई है, जिसे सुनकर मन विचलित हो जाता है.

अभी जानकारी मिली है कि सुकमा (Sukma) ज़िले में 'शिक्षादूत' (Shiksha Doots) बच्चों को स्कूल में पढ़ाने के लिए जा तो रहे हैं, लेकिन वहाँ उन्हें बहुत डर लग रहा है. 'सिल्गेर नक्सली आतंक' (Silger Naxal terror) इतना ज़्यादा है कि शिक्षादूतों ने ज़िले के कलेक्टर से मदद की गुहार लगाई है, ताकि वे सुरक्षित तरीक़े से बच्चों को शिक्षा दे सकें. यह सुनकर वाकई बुरा लगता है कि जहाँ बच्चे अपनी पढ़ाई की ओर ध्यान दे रहे हैं, वहीं शिक्षक अपनी जान के ख़तरे में होने की चिंता में हैं.

क्या है 'सिल्गेर नक्सली आतंक' और इसका क्या असर पड़ रहा है?

'शिक्षादूत' वे लोग होते हैं जो शिक्षा से वंचित बच्चों को स्कूल तक लाने और उन्हें पढ़ाने का काम करते हैं. ये नक्सल प्रभावित इलाक़ों में अक्सर जीवन की परवाह न करते हुए ये नेक काम करते हैं. लेकिन सुकमा के सिल्गेर इलाक़े में नक्सलवाद का इतना ज़्यादा डर है कि ये शिक्षक भी ख़ुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं.

  • सुरक्षा का बड़ा संकट: शिक्षादूतों को स्कूल जाते समय या स्कूल में रहते हुए लगातार नक्सली हमले या धमकियों का डर लगा रहता है. यह बच्चों के सीखने के माहौल को भी प्रभावित करता है.
  • बच्चों की शिक्षा पर असर: अगर शिक्षक डरेंगे या स्कूलों तक नहीं पहुँच पाएंगे, तो बच्चों की पढ़ाई रुक जाएगी, जिससे उनका भविष्य अंधकारमय हो सकता है.
  • प्रशासन पर दबाव: कलेक्टर से मदद की गुहार यह दिखाती है कि प्रशासन को इस समस्या को गंभीरता से लेना होगा और इन शिक्षकों व छात्रों की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतज़ाम करने होंगे.

इस तरह की स्थिति देश के उन हिस्सों की दर्दभरी सच्चाई को बताती है जहाँ नक्सलवाद बच्चों के भविष्य और शिक्षा के अधिकार को छीन रहा है. उम्मीद है कि छत्तीसगढ़ सरकार और स्थानीय प्रशासन जल्द ही इस पर ध्यान देगा और शिक्षादूतों तथा छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे.